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एक निगम, दो नीतियां, किसान परेशान

Panipat

Updated Sat, 22 Sep 2012 12:00 PM IST
पानीपत। सरकार की ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराने की योजना पर किसानों ने अनदेखी करने का आरोप लगाया है। किसानों का कहना है कि निगम और ट्रांसफार्मर एक ही हैं, इसके बावजूद उद्योगपतियों और किसानों के लिए अलग-अलग नीतियां बनाई गई हैं। किसानों को अपना ट्रांसफार्मर योजना के तहत 25 केवीए तक का ट्रांसफार्मर 60 हजार रुपये तक का दिया जा रहा है, जबकि उद्योगपतियों को इस योजना के तहत 50 केवीए तक का ट्रांसफार्मर निशुल्क दिया जा रहा है। इस प्रकार सरकार किसानों के प्रति भेदभावपूर्ण नीति अपना रही है।
उपकरण भी मिलते हैं मुफ्त
उद्योगपति इंडस्ट्री के लिए जब कनेक्शन लेता है तो अन्य उपकरणों की कोई कीमत नहीं चुकानी पड़ती है। कनेक्शन के साथ ट्रांसफार्मर, पोल, तार, प्लेट बोर्ड और अन्य सेट मुफ्त दिए जाते हैं। इसके विपरीत किसानों को सीमित दूरी तक ही तार और पोल उपलब्ध कराए जाते हैं। कनेक्शन स्थान से मेन लाइन की दूरी जितनी बढ़ती जाएगी पोलों की संख्या और तारों की लंबाई भी बढ़ती ही चली जाएगी। किसानों को इसके लिए अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ती है।

रेट बढ़ाकर डाला अतिरिक्त बोझ
इस समय एक पोल की कीमत 12 हजार रुपये है। कुछ समय पहले यही पोल सात हजार रुपये में मिलता था। तार खिंचवाने का खर्च भी दस हजार रुपये तक हो गया है, जोकि कुछ समय पहले छह से सात हजार रुपये तक था। ट्रांसफार्मर की कीमत भी 40 से सीधे 60 हजार और जो 60 हजार में मिलता था उसकी कीमत 90 हजार रुपये से भी ज्यादा कर दी गई है।

अन्नदाताओं को लूट रही सरकार
सरकार देश के अन्नदाताओं को लूट रही है। बिजली निगम भी किसानों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है। ट्यूबवेल कनेक्शन लेने के लिए किसान को कई लाख रुपये तक खर्च करने पड़ते हैैं। इसके अलावा दफ्तरों के चक्कर काट काटकर चप्पल घिस जाती है। बात करने पर स्थानीय अधिकारी उच्च अधिकारियों के आदेश की दुहाई देते हैं।
सेवा सिंह आर्य, प्रदेशाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन

वर्जन
कनेक्शन के समय किसान या उद्योगपतियों से लिए जाने वाले चार्ज से संबंधित फैसले उनके स्तर पर नहीं होते। इस तरह के फैसले हाई कमान के हैं। सरकार का जैसा आदेश होता है, उसी के अनुसार कार्य करना पड़ता है।
वीके खुराना, अधीक्षक अभियंता, बिजली निगम पानीपत
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