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नारनौल के अस्पताल में फिर जच्चा-बच्चा की मौत

Rohtak

Updated Fri, 21 Sep 2012 12:00 PM IST
नारनौल। स्वास्थ्य मंत्री के गृह क्षेत्र के सामान्य अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत का सिलसिला नहीं थम रहा। बुधवार तड़के नारनौल के सामान्य अस्पताल में डिलिवरी के लिए आई गांव खुडाना निवासी आशा व उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई। सितंबर माह में इस अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत का यह दूसरा मामला है। इससे पहले 6 सितंबर को इसी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी। मृतका के परिजनों का आरोप है कि चिकित्सकों की लापरवाही के कारण जच्चा-बच्चा की मौत हुई है।
गांव खुडाना निवासी सुखपाल ने बताया कि उन्होंने मंगलवार को अपने भाई की पत्नी आशा (23) को डिलीवरी के लिए महेंद्रगढ़ के सरकारी अस्पताल में दाखिल करवाया था। देर रात चिकित्सकों ने आशा को सामान्य अस्पताल नारनौल रेफर दिया। रात करीब एक बजे आशा को नारनौल ले जाकर भर्ती करवाया गया। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने जच्चा-बच्चा को बिल्कुल स्वस्थ बताते हुए सामान्य डिलीवरी कराने की बात कही। सुबह चार बजे चिकित्सकों ने परिजनों को बताया कि बच्चे की पेट में ही मौत हो चुकी है और मां की हालत भी गंभीर है, इसलिए हम जच्चा को पीजीआई रोहतक रेफर कर रहे हैं। सुखपाल ने बताया कि परिजन काफी देर तक चिकित्सकों के समक्ष आपरेशन कर जच्चा को बचाने के लिए गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन चिकित्सकों ने जच्चा को जबरदस्ती रेफर कर अपना पल्ला झाड़ लिया। परिजन उसे रोहतक लेकर जा रहे थे कि महेंद्रगढ़ के निकट महिला ने दम तोड़ दिया।
पहले भी हो चुकी हैं जच्चा-बच्चा की मौत
सामान्य अस्पताल नारनौल से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी माह से 20 सितंबर तक 60 नवजात शिशुओं व चार महिलाओं की डिलीवरी के दौरान मौत हो चुकी है। हालांकि जिला स्वास्थ्य विभाग ने सामान्य अस्पताल नारनौल में प्रति माह 500 से 600 पैदा होने की बात कह कर इन मौतों को सामान्य बता रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि स्वास्थ्य विभाग जच्चा-बच्चा की इन मौतों से कोई सबक नहीं ले रहा।
32 डाक्टरों में से सिर्फ 14 ड्यूटी पर
आंकड़ों के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले का एकमात्र 100 बेड का अस्पताल 14 चिकित्सकों के भरोसे चल रहा है। सिविल अस्पताल में प्रतिदिन 500 से 600 मरीज उपचार के लिए आते हैं, लेकिन अस्पताल में स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की कमी होने के कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सिविल अस्पताल में चिकित्सकों के कुल 42 पद स्वीकृत हैं। अस्पताल के रिकार्ड के अनुसार, 32 चिकित्सक हैं, लेकिन वास्तव में ड्यूटी पर 14 चिकित्सक ही हैं। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, 32 चिकित्सकों में से 6 चिकित्सक बिना कारण बताए अनुपस्थित चल रहे हैं, चार महिला चिकित्सक प्रसव अवकाश पर हैं और 6 चिकित्सक आन डेपूटेशन हैं। एक चिकित्सक उच्च शिक्षा के लिए अवकाश पर है।
सबसे आसान इलाज ‘रेफर’
सामान्य अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के चलते आपातकालीन वार्ड में आने वाले सड़क दुर्घटनाओं के 90 प्रतिशत मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। रात्रि के समय तो स्थिति और भी बदत्तर रहती है। ऐसे मामलों में ज्यादातर मरीजों की रोहतक या जयपुर पहुंचने से पहले की मौत हो जाती है। जो गहन चिंता का विषय है।
चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को उपचार लेने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चिकित्सकों की कमी के बारे में उच्चाधिकारियों को पत्र लिख कर अवगत करवाया गया है। स्वास्थ्य मंत्री से भी उन्होंने इस बारे बात की है। स्वास्थ्य मंत्री ने उन्हें इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान कराने का आश्वासन दिया है।
डा. पंकज वत्स, सिविल सर्जन, नारनौल।
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