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चंडीकोटला में नहीं थमी दहशत की दरार

Panchkula

Updated Tue, 18 Sep 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। चंडीकोटला में दहशत की दरारें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। रोजाना नए मकानों को चपेट में ले रही हैं। इससे लोगों और प्रशासन की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। रविवार रात जोरदार बारिश के बाद सोमवार सुबह छह मकानों में दरारे पड़ गईं। आनन-फानन में लोगों ने अपने घर का सामान शिफ्ट करना शुरू कर दिया। सोमवार को स्टेट और केंद्रीय भू वैज्ञानिक पहुंचे और हालात का जायजा लिया। वैज्ञानिकों ने माना कि पहाड़ी पर बना इंफ्रास्ट्रक्चर इनबैलेंस हैं। साउथ वेस्ट की ओर लोड ज्यादा है। दरारें काफी दिन से बन रही थीं। वहीं, हैवी रेन ने इन्हें और भड़का दिया। दरारों में पानी भरने से यह चौड़ी होती जा रही हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जितनी जल्द हो सके प्रभावित मकानों को खाली कर देना चाहिए। यदि इसी तरह बारिश होती रही तो लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। वैज्ञानिकों ने यह भी माना कि दरारें बढ़ती जा रही हैं।
चंडीकोटला में बीते सप्ताह हुई बारिश के बाद से अब तक 60 मकानों में दरारें आ चुकी हैं। दो दिन पहले प्रभावित मकानों की संख्या करीब 45 थी। सोमवार को वरिष्ठ भारतीय भू वैज्ञानिक प्रदीप सिंह पहुंचे और सर्वेक्षण किया। उन्होंने बताया कि यह दरारें अंदर ही अंदर काफी दिन से आ गई थीं। भारी बारिश के वजह से यह पहाड़ के ऊपर आ गईं। उन्होंने बताया कि वे अपनी रिपोर्ट दो दिन के भीतर पंचकूला प्रशासन को सौंप देंगे। इसके अलावा हरियाणा प्रदेश के सीनियर भू वैज्ञानिक वीर सिंह यादव और दीपक हुड्डा भी पहुंचे और दरारों का विस्तार से जायजा लिया। वे भी अपनी रिपोर्ट मंगलवार तक सौंप देंगे।
प्राथमिक तौर पर यह मिली खामियां
भू वैज्ञानिकों ने बताया कि चंडीकोटला में लोगों ने अपने तरीके से मकान बना लिए हैं। मोरनी के पहाड़ों में लोगों ने मकान बनाने के लिए डंगे का सहारा लिया, जबकि चंडीकोटला में ऐसा नहीं है। मकानों की कंस्ट्रक्शन भी इनबैलेंस है। जिस तरफ स्लोप है, उसी तरफ सबसे ज्यादा मकान बना लिए गए। इसके अलावा पानी निकासी का कोई भी साधन नहीं है। सारा पानी जमीन के नीचे जा रहा है। यह भी खतरा बढ़ने का संकेत है।
नीचे के मकानों में खतरा बढ़ा
चंडीकोटला के ऊपरी मकानों के साथ नीचे के मकानों में खतरा बढ़ गया है। सोमवार को नीचे के मकानों में दरारें आ गईं। करीब एक दर्जन मकान जर्जर हालत में हैं। यह मकान ऊपर से करीब 50 फीट नीचे पड़ते हैं। इन मकानों में अजीब सी दरारें बनने के बाद नीचे की जमीन ऊपर की तरफ उठ गई है। साथ की दीवारें भी पूरी तरह से हिल गई हैं।
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