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पंचकूला में यूनिवर्सिटी की मांग जायज : गीता भुक्कल

Panchkula

Updated Wed, 05 Sep 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। विधानसभा में विधायक डीके बंसल की सरकारी यूनिवर्सिटी की मांग को खारिज करने वाली शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने आखिरकार मंगलवार को स्वीकार किया कि पंचकूला में यूनिवर्सिटी की मांग जायज है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शहरवासियों की मांग को वे मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सामने रखेंगी। साथ ही उन्होंने विधायक से कहा कि वे लिखित में यूनिवर्सिटी का एक मांग पत्र मुख्यमंत्री को भिजवाएं और उसकी प्रति उन्हें भी भेजें, ताकि शहरवासियों के प्रस्ताव पर हरियाणा सरकार गंभीरता से विचार कर सके। मंगलवार को शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने अमर उजाला की ओर से पंचकूला में यूनिवर्सिटी स्थापित करने की मांग पर आयोजित सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
अमर उजाला की ओर से पिछले माह से चलाया जा रहा ‘पंचकूला मांगे यूनिवर्सिटी’ अभियान का असली रूप मंगलवार को होटल रेड बिशप में दिखा। इसमें मौजूद शहर के गणमान्य लोगों ने अंबाला, यमुनानगर और पंचकूला के लिए शहर में यूनिवर्सिटी के लिए जमीन के साथ-साथ शिवालिक यूनिवर्सिटी नाम भी प्रस्तावित कर दिया।
सेमिनार में विधायक, डाक्टर, एडवोकेट, शिक्षाविद्, प्रिंसिपल, समाजसेवी, स्टूडेंट और पूर्व पार्षद समेत प्राय: हर क्षेत्र से जुड़े गणमान्य लोग मौजूद थे। सभी प्रतिनिधियों ने एक मत से शहर में यूनिवर्सिटी की मांग उठाई। शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने सभी प्रतिनिधियों की बात को ध्यान से सुना और गहन विचार कर कई फैसले भी लिए। उन्होंने अमर उजाला अभियान की तारीफ करते हुए कहा कि इस अखबार ने मीडिया का सही रोल निभाया है। शहरवासियों की आवाज को अमर उजाला ने सही और उचित तरीके से उठाया है। उन्होंने इस बात से इनकार किया कि विकास के मामले में पंचकूला की अनदेखी हो रही है। उन्होंने बताया कि जब भी उनके पास रायपुररानी व मोरनी के स्कूलों के अपग्रेडेशन की बात आई तो उन्हें जल्द से जल्द करवाने की कोशिश की है।
यूनिवर्सिटी की मांग पर उन्होंने दोबारा कहा कि विधायक जल्द से जल्द से लिखित में अपना मांग पत्र मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को भिजवाएं, ताकि गंभीरता से इस पर चरचा हो सके। विधायक ने भरोसा दिलाया कि वे इसी हफ्ते शहरवासियों के सहयोग से मांग पत्र मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को भिजवा देंगे। इस मौके पर अमर उजाला के कार्यकारी संपादक उदय कुमार, ब्यूरो चीफ डा. सुरेंद्र धीमान, नगर परिषद के पूर्व प्रधान रविंदर रावल, भाजपा नेता ज्ञानचंद गुप्ता, एडवोकेट विजय बंसल, बीबी सिंघल सहित कई लोग मौजूद रहे।
कोट
- यूनिवर्सिटी नहीं होने से मेरे बच्चों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जो मुझे पीड़ा हुई है, मैं समझ सकता हूं कि शहर के अभिभावकों को कितनी परेशानी का सामना करना पड़ता होगा। यूनिवर्सिटी के साथ शहर में प्रोफेशनल कालेज भी खोले जाने चाहिए।
-डा. एसके छाबड़ा, वरिष्ठ डाक्टर

शहर से सौ किलोमीटर के दायरे में एक भी यूनिवर्सिटी नहीं है। पंचकूला में सबसे ज्यादा बुद्धिजीवी हैं। दो साल पहले इस बारे में सीएम और पीएम को लिखा गया था। यूनिवर्सिटी की शहर को सख्त जरूरत है।
-आईएम गोविल, रिटायर्ड हेड आफ डिपार्टमेंट, पीयू

प्रोफेशनल कोर्सेज नहीं होने से मुझे इग्नू से पढ़ाई करनी पड़ी। छोटे-छोटे काम के लिए मुझे खन्ना भागना पड़ता था, इससे मुझे और मेरे परिवार को काफी परेशानी आई। यदि यूनिवर्सिटी या प्रोफेशनल कोर्सेज होते तो मुझे परेशानी नहीं आती।
-सुमित मेहता, साफ्टवेयर इंजीनियर

मैंने बीए मास काम पंचकूला से किया। पोस्ट ग्रेजुएशन नहीं होने के कारण मजबूरी में स्ट्रीम बदलकर हिंदी का सब्जेक्ट लिया। पढ़ाई जारी रखनी थी, इस कारण यह कदम उठाना पड़ा। यदि सुविधाएं होती तो मुझे यह परेशानी नहीं झेलनी पड़ती।
-उषा मौर्या, स्टूडेंट पीयू

बीएससी करने के बाद मेरा एडमिशन कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में एमएससी में हो गया है, लेकिन दूर होने के कारण परिजन भेजना नहीं चाहते। यदि यहां पर सुविधा होती तो मैं अपनी पढ़ाई जारी कर सकती थी।
-नीता, स्टूडेंट

चंडीगढ़ में कोटा होने के कारण स्कूल के बच्चे दसवीं के बाद चंडीगढ़ चले जाते हैं। इस कारण स्कूल के प्लस वन के सेक्शन चल नहीं पाते। यूनिवर्सिटी न होने से सच में काफी दिक्कत आ रही है।
-बीबी गुप्ता, प्रिंसिपल, डीसी मॉडल स्कूल सेकटर सात

शहर को वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी की जरूरत है। प्राइवेट यूनिवर्सिटी से कोई भी भला नहीं होगा। शहरवासियों को न तो रीजनल सेंटर चाहिए और न ही कोई प्रलोभन।
-पीएस सांगा, पूर्व प्रिंसिपल

एनसीआर की तर्ज पर ट्राइसिटी में भी कोटा सिस्टम लागू होना चाहिए। यह सुविधा होने से काफी हद तक एजूकेशन सिस्टम सुधर जाएगा। यूनिवर्सिटी की तो जरूरत है। इस ओर प्रदेश सरकार को ध्यान देना चाहिए।
- जया भारद्वाज, प्रिंसिपल, हंसराज स्कूल

शहर में रहने वाले लोग तो चंडीगढ़ जाने की सोच सकते हैं, लेकिन पंचकूला के ग्रामीण इलाकों के लोग शहर तक नहीं पहुंच सकते। उनके पास कोई सुविधा नहीं है। इस इलाके में एक यूनिवर्सिटी की जरूरत है।
-सुभाष पपनेजा, महासचिव, पंचकूला रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन

पंचकूला को यूनिवर्सिटी की सख्त जरूरत है। विश्वविद्यालय नहीं होने से लोगों को काफी दिक्कत आ रही है। सरकार इस ओर जरूर से जरूर ध्यान दे।
- मुंशी राम अरोड़ा, पूर्व मंत्री सचिव

शहर ही नहीं पूरे पंचकूला को यूनिवर्सिटी की जरूरत है। शहर के विद्यार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हमारी मांग को जल्द से जल्द स्वीकार करे।
-वीके कपूर, पूर्व पार्षद

आज के जमाने में ईमानदारी की कमाई से बच्चों को पढ़ा पाना काफी मुश्किल है। ऐसे में यहां से बच्चों को चंडीगढ़ भेजना अभिभावकों को काफी दिक्कत आ रही है। शहर में प्रोफेशनल कालेज के साथ यूनिवर्सिटी का खोला जाना बहुत जरूरी है।
- केबी मलिक, पूर्व डिप्टी कमिश्नर सेल टैक्स

मुझे अपनी बेटी का एडमिशन कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में कराना पड़ा। लिहाजा मुझे खुद परेशानी का सामना करना पड़ा। इसलिए सरकार यूनिवर्सिटी की ओर ध्यान दें।
-तरसेम गर्ग, कांग्रेसी नेता

यूनिवर्सिटी खोलने के लिए भूमि की जरूरत पड़ेगी। शहर में करीब 600 एकड़ जमीन खाली पड़ी है। यदि सरकार इनिशिएटिव ले तो उस जमीन पर यूनिवर्सिटी खोली जा सकती है।
-करतार सिंह, महासचिव आरडब्ल्यूए सेक्टर 12 ए

-राइट टू एजुकेशन सिर्फ स्कूल लेवल तक नहीं होना चाहिए। हाई लेवल तक यह व्यवस्था होनी चाहिए। शहर में स्कूल तो बहुत हैं, लेकिन प्रोफेशनल कालेज नहीं है।
-पवन मित्तल, पूर्व पार्षद

- शहर में यूनिवर्सिटी बनने से विद्यार्थियों के साथ शहर का भी विकास होगा। लॉ की पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों को शहर से बाहर जाना पड़ता है।
-जगपाल सिंह, पूर्व प्रेसिडेंट बार एसोसिएशन

-मैं गरीब परिवार से हूं। गरीबी के कारण कई बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं। ऐसे में उन्हें दूसरे शहर जाना पड़े तो उच्चशिक्षा से वे वंचित हो जाएंगे।
-पीएस बिरला, निवासी, सेक्टर 15

चंडीगढ़ के कालेजों में ट्राइसिटी का कोटा एक समान होना चाहिए। ऐसा नहीं होने से यहां के बच्चे पलायन कर रहे हैं। शहर खाली होता जा रहा है। कुछ दिनों में यह बूढ़ों का शहर कहलाएगा।
-बीबी सिंघल, पूर्व उपप्रधान नगर परिषद

अमर उजाला का धन्यवाद करना चाहूंगी कि वे जनहित के मुद्दे उठाते हैं। यूनिवर्सिटी का मुद्दा बहुत अहम है। खुद मेरे बच्चों को शहर से बाहर जाकर पढ़ाई करनी पड़ी।
-सीमा चौधरी, पूर्व प्रधान नगर परिषद

शिवालिक क्षेत्र में एक भी यूनिवर्सिटी नहीं है। मोरनी जैसे पहाड़ी इलाकों के बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पालीटेक्निक और लॉ की क्लासेज अब तक शुरू नहीं हो सकी।
-विजय बंसल, इनेलो नेता व सामाजिक कार्यकर्ता

पढ़ाई के लिए चंडीगढ़ जाना बच्चों के लिए खतरे से कम नहीं है। सरकार को चाहिए कि शहर में यूनिवर्सिटी के साथ प्रोफेश्नल कालेज भी होने चाहिए।
-ज्ञान चंद गुप्ता, प्रदेश कोषाध्यक्ष भाजपा

सरकार यूनिवर्सिटी खोले तो उसका नाम शिवालिक यूनिवर्सिटी होना चाहिए। यदि शिक्षा मंत्री चाहती हैं कि शहरवासी उनके साथ मुख्यमंत्री से मिलें तो हम सब तैयार है। शहर के दस हजार लोग उनके समर्थन में मुख्यमंत्री से मिलने के लिए तैयार हैं।
-रविंदर रावल, पूर्व प्रधान नगर परिषद

यूनिवर्सिटी नहीं होने से विद्यार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यूनिवर्सिटी होगी तो कई लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
-अश्विनी चौधरी, एडवोकेट

यदि यूनिवर्सिटी के बारे में आज नहीं सोचा गया तो आगे और मुश्किलें आ सकती हैं। शहरवासियों की डिमांड पर प्रदेश सरकार को जरूर इनिशिएटिव लेना चाहिए।
-आशीष बख्शी, स्टूडेंट

-पंचकूला में राजकीय विश्वविद्यालय की मांग गत विधानसभा सत्र में उठाई थी। मोरनी, पिंजौर, कालका, रायपुरानी, बरवाला व पंचकूला शहर से लगभग पांच हजार से भी अधिक बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए जिले से बाहर जाते हैं।अधिकतर माता-पिता अपनी लड़कियों को बाहर नहीं भेजते। इस वजह से वे आगे पढ़ नहीं पाती। बच्चे प्राइवेट यूनिवर्सिटी में पढ़ नहीं सकते, इसलिए यहां पर राजकीय विश्वविद्यालय खोलना अति आवश्यक है।
डीके बंसल, विधायक पंचकूला।
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