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पुराने रंग में दिखे जनता के प्रतिनिधि

Panchkula

Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। मिनी सचिवालय के कांफ्रेंस हाल का नजारा सोमवार को कुछ नगर परिषद के जनरल हाउस जैसा था। पार्षद आज पूर्व पार्षद नहीं बल्कि जनता के प्रतिनिधि के रूप में थे। चाहे आवाज हो या फिर अपनी बात मनवाने का ढंग। लग रहा था कि हाल में छह नहीं, 31 पूर्व पार्षद बैठे हों। तर्क का सटीक वितर्क। चाहे टेक्निकल की बात हो या फिर अनुभवी आईएएस अफसर के सामने अपनी बात रखना। 28 मिनट में जनता के प्रतिनिधि वे सब कुछ कह गए और कर गए, जिसके लिए वे पांच महीने से चंडीगढ़ के चक्कर लगा रहे थे। कांफ्रेंस हाल से जब वे बाहर निकले तो उनके चेहरों की चमक देखने वाली थी। ऐसा होता भी क्यों न? जो वादा वे अपनी जनता और साथी पार्षदों से कर कर आए थे, उसे सर्वसम्मति से हुडा, नगर निगम और खुद निकाय विभाग के फाइनेंशियल कमिश्नर ने भी हरी झंडी दे दी।
फाइनेंशियल कमिश्नर के साथ बैठक में नगर निगम के सभी पार्षदों की ओर से नगर परिषद के पूर्व प्रधान रविंदर रावल, पूर्व प्रधान सीमा चौधरी, पूर्व उपप्रधान बीबी सिंघल, पूर्व पार्षद वीके कपूर, पवन मित्तल और सीबी गोयल ने मुलाकात की और अपनी मांगे रखीं। लगभग सभी मांगों को फाइनेंशियल कमिश्नर ने मान लिया। शहर के विकास के लिए पूर्व पार्षद अप्रैल महीने से चंडीगढ़ स्थित फाइनेंशियल कमिश्नर के दफ्तर जा रहे थे। जनता के प्रतिनिधियों ने वार्ड वाइज मांग पत्र बनाए थे। प्रेजेंटेशन तैयार करने के लिए उन्हें काफी पापड़ बेलने पड़े, तब जाकर सोमवार को उन्हें अपनी जीत का अहसास हुआ।
दलगत राजनीति से ऊपर उठे
हाईलेवल पर भले ही कांग्रेस, बीजेपी और इनेलो एक दूसरे के धुर विरोधी हैं, लेकिन शहर के विकास के मामले में सभी एकजुट दिखे। पूर्व पार्षदों के प्रतिनिधि मंडल में हर अलग-अलग गुट के नेता थे। कांग्रेस से रविंदर रावल व पवन मित्तल थे तो इनेलो से सीमा चौधरी और वीके कपूर। भाजपा से बीबी सिंघल और सीबी गोयल। पार्षदों के प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि शहर का विकास सबसे पहले है। राजनीति बाद में।
इसलिए जाना पड़ा फाइनेंशियल कमिश्नर के पास
आखिर पूर्व पार्षदों को फाइनेंशियल कमिश्नर के पास जाने की क्यों जरूरत पड़ गई। दरअसल नगर निगम बनने के बाद पूर्व पार्षदों से प्रशासन ने दूरी बनानी शुरू कर दी। जनता से जुड़े किसी काम में उनसे कोई भी राय नहीं ली जाती थी, जबकि इसके विपरीत आरडब्ल्यूए को तवज्जो देनी शुरू की गई। इधर काम तो हो नहीं रहे थे। थमे विकास कार्यों ने उनके तेवर और तीखे कर दिए। जनता की तड़प ही थी कि वे सीधे फाइनेंशियल कमिश्नर के पास पहुंच गए।
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