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ब्रांडेड और सस्ती दवाओं की गुणवत्ता में अंतर नहीं

Panchkula

Updated Wed, 22 Aug 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। आम उपभोक्ताओं में भ्रम है कि ब्रांडेड और सस्ती दवाओं की गुणवत्ता में भारी अंतर होता है। सस्ती दवाओं के सेवन से रोग काफी देरी में ठीक होते हैं, जबकि ब्रांडेड दवाओं के खाते ही रोग छू मंतर हो जाते। लोगों के दिलों और दिमाग से यह भ्रम निकालना काफी मुश्किल है, जबकि विशेषज्ञ कहते हैं कि दोनों ही दवाओं की गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं है। लोगों के बीच भ्रम को दूर करने के लिए मौजूदा स्टेट ड्रग कंटोलर की पंाच साल की एक रिसर्च भी है। रिसर्च में साफ हो चुका है कि दोनों दवाओं के साल्ट में रत्ती भी अंतर नहीं होता। उनकी रिसर्च की इतनी डिमांड हुई कि उन्हें विदेशों से कई बार निमंत्रण आ चुका है।
आस्ट्रेलिया और टर्की में दे चुके हैं प्रेजेंटेशन
डाक्टर भले ही सस्ती दवाओं को प्रमोट न कर रहे हों, लेकिन प्रदेश का खाद्य एवं औषधि प्रशासन लगातार इस दिशा में कार्य कर रहा है। स्टेट ड्रग कंट्रोलर डा. जीएल सिंघल ने अपनी रिसर्च पर दो बार विदेशों में प्रेजेंटेशन भी दे चुके हैं। उनकी प्रेजेंटेशन आस्ट्रेलिया और टर्की में हुई थी। वहां पर भी उन्होंने सस्ती दवाओं की गुणवत्ता की बात उठाई। इसके अलावा वे हाल ही में कई जिलों में डाक्टर और केमिस्ट के साथ मिलकर सस्ती दवाओं पर सेमिनार कर चुके हैं। पंचकूला में भी वे जल्द सेमिनार करने वाले हैं।
सस्ती दवाएं इसलिए प्रयोग में नहीं
गुणवत्ता के मामले में ब्रांडेड और सस्ती दवाएं एक समान है। विशेषज्ञ बताते हैं कि दोनों दवाएं एक ही मशीन और एक ही साल्ट से तैयार होती है, लेकिन जब सेवन की बात सामने आती है तो मरीज ब्रांडेड दवा ही लेता है। इसकी कई वजह हैं। सबसे बड़ी वजह यह है कि औषधि एवं प्रसाधन एक्ट 65 के अंतर्गत कोई भी दवा विक्रेता मरीज को वही दवा देगा जो डाक्टर की पर्ची में लिखी होगी, वह बदलकर दवा नहीं दे सकता।
सस्ती दवाएं लिखने के मिल चुके हैं निर्देश
साल 2002-2003 के दौरान इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट 1956 के तहत डाक्टरों को निर्देश मिले थे कि वे लोगों को सस्ती दवाएं ही लिखें, ताकि गरीबों को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके, लेकिन इसके बावजूद डाक्टर ब्रांडेड ही दवाएं लिखते हैं।

एक साल्ट के चार अलग-अलग रेट
साल्ट का नाम : प्रिगेबलिन 75 एम जी
ब्रांड कंपनी रेट
लिका -75 प्रिफेजर 768 रुपये
ट्ूगाबा -75 एमजी मेनकाइंड 90 रुपये
नू गाबा-75 एमजी सन 93 रुपये
प्रीवास्का -75 एमजी यूएसवी 84 रुपये
नोवा -75 सिपला 64.75 रुपये
कोट
आम उपभोक्ताओं को हक से सस्ती दवाएं मांगनी चाहिए। ब्रांडेड और सस्ती दवाओं की गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं होता। इस पर खुद मैने पांच साल मेहनत की है। दोनों दवाएं एक फैक्टरी में बनती हैं और एक ही मशीन से।
डा. जीएल सिंघल, स्ट्रेट ड्रग कंट्रोलर
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