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ओल्डमैन ने जीता लोगों का दिल

Panchkula

Updated Sun, 28 Oct 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। सेक्टर-5 के डा. जेएस सरकारिया नेशनल कैक्टस गार्डन में लगी प्रदर्शनी के दूसरे दिन विदेशी प्रजातियों के कैक्टस का काफी क्रेज रहा। लोगों ने न सिर्फ उन पौधों के बारे में जानकारी हासिल की, बल्कि उनकी खरीद भी की। प्रदर्शनी में अमेरिका के ओल्डमैन प्रजाति का कैक्टस आकर्षण का केंद्र रहा। इसकी खासियत इसके भूरे रंग के बाल हैं। इन्हीं की सहायता से विशेषज्ञ इसकी उम्र का पता लगाते हैं। शुक्रवार से शुरू हुए 32वें कैक्टस और सक्यूलेंट प्लांट्स की प्रदर्शनी में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की ओर से 500 से अधिक प्रजाति के कैक्टस और दूसरी किस्म के पौधे रखे गए हैं।
रिसर्च सेंटर के प्रधान जनरल सीएस बेबली ने बताया कि गार्डन में कैक्ट्स की करीब 1000 प्रजातियां मौजूद हैं, लेकिन प्रदर्शनी में कैक्ट्स और सक्यूलेंट वनस्पति की केवल 520 प्रजातियां रखी गई हैं। उन्होंने बताया कि सभी पौधे अपने आप में काफी खास हैं। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी में ओल्डमैन के अलावा स्टेफिना रोटंडा, एडेनियम हाइब्रेट, जेटप्लांट, हाओवर्थिया लिमीफोलिया, एलोडियां भी विदेशी प्रजाति के हैं। यह सभी पौधे अमेरिका से लाए बीजों से तैयार किए गए हैं।

लोगाडी की कीमत पांच लाख
सीएस बेबली ने बताया कि प्रदर्शनी में रखे लोगाडी सक्यूलेंट प्लांट की कीमत करीब पांच लाख रुपये है। गर्मियों के मौसम में इसका आकार बढ़ता है। इसकी पैदावार हिमाचल प्रदेश में सबसे अधिक होती है। उन्होंने बताया कि लोगाडी में आक्सीजन छोड़ने की क्षमता अधिक होती है।

किंग ऑफ क्वीन के नखरे अजीब
कैक्टस के राजा की बात करे तो नखरों में यह सबसे आगे है। यह गर्मियों में ही यह बढ़ता है और इसी मौसम में इसकी पानी की मांग होती है। यदि इसे इसकी आवश्यकता से अधिक पानी दे दिया जाए तो इसके मरने की संभावना ज्यादा रहती है। यदि इसे सर्दियों में पानी दिया जाए तो यह गल जाता है। एग्जीबिशन में मौजूद किं ग की आयु 20 वर्ष है और इसकी अधिकतम आयु 500 वर्ष होती है।
कई प्रजातियों से भारतीय अंजान
कैक्ट्स की कई ऐसी प्रजातियां है, जिनसे भारतीय अनजान हैं। क्योंकि वह भारतीय वातावरण में नहीं उग सकते। इनमें कैक्टस की मैक्सिको, स्ट्रोमों कैक्टस, रिबूटिया, मेमरिमियां, एपीथेलेटा समेत कई प्रजातियां शामिल हैं। इन्हें 24 घंटे शेड में प्रकाश की जरूरत होती है।
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