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टूट गई पटरी, बची सैकड़ों जान

Panipat

Updated Wed, 05 Dec 2012 05:30 AM IST
पानीपत। अंबाला-दिल्ली रेलवे ट्रैक स्थित बाबरपुर रेलवे स्टेशन पर डाउन ट्रैक में दरार आने से 18 इंच का टुकड़ा निकल गया। इससे इंटर लाकिंग सिस्टम से सिग्नल व्यवस्था ठप हो गई और बड़ा हादसा होने से बच गया। यदि सिग्नल ठप नहीं होते तो बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि कुछ ही क्षणों में यहां से कालका-दिल्ली शताब्दी को गुजरना था। ट्रैक फ्रैक्चर होने से अधिकारियों की सांसें फूल गईं। रेलवे ने डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद ट्रैक को सामान्य किया। कालका-दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस समेत चार गाड़ियां लेट हो गईं। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
घटना मंगलवार सुबह 7:45 बजे की है। जम्मूतवी से पुणे जाने वाली झेलम एक्सप्रेस बाबरपुर स्टेशन से डाउन में सुबह 7:45 पर क्रास हुई। झेलम के निकलते ही रेलवे स्टेशन की सिग्नल प्रणाली ठप हो गई। स्टेशन अधिकारियों ने सिग्नल नहीं मिलने पर कालका से दिल्ली जा रही 12006 शताब्दी एक्सप्रेस को रेलवे स्टेशन से पहले इमरजेंसी में रुकवा दिया। रेलवे अधिकारियों ने स्टेशन मुआयना किया और वहां से 18 इंच का टुकड़ा निकला दिखा। इस जानकारी के बाद रेल विभाग में अफरातफरी मच गई।
स्टेशन अधिकारियों ने इसकी सूचना पानीपत इंजीनियर विभाग सहित दिल्ली मुख्यालय में दी। सूचना मिलते ही पानीपत, करनाल और कुरुक्षेत्र के इंजीनियर मौके पर पहुंचे और डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद ज्वाइंट लगाकर ट्रैक को सामान्य किया। अधिकारियों ने सावधानी के साथ 9:25 बजे पर शताब्दी एक्सप्रेस को क्रास कराया।
ये चार गाड़ियां हुईं प्रभावित
गाड़ी लेट समय
कालका-दिल्ली शताब्दी 1.05 घंटे
अंबाला-दिल्ली ईएमयू शटल 1.25 घंटे
बठिंडा एक्सप्रेस 30 मिनट
सचखंड एक्सप्रेस 20 मिनट
यात्रियों को हुई भारी परेशानी
कालका से दिल्ली जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस के बाबरपुर से पहले अचानक रुकते ही यात्रियों के दिलों की धड़कनें बढ़ गईं। कुछ यात्री से ट्रेन से नीचे उतर गए और मामले का पता लगाने लगे। वहीं दूसरी तरफ पानीपत स्टेशन पर रुकने ईएमयू शटल समय पर नहीं पहुंची। इससे यात्रियों को घंटों ट्रेन का इंतजार करना पड़ा और परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ यात्री ट्रेन का इंतजार करने की बजाय बस यातायात का सहारा लेकर अपने गंतव्य की तरफ रवाना हो गए। इसके चलते बस स्टैंड पर भी यात्रियों की खासी भीड़ रही।
इंटरलाकिंग सिस्टम से बचा हादसा
बाबरपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रैक फ्रैक्चर का पता इंटरलाकिंग सिस्टम की वजह से कंट्रोल पैनल पर इंडीगेशन होने से पता लगा। अधिकारियों ने बताया कि ट्रैक में किसी प्रकार की दिक्कत होने पर सिग्नल प्रणाली काम करना बंद कर देती है। चालक को सिग्नल नहीं मिलने पर गाड़ी को रोकना पड़ता है। रेलवे के हाल ही में शुरू इंटरलाकिंग सिस्टम प्रणाली से एक गाड़ी को दूसरी गाड़ी के पीछे आसानी से चलाया जा सकता है। इंटरलोकिंग सिस्टम का पैनल स्टेशन मास्टर के पास होता है। इससे गाड़ी की स्थिति का पता लग जाता है।
ये है ट्रैक फ्रैक्चर
ट्रैक से टुकड़ा निकलना रेलवे की भाषा में ट्रैक फ्रैक्चर कहलाता है। बाबरपुर रेलवे स्टेशन पर 18 इंच के क्षेत्र में एक-एक इंच के दो फ्रैक्चर आ गए थे। इससे 18 इंच का टुकड़ा ट्रैक से अलग हो गया था।
अधिकारियों ने ट्रैक में निकाली कमी
रेलवे के तकनीकी अधिकारियों ने भी हादसा स्थल के आसपास लाइन में कमी निकाल दी है। अधिकारियों का मानना है कि यहां लाइन 2009 में बिछाई थी। यहां पर रेलवे अधिकारियों को ट्रैक का रंग भी काला मिला। इस जगह पर एक गांठ भी थी। ट्रैक में दरार आने का कारण फिलहाल यह गांठ माना जा रहा है।
इसलिए छोड़ते हैं गेप
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बबैल के प्राचार्य एवं रसायन विशेषज्ञ जोगेंद्र सिंह ने बताया कि गरमी की वजह से तापमान बढ़ जाता है और तापमान बढ़ जाने से धातु के कण ज्यादा कंपन करना शुरू कर देते हैं। उससे धातु फैल जाती है। यदि ट्रैक में गेप न हो तो पटरी के मुड़ने का भय रहता है। क्योंकि धातु को फैलने की जगह नहीं मिलेगी। ठंड में धातु के परमाणु का वाईब्रेशन कम हो जाता है। इससे धातु के परमाणु एक दूसरे के नजदीक आ जाते हैं। इसलिए सर्दी में धातु सिकुड़ जाती है।
वर्जन
मंगलवार सुबह डाउन में झेलम एक्सप्रेस के क्रास होने पर ट्रैक लाल हो गया। सिग्नल प्रणाली बंद होने की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। शताब्दी एक्सप्रेस को पिछले स्टेशन पर रोकना पड़ा और करीब साढ़े नौ बजे ट्रैक सुचारु हो पाया। पटरी ठंड के कारण टूट गई थी।
रमेश चंद्र, सहायक स्टेशन मास्टर, रेलवे स्टेशन बाबरपुर
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