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खेतों में बिजली टॉवरों का मांगा मुआवजा

Rohtak

Updated Fri, 09 Nov 2012 12:00 PM IST
रोहतक। खेतों में लगे पावर ग्रिड टॉवरों को लेकर किसानों ने लघु सचिवालय के प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन में 35 गांवों के किसानों ने हिस्सा लिया। किसानों का कहना था कि बिना मुआवजे ही टावर लगाए जा रहे हैं और जिस जमीन में टॉवर लगाए जाते हैं वह जमीन हमेशा के लिए खराब हो जाती है। किसानों ने आरोप लगाया है कि कंपनी के अधिकारी जबरन खेतों में पावर ग्रिड के टॉवर लगा रहे हैं। प्रदर्शन से पहले हुई बैठक में किसानों ने निर्णय लिया कि बिना मुआवजे के टॉवर नहीं लगाने देंगे और जहां भी टॉवर लगाए गए हैं उनका भी मुआवजा लिया जाएगा।
वीरवार को 35 गांवों के किसान छोटूराम पार्क में एकत्रित हुए। किसानों ने कहा कि नियमों कायदों को दरकिनार कर खेतों में पावर ग्रिड टॉवर लगाए जा रहे हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि खेतों में टॉवर लगाने से बिजली तार टूटने से आए दिन किसानों की फसलें जल जाती हैं। किसानों ने कहा कि 1972 में भाखड़ा ब्यास बोर्ड ने पावर ग्रिड टॉवर लगाते समय किसानों को मुआवजा दिया था। किसान नेता प्रीत सिंह ने कहा कि धारा 165 के तहत किसानों को मुआवजा मिलना चाहिए। किसानों को मुआवजा न देकर सरकार अन्याय कर रही है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश पर अनेक स्थानों पर किसानों को सात लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जा चुका है। बैठक में निर्णय लिया कि बिना मुआवजे के खेतों में टॉवर नहीं लगाने देंगे। बैठक के बाद किसान प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। साथ ही किसानों ने आगामी रणनीति के लिए 36 सदस्यीय संघर्ष समिति का गठन किया है। प्रदर्शनकारियों में दिलावर सिंह, ओमप्रकाश, सुखवीर, धर्मवीर, बिजेंद्र, जोगेंद्र, शमशेर सिंह, कर्णसिंह, डॉ. रामकुमार, राजेश, धर्मवीर व महासिंह भी शामिल थे।

ये हैं मांगे
बिजली विभाग द्वारा 440 केवी, 220 केवी और 132 केवी की जो लाइनें निकाली जाती हैं। उस भूमि के फसली मुआवजे के अतिरिक्त प्रयोग में ली जा रही जमीन का अधिग्रहण करके मार्केट रेट से मुआवजा दिया जाए। गेहूं के समर्थन मूल्य निर्धारित करवाकर घोषित किया जाए और गन्ने का भाव भी शीघ्र निर्धारित किया जाए। बिजली के टॉवर लगाने के कारण किसानों द्वारा बिछाई गई पानी की लाइन क्षतिग्रस्त या टूटने पर उसका नुकसान बिजली विभाग द्वारा अदा करवाया जाए।
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