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दो साल से चालीस गांवों का जिले से टूटा संपर्क

Panchkula

Updated Mon, 03 Sep 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। खेतपुराली के पुल के तेज बहाव में बह जाने से जिले के 40 गांव मुख्यधारा से कट गए हैं। ग्रामीणों की न तो सरकार सुध ले रही और न ही प्रशासन। संपर्क टूट जाने से गांवों में एक तरह से हलचल खत्म हो गई है। पुल के निर्माण के लिए लोगों ने कई बार अधिकारियों और मंत्रियों के दरवाजे पर दस्तक दी, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। किसी ने भी इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। पुल का निर्माण इतनी धीमी गति से चल रहा है कि दो साल बीतने को है, लेकिन अब तक पिलर भी खड़े नहीं हो सके। लोगों को दूसरी तरफ जाने के लिए कम से कम दस फीट गहरी खाई से होकर गुजरना पड़ता है। परेशानी उस समय खड़ी हो जाती है, जब खाई में पानी बह रहा हो। ऐसी स्थिति में एक पार से दूसरी तरफ जाने में पानी सूखने तक लोगों को इंतजार करना पड़ता है।
खेतपुराली का यह पुल बरवाला और मोरनी के कम से कम 40 गांवों को जोड़ता है। 28 सितंबर 2010 को पानी का काफी तेज बहाव आने पर पुल बह गया था। उसके बाद से पुल का निर्माण हुआ ही नहीं। पुल के नीचे मोरनी व मांधना गांव का पानी आता है। कभी-कभी यह पानी दस फुट तक बहता है। ऐसी स्थिति में लोगों को पानी सूखने तक इंतजार करना पड़ता है। चाहे इसके लिए एक घंटा लगे या फिर आठ घंटे। लोग इंतजार के सिवाय कुछ नहीं कर सकते।
गर्भवती महिलाओं भी पार करती हैं दस फीट खाई
ग्रामीणों ने बताया कि शादी हो या अन्य कोई प्रोग्राम। हर मौसम और माहौल में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। जब तक पानी सूख नहीं जाता तब तक लोग इंतजार में खड़े रहते हैं। लोगों ने यह भी बताया कि यहां तक कि गर्भवती महिलाओं को भी दस फीट गहरी खाई पार कर ही दूसरी तरफ जाना पड़ता है। छोटे-छोटे स्कूली बच्चों को भी अपनी मौत की बाजी लगाकर पुल को पार करना पड़ता है।
दो बार डीसी भी कर चुकी हैं दौरा
पुल के निर्माण के लिए लोग कई बार अधिकारियों की चौखट पर पहुंचे। उपायुक्त आशिमा बराड़ ने खुद दो बार खेतपुराली गांव का दौरा किया और काम के हालात का जायजा लिया, लेकिन फिर भी काम जस का तस बना हुआ है। लोगों ने बताया कि उपायुक्त ने 2011 व 2012 में दौरा किया था। एक बार तो खुद डीसी को अपना वाहन खड़ा कर पैदल दूसरे पार जाना पड़ा था।
कब शुरू हुआ था निर्माण
28 सितंबर 2010 : पुल बह गया था
24 मई 2011 : टेंडर जारी किए गए
जून 2011 : काम शुरू हुआ
जुलाई 2011 : काम बंद हो गया
नवंबर 2011 : फिर से काम शुरू हुआ
जून 2012 : काम बंद हो गया
विधायक दल की बैठक में उठा था मसला
विधायक डीके बंसल ने बताया कि पुल के निर्माण के लिए 50 लाख रुपये खुद उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से पास करवाया था। डी प्लान के तहत भी रुपया पास हुआ था। उन्होंने यह भी बताया कि मानसून सत्र शुरू होने से पहले यह मसला विधायक दल की बैठक में भी उठाया गया था। लोगों को सच में काफी परेशानी आ रही है।
लोग क्या कहते हैं?
-दो साल से स्थिति जस की तस है। विधायक से लेकर पीडब्ल्यूडी मंत्री तक मुलाकात की जा चुकी है, लेकिन कोई भी असर नहीं हुआ। 40 गांवों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
-दिनेश कुमार, पंच
-सरकार को चाहिए कि इस पुल का निर्माण जल्द से जल्द करवाए। पुल के नीचे जब पानी बहता है तो लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है। जब तक पानी सूखता नहीं, तब तक लोग पुल के पास खड़े रहते हैं।
-मल्खान सिंह, ग्रामीण खेतपुराली
- ग्रामीणों की कोई भी सुनवाई नहीं हो रही। मार्केटिंग बोर्ड की ओर से दो साल से पुल का निर्माण चल रहा है, लेकिन आज तक पिलर ही नहीं बन पाए। जो बने थे, वे फिर से उखड़ने लगे हैं।
-प्रवीण कुमार, ग्रामीण खेतपुराली
- सरकार को इस ओर जल्द से जल्द ध्यान देना चाहिए। शहरों में तो लोग किसी तरह से गुजारा कर लेते हैं, लेकिन ग्रामीणों की कोई सुध नहीं लेता। सरकार इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही है।
-नजीर खटाना, हजकां युवा नेता
- पुल का निर्माण नहीं होने से सबसे ज्यादा परेशानी महिलाएं और बच्चों को है। पुल पार कर बच्चों को गुजरना पड़ता है। किसी भी समय हादसा हो सकता है।
-काकू, ग्रामीण
- पुल के निर्माण के लिए कई महीनों से ग्रामीण संघर्ष कर रहे हैं। अधिकारी भी यहां आकर दौरा कर चुके हैं। इतनी बड़ी परेशानी पर तो प्रशासन को तत्काल एक्शन लेना चाहिए।
-अमित, युवा हजकां नेता
-शाम के बाद तो यहां से निकलना और मुश्किल हो जाता है। शाम ढलते ही लोग न तो उस तरफ जा सकते और न ही दूसरी तरफ। प्रशासन से अपील है कि वह इस ओर जल्द से जल्द ध्यान दे।
-संदीप कुमार, ग्रामीण
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