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भारतीय स्टेट बैंक में डकैती के आरोपी बरी

Panchkula

Updated Wed, 26 Sep 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। सेक्टर 20 स्थित भारतीय स्टेट बैंक में साल 2009 में पड़ी डकैती के तीन आरोपियों को सुबूतों के अभाव में मंगलवार को पंचकूला की अदालत ने बरी कर दिया। इस मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहले ही एक आरोपी को बरी कर चुका है, जबकि एक आरोपी अब तक भगोड़ा है। बताया जा रहा है कि पुलिस और सीआईए ने कई सुबूत इकट्ठे किए थे, लेकिन अदालत में वह साबित नहीं कर सकी। इसका फायदा आरोपियों को मिला। एडवोकेट महेश गोयल और सपना सहरावत ने बताया कि आरोपी चंदन, जयपाल और राजीव के खिलाफ इस केस में कोई भी सुबूत नहीं मिला, इसलिए अदालत ने उन्हें बरी कर दिया।
15 मई 2009 को सेक्टर 20 स्थित स्टेट बैंक आफ इंडिया की शाखा में पांच नकाबपोश लुटेरों ने वारदात को अंजाम दिया था। इनमें चार आरोपी बैंक के अंदर दाखिल हुए, जबकि एक कार में बाहर ही इंतजार करता रहा। दोपहर करीब 11 बजे लुटेरों ने एक ग्राहक की पिटाई कर हवाई फायरिंग कर दहशत फैलाने की कोशिश। उसके बाद बैंक मैनेजर की कनपटी पर पिस्टल लगाकर उससे तिजोरी की चाबी मांगी। लुटेरों ने बैंक से 11 लाख 32 हजार तीन सौ रुपये लूट लिए। दूसरी तिजोरी की चाबी लेने वाले थे कि पुलिस का सायरन बज गया और आरोपी हाथ में लिए रुपये लेकर भाग निकले। उसके बाद पुलिस ने पांच आरोपी चंदन, जयपाल, राजीव, गुरुशहीद व हरिंदर को गिरफ्तार किया। गुरुशहीद को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है, जबकि चंदन, जयपाल और राजीव को अदालत ने सोमवार को बरी कर दिया। हरिंदर हाईकोर्ट से पहले ही बरी हो चुका है।
रिकवर रुपये को पुलिस साबित नहीं कर पाई
पुलिस का दावा था कि पकड़े गए आरोपियों से करीब साढ़े सात लाख रुपये रिकवर किए, लेकिन वह साबित नहीं कर पाई कि उसने यह रुपये किससे और किस घर से बरामद किए। हाईकोर्ट में हरिंदर को इसी वजह से बरी किया गया था कि पुलिस ने जो उससे रुपये बरामद किए थे, उसे उस घर से दिखाए गए जो पुलिस ने काफी दिन पहले सील कर दिया था। यदि किसी घर पर सील लगी है तो उस घर से रुपये कैसे बरामद किए जा सकते हैं। साथ ही पुलिस इस केस में आरोपियों की पिस्टल भी रिकवर नहीं कर पाई।
गवाही भी नहीं देने आए पुलिस वाले
बताया जा रहा है कि इस मामले में पुलिस की ओर से शुरू से ही लापरवाही दिखी। अदालत में सुनवाई के दौरान कई तेज तर्रार इंस्पेक्टर गवाही देने ही नहीं पहुंचे। उन्हें कई बार अदालत की ओर से नोटिस दिया गया, लेकिन उन्होंने कोई भी सक्रियता नहीं दिखाई। इसके अलावा कई एविडेंस पर पुलिस कर्मियों ने हस्ताक्षर भी नहीं किए। इन सबको देखते हुए अदालत ने केस आगे न बढ़ाने का फैसला लिया।
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