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जिला के नशा मुक्ति केेंद्र अवैध

Panipat

Updated Sat, 27 Oct 2012 12:00 PM IST
पानीपत। जिले में चार नशा मुक्ति केंद्र चल रहे हैं, मगर हैरत की बात है कि इनमें से किसी के पास भी लाइसेंस नहीं हैं। यानी चाराें अवैध रूप से चल रहे हैं। यह खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर द्वारा लगाई गई आरटीआई में हुआ है।
समालखा निवासी पीपी कपूर ने तीन सितंबर 2012 को महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, हरियाणा पंचकूला को लगाई आरटीआई में जिला में चल रहे नशा मुक्ति केंद्रों के बारे में विस्तार से जानकारी मांगी थी। 15 अक्तूबर 2012 को उनकी आरटीआई के जवाब में उप सिविल सर्जन (वीबीडी), पानीपत ने अपने जवाब में बताया कि पानीपत में चार नशा मुक्ति केंद्र न्यू फ्रीडम फाउंडेशन नशा मुुुक्ति केंद्र, महावीर कालोनी पानीपत, नव जीवन नशा मुक्ति केंद्र, पंचवटी कालोनी, समालखा, सुप्रभात नशा मुक्ति केंद्र गांव बुड़शाम और नई किरण नशा मुक्ति केंद्र संस्थान गांव जाटल काम कर रहे हैं। मगर इनमें से किसी के पास भी लाइसेंस नहीं है। आरटीआई में बताया है कि किसी भी नशा मुक्ति केंद्र पर सरकार द्वार बनाए गए नियमों और शर्तों की अनुपालना नहीं की जा रही।
केंद्र चलाने के नियम
हरियाणा सरकार द्वारा एक सितंबर 2010 को गजट नोटिफिकेशन जारी कर हरियाणा नशा मुक्ति केंद्र नियम-2010 बनाए थे जिनमें जिला स्तर पर डीसी, सिविल सर्जन और जिला समाज कल्याण अधिकारी की तीन सदस्यीय कमेटी गठित है। कमेटी समय-समय पर निजी चिकित्सा केंद्रों का निरीक्षण, मूल्यांकन और लाइसेंस की शर्तों की अनुपालना पर नजर रखेगी। केंद्राें में एमडी चिकित्सक अथवा मान्यता प्राप्त संस्थान से तीन माह की ट्रेनिंग प्राप्त चिकित्सक, मनोविज्ञान/समाज विज्ञान में एमए, एमफिल पास दो परामर्शदाता, 24 घंटे चार क्वालिफाइड स्टाफ नर्स, दस जमा दो तक पढे़ तीन वार्ड अटेंडेंट, तीन चौकीदार, दो सफाई कर्मी और एक खाना पकाने वाला बावर्ची होना चाहिए।
आदेश के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
पीपी कपूर ने बताया कि आरटीआई में उन्हें जानकारी दी गई कि उप सिविल सर्जन द्वारा इस बारे में महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं को 23 मई 2012 को पत्र भेजकर कहा गया है कि चाराें नशा मुक्ति केंद्र बिना लाइसेंस के चल रहे हैं। इन केंद्राें पर आमतौर पर 25 से 30 मरीज दाखिल रहते हैं। इसके लिए उनके द्वारा आवश्यक दिशा निर्देश देने का आग्रह किया था। इस पत्र के संदर्भ में सिविल सर्जन कम मेंबर सेक्रेटरी ने डीसी को इस बारे में पत्र लिखकर इनमें बंद कराने में सहयोग करने का आग्रह किया था। मगर आलम यह है कि उन पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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