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नाम के साथ जुड़ गया सीक्रेट कोड का टाइटल

Panchkula

Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। देश को आजाद करने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने बहुत यत्न किए। अंग्रेजों का जुल्म लगातार बढ़ता जा रहा था। उनकी निगाहें हर वक्त स्वतंत्रता सेनानियों पर टिकी रहती थीं। यहां तक उनके संदेश भी पढ़ लिए जाते थे, लेकिन हमारे आजादी के परवाने इससे भी तेज होते थे। वे संदेश को सीक्रेट कोड में भेजते थे, ताकि न तो उनके संदेश को पकड़ा जा सके और न ही उनके आदमी को। ऐसे ही एक स्वतंत्रता सेनानी 82 वर्षीय फ्रीडम फाइटर देशराज परदेसी हैं, जिन्होंने उस दौरान प्रयोग में लाए जा रहे सीक्रेट कोड को ही अपने नाम के साथ जोड़ लिया। परदेसी उसमें स्वतंत्रता सेनानियों को कोड हुआ करता था। वे आजादी की लड़ाई में दो बार जेल भी गए। स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर उन्होंने ‘अमर उजाला’ के साथ अपनी यादें साझा कीं।
सेक्टर-8 पंचकूला में रहने वाले देशराज परदेसी कहते हैं कि परदेसी शब्द आज भी उस गुलामी के दौर को याद दिलाता है। वे बताते हैं कि आज भी वही स्थिति है। चारों तरफ अंग्रेजों की तरह भ्रष्टाचार के दानव खड़े हैं। जब तक भ्रष्टाचार जैसे वायरस का सफाया नहीं होता, तब तक हम आजाद होते हुए भी गुलामी की जंजीरों में जकड़े रहेंगे। उन्होंने अन्ना और रामदेव के आंदोलन पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया।

चौथी क्लास से देश सेवा में जुट गए थे
देशराज परदेशी चौथे कक्षा से देश सेवा में जुट गए थे। 26 जनवरी 1939 में शिशु सेवक की दल के साथ वांलटियर के रूप में नाभा और फरीदकोट के बार्डर पर देश की आजादी के लिए नेशनल प्रोपेगंडा में हिस्सा लिया। प्रजामंडल अगेंस्ट रुलर आफ नाभा स्टेट के प्रेसिडेंट सेठ रामनाथ और एडवोकेट सत्यपाल के साथ 1942 के नाभा स्टेट मूवमेंट के दौरान देशराज गिरफ्तार भी हुए, लेकिन अंडर एज के कारण उन्हें छोड़ दिया गया था।

दो बार जेल भी गए
अंग्रेजों का शिकंजा बढ़ने के बढ़ने के बावजूद देशराज के हौसलों पर कोई कमी नहीं आई। उसके बाद वे बढ़-चढ़कर आंदोलन में हिस्सा लेते रहे। पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह फरीदकोट प्रजामंडल मूवमेंट के दौरान 10 फरवरी 1946 से 16 मई 1946 तक वे जेल में रहे। फिर नाभा स्टेट के प्रेसिडेंट सेठ रामनाथ के साथ दो अप्रैल 1947 से 31 जुलाई 1947 तक जेल में रहे।
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