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...कला के आडे़ नहीं आता मजहब

Panipat

Updated Tue, 23 Oct 2012 12:00 PM IST
तीन दशक से रावण के पुतले बनाने के काम में जुडे़ हैं ये लोग
श्रीराम और रामायण में है परिवार की आस्था
पानीपत में तैयार किया है 80 फुट का पुतला

अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। कलाकार का कोई मजहब नहीं होता, कला में गहरी आस्था के चलते वह आसानी से किसी भी धर्म से नाता जोड़ लेता है। हम भले मुसलिम संप्रदाय से ताल्लुकात रखते हों, मगर हिंदू धर्म में भी हमारी गहरी आस्था है। सिर्फ रुपयाें के लिए नहीं, बल्कि श्रीराम में आस्था के चलते पुतले बनाने के काम से जुडे़ थे। यह कहना है रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले बनाने के काम में लगे कुरैशी परिवार के मुखिया उस्मान कुरैशी का। यह परिवार सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की जिंदा मिसाल है।
उत्तर प्रदेश के जिला आगरा के निवासी उस्मान कुरैशी ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि शुरू से ही उनके बुजुर्गों के कई हिंदू परिवाराें के साथ काफी अच्छे संबंध थे। धीरे-धीरे श्रीराम और रामायण के प्रति उनकी श्रद्धा बढ़ने लगी। इसी बीच उनके मन में ख्याल आया कि क्याें न ऐसा काम किया जाए, जिससे जातपात और धर्म की दीवारें गिरकर आपसी भाईचारा मजबूत हो और दूसरे लोग भी इसका अनुकरण करें। बस फिर क्या था उन्हाेंने रामलीला के दौरान पुतले बनाना शुरू कर दिया।
पुतले बनाने से मिलती है संतुष्टि
उस्मान कुरैशी बताते हैं कि एक बार शुरू हुआ यह सिलसिला करीब 30 साल से बिना किसी विघ्न के चल रहा है। हालांकि उनके परिवार के और भी कई काम धंधे हैं मगर उन्हें इन दिनाें का बेसब्री से इंतजार रहता है। उनकी माने तो आलम यह है कि उन्हें हिंदू त्योहाराें पर पुतले बनाए बिना आत्म संतुष्टि नहीं होती। यही वजह है कि इन दिनाें वे अपने दूसरे कामधंधे छोड़कर परिवार के सभी सदस्य देशभर में पुतले बनाने के लिए निकल पड़तेे हैं।
80 फुट ऊंचा पुतला बनाया
कुरैशी ने बताया कि उनका परिवार अहमदाबाद, कानपुर, मथुरा, अंबाला समेत दर्जनभर शहराें में रामलीला के दौरान सैकड़ों पुतले बना चुका है। इस बार वे अपने परिवार के सात सदस्याें के साथ कई सप्ताह से दशहरा कमेटी सनौली रोड, पानीपत के आर्डर पर 80 फुट ऊंचा पुतला बनाने में जुटे हैं। इसके अलावा कुंभकर्ण का 70 फुट तथा मेघनाद का 65 फुट ऊंचा पुतला बना रहे हैं। पुतले लगभग तैयार हो चुके हैं और बुधवार सुबह को इन्हें खडे़ करने का काम शुरू हो जाएगा।
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