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134ए के विरोध में स्कूल रहे बंद

Panipat

Updated Tue, 30 Oct 2012 12:00 PM IST
पानीपत। स्कूल संचालक 134ए को निरस्त करने की मांग को लेकर खुलकर सामने आ गए हैं। स्कूलों के सांझा मंच के बैनर तले विरोध स्वरूप तीन दिवसीय हड़ताल के पहले दिन 98 प्रतिशत स्कूल बंद रहे। इसका सीबीएसई, प्राइवेट, अस्थायी, गैर और मान्यता प्राप्त स्कूल संचालकों ने समर्थन दिया। स्कूल संचालकों ने 134ए और आरटीई को एक साथ लागू करने से साफ इनकार कर दिया और विद्यार्थियों और समाज के हित को देखते हुए आरटीई को लागू करने की मांग की। सोमवार को दो दिन की छुट्टी के बाद हड़ताल के चलते स्कूल हड़ताल के चलते बंद रहे। विद्यार्थी पूरा दिन अपने घर पर रहे।
बैठक कर नीतियों पर जताया रोष
सांझा मंच के बैनर तले स्कूल संचालकों ने सोमवार को आर्य बाल भारती पब्लिक स्कूल में बैठक की और सरकार की नीति और नीयत पर रोष जताया। इसका संचालन राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने किया। सांझा मंच के प्रदेश सदस्य विजेंद्र मान ने कहा कि सरकार आरटीई और 134ए दोनों को लागू करने का दबाव स्कूल संचालकों पर डाल रही है। इसमें 25-25 प्रतिशत विद्यार्थियों को लाभ दिया जाना है। स्कूल संचालक 50 प्रतिशत विद्यार्थियों का दबाव सहन करने में सक्षम नहीं हैं। शिक्षा अधिकारियों और सरकार के सामने स्कूल एसोसिएशन कई बार अपनी मांग रख चुकी हैं, लेकिन सरकार उनकी सुनने को तैयार नहीं।
स्कूलों को नहीं मिल पाई मान्यता
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण नारंग ने बताया कि आरटीई के तहत स्कूलों को मान्यता नहीं दी जा रही। 2001 से जिले के स्कूल मान्यता को तरस रहे हैं। शिक्षा नियमावली 2003 और 2009 लागू होने के बाद अब आरटीई लागू हो गई है। आरटीई के तहत 2011 में 89 स्कूलों द्वारा मान्यता की फाइल जमा कराई थी। शिक्षा निदेशालय द्वारा मान्यता देने के लिए 30 सितंबर निश्चित की थी। जिला शिक्षा विभाग द्वारा मांगी सभी जानकारियां जुटा दी गई हैं, लेकिन अब तक मान्यता को लेकर कोई विचार विमर्श नहीं हुआ।
हाई प्रोफाइल लोगों को मान्यता हाथोंहाथ
आर्य बाल भारती स्कूल के प्रबंधक आजाद सिंह आर्य ने कहा कि सरकार शिक्षा को भी वोट की राजनीति में शामिल कर रही है। हाई प्रोफाइल लोग स्कूल बनाकर हाथोंहाथ मान्यता ले लेते हैं। इससे शिक्षा व्यापार बनता जा रहा है। इन बड़े स्कूलों में संस्कार पूर्ण शिक्षा नहीं दी जा रही। उन्होंने कहा कि 134ए और आरटीई दोनों एक साथ पूरे देश में कहीं पर भी लागू नहीं है। इस मौके पर जयपाल सैनी, सतीश भराड़ा, अनिल जताना, सुरजभान सैनी, प्रकाशी देवी, बलबीर, नरेंद्र, सचिन आनंद, अशोक मलिक, किशोर मल्होत्रा, अवनीश ठाकुर और राजेश बतरा मौजूद रहे।
ये है 134ए
अधिनियम 134ए शिक्षा नियमावली 2009 का हिस्सा है। इसके तहत स्कूलों में 25 प्रतिशत विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा दी जानी है। इसमें बच्चे को दाखिला देने के लिए अभिभावकों की आय दो लाख रुपये से कम और मेरिट का आधार मानना है। इन 25 प्रतिशत विद्यार्थियों की फीस का भार शेष 75 प्रतिशत पर डालना था। सरकार के इस आदेश का चारों तरफ विरोध हुआ तो शिक्षा निदेशालय ने 25 प्रतिशत विद्यार्थियों की फीस का भार शेष 75 प्रतिशत पर डालने का आदेश वापस ले लिया। इन विद्यार्थियों की फीस का फैसला गोलमोल छोड़ दिया। स्कूल संचालक 25 प्रतिशत विद्यार्थियों की फीस शेष 75 प्रतिशत पर लागू करते हैं तो उनकी फीस 33 प्रतिशत बढ़ जाएगी।
यहां हैं दोनों में पेंच
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के जिला प्रधान कृष्ण नारंग ने बताया कि आरटीई के तहत किसी भी बच्चे की प्रवेश परीक्षा नहीं ली जानी है। इसके तहत 25 प्रतिशत विद्यार्थियों की फीस सरकारी स्तर पर ली जानी है। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश सरकार को पैसा जारी कर दिया। वहीं शिक्षा निदेशालय ने नीति अपनाकर नेबरहुड स्कूल बना दिए। इसमें एक किलोमीटर के दायरे में प्राइमरी और तीन किलोमीटर में मिडिल स्कूल होना जरूरी है। नेबरहुड की श्रेणी में जिले में कोई भी प्राइवेट और सीबीएसई स्कूल नहीं आ रहा। विद्यार्थी को आरटीई के पूरे लाभ लेने के लिए सरकारी स्कूल में पढ़ना जरूरी है। शिक्षा विभाग के इस फरमान के बाद विद्यार्थी अपनी मर्जी से स्कूल में दाखिला नहीं ले सकता। वहीं 134ए में विद्यार्थी को दाखिला देने के लिए आय सर्टिफिकेट और मेरिट के आधार पर दिया जाना है। यहां पर दोनों नियम एक दूसरे को काटते हैं।
अभिभावकों और बच्चों का लेंगे सहयोग
निजी स्कूल संचालक अपनी मांगों को लागू कराने को लेकर कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं। स्कूल संचालक ने शांति के रास्ते मान्यता न मिलने पर अभिभावकों और विद्यार्थियों का भी संघर्ष में सहारा लेने का इशारा किया है। इसके लिए वे आगामी बैठक में एकमत होकर निर्णय लेंगे। अभिभावकों और विद्यार्थियों के संघर्ष में उतरने के बाद स्थिति चिंताजनक हो सकती है।
ये हैं चार मुद्दे
1. 134ए निरस्त किया जाए।
2. संविधान के अनुसार हर बच्चे को आरटीई का पूरा लाभ मिलना चाहिए।
3. सभी स्कूलों को आरटीई एक मुश्त मान्यता दी जाए।
4. स्थायी मान्यता प्राप्त स्कूलों से फार्म नंबर एक भराना बंद किया जाए।
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