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एनओसी से बचाव के लिए हिब्बानामा से किया भूमि का स्थानांतरण

ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा

Updated Thu, 01 Dec 2016 12:48 AM IST
सिरसा। भले ही शासन और प्रशासन ने शहर के अनाधिकृत क्षेत्रों में रजिस्ट्री बंद कर रखी है पर भूमि की खरीद-बेच के लिए डीटीपी विभाग से एनओसी की अनिवार्यता की शर्त को तहसील कार्यालय में हवा में उड़ाया जा रहा है। एनओसी पेश न कर सकने वालों ने हिब्बानामा पेशकर भूमि का स्थानांतरण कर दिया। तहसील कार्यालय में इस वर्ष सितंबर माह तक 101 हिब्बानामा किए। जबकि एनओसी लेकर रजिस्ट्री करवाने वालों को साफ इंकार किया जाता है।
हिब्बानामा के तहत भूमि की बिक्री अथवा खरीद के लिए नगर योजनाकार विभाग से एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) की आवश्यकता नहीं होती। इसी का फायदा उठाते हुए तहसील कार्यालय के अधिकारियों व कर्मचारियों ने मिलीभगत कर रजिस्ट्री न होने पर हिब्बानामा कर भूति स्थानांतरण कर दी। बड़े स्तर पर भूमि के स्थानांतरण के इस मामले में तहसील कार्यालय ने इस आशय की तस्दीक भी नहीं की कि हिब्बानामा करवाने वालों का आपसी क्या रिश्ता है। वे रक्त संबंधी भी है या नहीं। उनके बीच पारिवारिक रिश्तेदारी भी है या नहीं। तहसील कार्यालय ने वसीकाजात में वर्णित तथ्यों के आधार पर ही हिब्बानामा पंजीकृत कर डाला। नगर योजनाकार विभाग की ओर से शहरी क्षेत्र में भूमि की खरीद-बेच के लिए एनओसी की शर्त लागू की गई है। इसी शर्त को पूरा कर पाना आसान नहीं है। डीटीपी विभाग द्वारा एनओसी जारी करने से पहले तस्दीक की जाती है, इसके आधार पर ही रजिस्ट्री संभव है। डीटीपी विभाग की सख्ती के कारण ही प्रोपर्टी डीलरों ने राजस्व विभाग के अधिकारियों से मिलकर ठगी का नया रास्ता खोजा। सीधे तौर पर भूमि का लेन-देन संभव न हो पाने के कारण खरीदने व बेचने वालों को कागजों में रिश्तेदार दर्शा दिया और डीटीपी विभाग से एनओसी लिए बगैर हिब्बानामा पंजीकृत करवा दिया।
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क्या होता है हिब्बानामा
हिब्बानामा एक प्रकार से रजिस्ट्री का ही रूप है। रजिस्ट्री में भूमि की सेल डीड लिखी जाती है। जिसमें एक पक्ष खरीददार और दूसरा पक्ष बेचने वाला होता है। जबकि हिब्बानामा में एक पक्ष दानदाता और दूसरा पक्ष दान लेने वाला कहलाता है। हिब्बानामा केवल रक्त संबंधियों के बीच ही किया जा सकता है। पारिवारिक रक्त संबंधियों को अचल संपत्ति दान में देना दर्शाया जाता है। इस प्रकार भूमि के स्थानांतरण के लिए एनओसी की अनिवार्यता भी नहीं है।
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राजस्व को भी फटका
रजिस्ट्री की बजाए हिब्बानामा पंजीकृत किए जाने से सरकार को भी राजस्व के रूप में फटका लगा है। भूमि के लेन-देन पर सरकार को कलेक्टर रेट के अनुसार रजिस्ट्री खर्च प्राप्त होता है। सरकार की आय का एक बड़ा स्त्रोत रजिस्ट्रयां है। लेकिन हिब्बानामा में भूमि की बिक्री की बजाए दान दर्शाने के कारण सरकार को रजिस्ट्री शुल्क हासिल नहीं हो पाता। हिब्बानामा के कारण सरकार को लाखों रुपये का फटका लग चुका है।
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आरटीआई में आई सच्चाई बाहर
आरटीआई एक्टिविस्ट पवन पारिक एडवोकेट द्वारा तहसील कार्यालय से आरटीआई में हिब्बानामा के बारे में जानकारी मांगी। तहसील कार्यालय द्वारा आरटीआई में दी गई जानकारी में ही यह तथ्य सामने आया कि एक जनवरी 2016 से 23 सितंबर 2016 की नौ माह की अवधि में 101 हिब्बानामा पंजीकृत किए गए है। तहसील कार्यालय ने यह भी स्वीकार किया कि उनकी ओर से हिब्बानामा पंजीकृत करते समय इस आशय की तस्दीक नहीं की कि दानदाता और दान प्राप्त कर्ता के बीच पारिवारिक रिश्तेदारी है भी या नहीं। विभाग ने बगैर पुष्टि किए ही हिब्बानामा पंजीकृत कर डाले। आरटीआई में कहा गया है कि वसीकाजात में जो वर्णित किया गया, उस को सही मानकर हिब्बानामा पंजीकृत किया गया।
तहसील कार्यालय में एनओसी की शर्त को चकमा देकर भूमि के हस्तांतरण के मामले को उजागर करने के लिए आरटीआई का सहारा लिया गया। पवन पारिक एडवोकेट ने तहसील कार्यालय से एक जनवरी 2016 से 23 सितंबर 2016 की अवधि में कुल कितने हिब्बानामा पंजीकृत किए गए? हिब्बानामा में दानदाता और दान ग्रहणकर्त्ता के बीच क्या पारिवारिक नातेदारी है? पंजीयन अधिकारी द्वारा हिब्बानामा में दोनों पक्षों के बीच दर्शायी गई नातेदारी की पुष्टि किस आधार पर की गई?
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सीएम विंडो पर शिकायत
व्हीस्ल ब्लोअर प्रवीण कुमार अग्रवाल एडवोकेट ने तहसील कार्यालय में हिब्बानामा के नाम पर किए गए गोरखधंधे की सीएम विंडो पर शिकायत की। शिकायत में कहा गया कि तहसील कार्यालय के अधिकारियों-कर्मचारियों ने मोटी घूस लेकर नियम विरुद्ध कार्य किया है। जिन लोगों के बीच नातेदारी नहीं है, खून का रिश्ता नहीं है, उनके हिब्बानामा पंजीकृत किए गए है। प्रवीण अग्रवाल ने कहा कि हिब्बानामा अनाधिकृत एरिया की भूमि के लिए ही क्यों किए गए। जिस जगह की एनओसी की शर्त पूरी नहीं होती, उसी क्षेत्र के हिब्बेनामा पंजीकृत किए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि रिश्वत लेकर किए कार्य उचित कैसे हो सकते है।
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