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बैंकों में कैश खत्म, घरों में राशन

ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा

Updated Thu, 01 Dec 2016 12:49 AM IST
सिरसा। नोट बंदी के बाद लोगों की परेशानी कम होने का नाम नहीं लेे रही है। बैंकों में कैश खत्म सिलसिला निरंतर जारी है। जब से 500 और एक हजार के नोट बंद हुए हैं तब से ही लोगों को अपने जरूरी काम काज छोड़ कर बैंकों में राशि निकलवाने के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है। हालांकि हर व्यक्ति को रोजाना और सप्ताह में अपने खाते से राशि निकालने की सीमा निर्धारित की हुई पर इस सीमा तक राशि निकालने के लिए भी लोगों को बैंकों से कैश नहीं मिल रहा। लोगों का कहना है कि बैंकों में कैश नहीं मिल रहा है इससे उनके सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। घरों में राशन खत्म हो गया है। बैंक अधिकारियों का मानना था कि नोट बंदी के एक सप्ताह बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी पर अब तक तीन सप्ताह बीत चुके हैं और स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है।
नोट बंदी के बाद लोगों की तकलीफ बढ़ती जा रही है। हर रोज की भांति बुधवार को भी कैश के लिए मारामारी का माहौल देखने को मिला। आज लगभग बैंकों में कैश की समस्या रही। 80 प्रतिशत बैंकों में कैश खत्म था। बैंक कर्मी लाइनों में लगे लोगों को कैश खत्म होने की बात कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं। इसी प्रकार बुढ़ापा पेंशन लेने के लिए पहुंचे बुजुर्ग लोगों को भी पेंशन की राशि नहीं मिल पाई। बुजुर्ग भी आए दिन पेंशन के लिए बैंकों के चक्कर काट रहे हैं पर खाली हाथ लौटने के सिवाय उनके पास कोई चारा नहीं होता। जिले के 215 गांवों के 37 हजार बुजुर्गों की पेंशन सहकारी बैंकों में आरबीआई द्वारा लेनदेन पर रोक लगाए जाने के बाद अटकी हुई है। बुधवार को भी बैंक खुलने से पहले ही लोग राशि जमा करवाने और नोट बदलवाने के लिए बैंकों के समक्ष कतारों में खड़े हो गए। बैंकों में कैश पर्याप्त मात्रा में न होने के कारण लोगों को कम राशि दी गई। किसी को सिक्के थमा दिए गए तो किसी को फटे नोट लेकर लौटना पड़ा। कई बैंकों में दोपहर तक राशि समाप्त हो जाने के कारण लोगों को खाली हाथ भी लौटना पड़ा। बता दें कि जिले में 31 बैंक और 231 शाखाएं हैं जिनमें से एक सहकारी बैंक, 41 शाखाएं और 36 पैक्स पर आरबीआई द्वारा लेने-देन पर रोक लगाए जाने के बाद काम ठप्प है। सभी बैंक और शाखाओं में काम निरंतर चलता तो काफी राहत मिल जाती। सहकारी बैंकों के लेन-देन पर आरबीआई द्वारा रोक लगाए जाने पर जिले में पौने तीन लाख किसानों की समस्या बढ़ गई है।
सहकारी बैंकों में 90 प्रतिशत खाताधारक किसान हैं। बिना ब्याज पर किसानों को ऋण भी केवल यही बैंक देता है। इसके साथ सीजन में बीज व खाद भी इस बैंक से किसानों को उपलब्ध करवाने का सहकारी बैंक काम करता है। परंतु अब आरबीआई द्वारा सहकारी बैंकों के लेन-देन पर रोक लगाने के बाद सारे काम ठप हो गए हैं। इससे जिले के करीब पौने तीन लाख किसान प्रभावित हैं।
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150 में से अधिकतर में एटीएम में नहीं कैश
जिले में बुधवार को अधिकतर एटीएम में कैश न होने के कारण लोगों की समस्या कम नहीं हुई। लोग सुबह-सवेरे से ही लाइनों में लग गए पर एटीएम में कैश नहीं आया। जिल के अधिकतर एटीएम आज भी सफेद हाथी बने रहे। लोगों को दो-ढाई हजार रुपये तक की राशि के लिए बैंकों में न जाना पड़े इसके लिए एटीएम ही सहारा बन सकते थे पर एटीएम में कैश न होने के कारण लोगों की समस्या कम नहीं हो रही। आज कुछ ही एटीएम में कैश था वो भी 11 बजे के बाद शुरू हुए।
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व्यवसाय पर पड़ रहा है असर
सिरसा। नोट बंदी का असर कारोबार पर पडना स्वाभाविक है। फसली सीजन होने के कारण आढती और किसानों को इससे सबसे अधिक परेशानी हो रही है। फसलों की राशि बाजारों में ट्रैवल करती है इस लिए सभी प्रकार के कारोबार इस सीजन में खूब चलते हैं पर इस बार ऐसा नहीं हुआ। इस बार सीजन में काम बढने की बजाय रूटिन से भी कम हो गया है। अनाज मंडी के आढती उपनेश अरोड़ा ने बताया कि नोट बंदी का सबसे अधिक असर आढतियों पर पड़ा है इसी लिए किसान भी इससे सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। किसानों को देने के लिए आढतियों के पास कैश नहीं है क्यों कि एक सप्ताह में मात्र 50 हजार रुपये निकालने की सीमा निर्धारित है। 50 हजार निकालने के लिए भी मसक्कत करनी पड़ती है। ऐसे में किसानों के साथ-साथ सभी आढती भी परेशान हैं।
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केवल ओबीसी ने दी बुढ़ापा पेंशन  
बुढ़ापा पेंशन के लिए हर रोज धक्के खा रहे बुजुर्गों को आज ओबीसी बैंक ने कुछ राहत प्रदान की है। आज इस बैंक में केवल बुढ़ापा पेंशन ही वितरित की गई। इसके तहत आज बुजुर्गाें की कई दिनों बाद जेबें हरी हो सकी। परंतु सभी बैंकों में यह स्थिति नहीं है। शेष बैंकों में बुजुर्गों को पेंशन के लिए ज्यों के त्यों ही धक्के खाने पड़ रहे हैं।
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