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यूनिवर्सिटी नहीं होने से भविष्य हो रहा खराब

Panchkula

Updated Sat, 04 Aug 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। शहर में यूनिवर्सिटी की मांग के लिए विद्यार्थी वर्ग भी जुटने लगा है। वे भी जानते हैं कि शहर के कालेजों का तब तक कोई फायदा नहीं, जब तक पंचकूला में यूनिवर्सिटी नहीं खुलती। यहां पर ग्रेजुएट लेवल के कोर्स भी नाममात्र हैं। इनकी डिग्री हासिल करने के बाद जॉब मिलना काफी मुश्किल है। पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स हैं ही नहीं। यूनिवर्सिटी नहीं होने से छात्रों का भविष्य खराब हो जाता है और ग्रेजुएशन के बाद तो विद्यार्थी फंस जाते हैं। अमर उजाला ने इस बारे में विद्यार्थियों से भी राय जानने की कोशिश की। छात्रों ने भी अमर उजाला मुहिम का समर्थन करते हुए सरकार से मांग की कि यहां पर यूनिवर्सिटी खुलनी चाहिए।
कोट
शहर में एक यूनिवर्सिटी या हायर इंस्ट्टीयूट का होना आवश्यक ही नहीं अनिवार्य है। मैं बीए सेकेंड ईयर का स्टूडेंट हूं और मेरा सब्जेक्ट अर्थशास्त्र है। बीए के बाद एमए अर्थशास्त्र में करना चाहता हूं, लेकिन किसी भी गवर्नमेंट कालेज में यह कोर्स मौजूद नहीं है।
-सौरव शर्मा, छात्र, सेक्टर एक गवर्नमेंट कालेज
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बीएमसी के बाद एमएमसी करना चाहती थी, लेकिन शहर के कालेजों में मास्टर कोर्स की कोई व्यवस्था नहीं है। मैंने अब कालेज में ही एमए पॉलीटिकल साइंस में दाखिला लिया है।
-सारिका प्रेमी, छात्रा, सेक्टर एक गवर्नमेंट कालेज
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यहां विद्यार्थियों के लिए हॉयर स्टडी की तो कोई व्यवस्था ही नहीं है। शिक्षा के क्षेत्र में तो शहर एक दम पिछड़ा हुआ है।
-जतिन वर्मा, छात्र, सेक्टर एक गवर्नमेंट कालेज
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गवर्नमेंट कालेज से ग्रेजुएशन करने के बाद तो विद्यार्थी बुरी तरह से फंस जाता है। पीयू में कोटा सिस्टम लागू होने के कारण चंडीगढ़ के किसी भी कालेज में एडमिशन मिलना काफी मुश्किल होता है।
-पंक ज गुप्ता, छात्र, सेक्टर एक गवर्नमेंट कालेज
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यूनिवर्सिटी की कमी खासतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को झेलनी पड़ती है। चंडीगढ़ के कालेजों में फीस ज्यादा होने की वजह से वहां दाखिला नहीं ले सकते हैं। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी उनके लिए काफी दूर है।
-मिक्की मुनजार, छात्र, सेक्टर एक गवर्नमेंट कालेज
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