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जानलेवा स्तर पर पहुंची औद्योगिक क्षेत्र की हवा

Rohtak Bureau

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Updated Sat, 11 Nov 2017 12:54 AM IST
जानलेवा स्तर पर पहुंची औद्योगिक क्षेत्र की हवा
अमित विश्वकर्मा
रेवाड़ी।
दिल्ली और एनसीआर में जहरीली हवा के चलते आपातकाल (एयर इमरजेंसी) घोषित करने के बाद जिले का औद्योगिक क्षेत्र भी जानलेवा प्रदूषण की चपेट में है। यहां पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर सामान्य सीमा से कई गुना अधिक हो चुका है। इससे प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर लोगों को स्वास्थ्य समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
9 नवंबर को दिल्ली के साथ धारूहेड़ा से लगते भिवाड़ी में पीएम 2.5 का स्तर 486 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया था। जबकि इसका स्तर 60 तक ठीक माना जाता है। अर्थात यहां के हालात भी बद्तर स्थिति में पहुंच चुके हैं। एअर क्वालिटी इंडेक्स मापने के संयत्र गुरुग्राम, रोहतक एवं बहादुरगढ़ में लगाए गए हैं। धारूहेड़ा से लगते भिवाड़ी में भी हवा में जानलेवा कणों की मात्रा जानने के लिए व्यवस्था की गई है। भिवाड़ी में पीएम2.5 का निर्धारित मात्रा से 70 फीसदी अधिक पाया जाना धारूहेड़ा एवं बावल के लिए गहरी चिंता का विषय है। इन क्षेत्रों में प्रदूषण का लेवल कम करने के लिए तुरंत हेलिकॉप्टर से बरसात करने की आवश्यकता है।
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यूं समझिए प्रदूषण की थ्योरी
इन दिनों एयर क्लवालिटी इंडेक्स, पीएम 2.5 और पीएम 10 शब्द बहुत ज्यादा प्रचलन में हैं। सुप्रीम कोर्ट से लेकर राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) इस पर संबधित विभागों एवं प्रदेश सरकारों को फटकार लगा चुकी है। पीएम का मतलब है पार्टिक्यूलेट पॉल्यूशन से है। अर्थात हवा में ऐसे कण जो फेफड़ों में जाकर व्यक्ति के लिए जानलेवा हो सकते हैं। पीएम 2.5 से मतलब हवा में कणों के साइज से है। 2.5 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के कण व्यक्ति के शरीर के अंदर सांस लेते समय अंदर चले जाते हैं। वहीं 10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर कण भी सांस के साथ फेफड़ों में जाने से जानलेवा हो सकते हैं। केेंद्रीय प्रदूषण बोर्ड की ओर से 12 मानक निर्धारित किए हुए हैं। जिनमें सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड एवं कॉर्बन मोनोक्साइड सहित अनेक जहरीली गैस शामिल हैं। इनके चलते वायुमंडल में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।
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सांस एवं हॉर्ट के पेशेंट की जान पर बन सकती है आफत
विशेषज्ञों के अनुसार पीएम2.5 का लेवल 100 के पार जाते ही खतरनाक स्थिति में आ जाता है। ऐसी स्थिति में वायुमंडल में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। जब प्रदूषित तत्व सांस के अंदर फेफड़ों में जाते हैं तो इसका सीधा प्रभाव हमारे श्वसन तंत्र पर पड़ता है। जिससे सांस एवं हार्ट के रोगी बढ़ जाते हैं। सबसे बड़ी आफत पहले से इन बीमारियों से पीड़ितों पर आती है। यदि जरा भी लापरवाही की गई तो जान तक पर बन सकती है। चिकित्सकों का कहना है कि ऐसे लोगों को सुबह एवं शाम के समय घर पर ही रहना चाहिए। वहीं लोगों को अपने आसपास कूड़ा एवं लकड़ी आदि से चूल्हा नहीं जलाना चाहिए। वहीं धूल आदि से बचने के लिए पानी का छिड़काव करना जरूरी है। जिले की एयर क्लवालिट इंडेक्स खराब होने से नागरिक अस्पताल में सांस एवं हार्ट के बीमारी से पीड़ितों की संख्या में 15-20 की वृद्धि हो गई है।
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ईंट भट्ठों पर लगी रोक
जिला उपायुक्त ने आदेश पारित कर जिले में बिना जिगजैग के चल रहे सारे ईंट भट्ठे चलाने पर रोक लगा दी है। इसके अतिरिक्त होटल एवं ढाबों पर भी लकड़ी व कोयला जलाने पर भी पाबंदी लगा दी है। उन्होंने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में सभी ईंट भट्ठों को आगामी आदेशों तक बंद कराएं। नगर पालिका एवं नगर परिषद क्षेत्रों में सभी पार्किंग स्थलों पर फीस बढ़ाकर चार गुना करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही निर्देश दिए हैं कि सफाई करते समय धूल नहीं उड़े। इसके लिए सफाई मैकेनाइज मशीन का उपयोग किया जाए।
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प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयां होंगी बंद
प्रदूषण मंडल ने नोटिस जारी कर प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को बंद करने के आदेश दिए हैं। साथ ही किसी भी तरह के निर्माण कार्य पर भी पाबंदी के लिए कहा है। यह आदेश 14 नवंबर तक जारी रहेगा। इस दिन एनजीटी की अदालत में सुनवाई है।
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प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को तुरंत प्रभाव से बंद करने के आदेश दे दिए हैं। साथ ही निर्माण कार्य पर भी पाबंदी के लिए नोटिस दिए हैं। नियमों की अवहेलना पाई जाने पर तुरंत प्रभाव से कार्रवाई होगी।
कुलदीप, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण मंडल
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औद्योगिक क्षेत्र में हालात बदतर हो चुके हैं। पीएम2.5 का स्तर 486 पर पहुंचना प्रशासन एवं लोगों के लिए चिंता का विषय है। प्रशासन के साथ आम लोगों को भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। तभी इस आपदा से बचा जा सकता है। अभी तक शहर की स्थिति उतनी बुरी नहीं है। फिर श्वासं एवं हॉर्ट से पीड़ितों की संख्या में 15-20 वृद्धि हो गई है। सुबह एवं शाम वॉक को कुछ दिनों के लिए बंद करना सबसे बेहतर होगा। क्योंकि इसका असर सुबह एवं शाम के समय सबसे ज्यादा रहता है।
-डॉ रणवीर सिंह, वरिष्ठ फिजिशयन, नागरिक अस्पताल, रेवाड़ी।
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