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...तो ढूंढते रह जाएंगे दुल्हन

Rohtak

Updated Tue, 04 Dec 2012 05:30 AM IST
बहादुरगढ़। जिले में बिगड़ रही लिंगानुपात की स्थिति भयानक होती जा रही है। वह दिन दूर नहीं जब क्षेत्र के युवा दुल्हनों को ढूंढते रह जाएंगे। वहीं भाइयों की कलाइयां भी राखियों के लिए मोहताज हो जाएंगी।
प्रदेश में झज्जर जिले में लिंगानुपात निरंतर बिगड़ता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1 हजार लड़कों के मुकाबले जिले में लड़कियों की संख्या मात्र 784 है। इस स्थिति को देखते हुए जहां स्वास्थ्य विभाग चिंतित है, वहीं सरकार भी कठोर कदम उठा कर भ्रूण हत्या को रोकने का प्रयास कर रही है। इसी के चलते हाल ही में जिले के सभी अल्ट्रासाउंड केन्द्रों की मशीनों पर कैमरे लगा कर उन्हें जिला मुख्यालय से जोड़ा गया है। साथ ही अल्ट्रासाउंड के लिए आने वाली प्रत्येक गर्भवती महिला की पहचान के बाद ही अल्ट्रासाउंड किए जाने की कवायद शुरू की गई है। हालांकि सरकार के इस कदम के बाद जिले में लिंगानुपात की स्थिति में कुछ सुधार आया है। लेकिन इसके बावजूद भी क्षेत्र में लिंगानुपात की स्थिति निरंतर बिगड़ रही है। सरकारी आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो शहरी क्षेत्र में पिछले 10 महीनों में पैदा हुए बच्चों में लड़कों की संख्या अधिक है। ऐसे में साफ जाहिर है कि क्षेत्र में अब भी कुछ अल्ट्रासाउंड संचालकों द्वारा लिंग की जांच की जा रही है।
दस महीनाें में लड़के अधिक पैदा हुए
जन्म-मृत्यु कार्यालय में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2012 में शहरी क्षेत्र में 425 बच्चों ने जन्म लिया। इनमें 227 लड़के और 198 लड़कियां शामिल रहीं। वहीं फरवरी में 440 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें 256 लड़के और 184 लड़कियां पैदा हुई। मार्च में जन्मे 371 बच्चों में 229 लड़के और 142 लड़कियां हुई। अप्रैल माह में 361 बच्चों ने जन्म लिया। इनमें 203 लड़के व 158 लड़कियां शामिल रही। म्रई में 209 लड़के व 159 लड़कियों ने जन्म लिया। जून के महीने में 262 बच्चों ने जन्म लिया। इनमें 149 लड़के व 113 लड़कियां शामिल रहीं। जुलाई में जन्में 268 बच्चों में लड़कियों की संख्या 111 व लड़कों की संख्या 157 रहीं। अगस्त में 334 बच्चों ने जन्म लिया। इनमें 160 लड़के व 139 लड़कियां शामिल रहीं। अक्तूबर माह में 188 लड़के और 122 लड़कियों ने जन्म लिया।
आंकड़ों से साबित होता है कि 10 महीनों में कोई भी महीना ऐसा नहीं है कि जिसमें लड़कियों की संख्या अधिक हो। लोगों का मानना है कि बिगड़ती लिंगानुपात की स्थिति भविष्य के लिए खतरे की घंटी है।
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