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जुनून से जीती जिंदगी, अब पदक भी जीतेंगे

Panchkula

Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। हारी जंग को जुनून से कैसे जीता जा सकता है, इसको नरेंदर से बेहतर कोई नहीं बता सकता। नरेंदर उस हौसले का नाम है, जिससे उसके सारे सपने रूठ गए थे। पहले उन्होंने दौड़ में कैरियर बनाना शुरू किया, लेकिन चोट लगने के बाद जेवलिन थ्रो में आगे बढ़ने लगे। हिम्मत और जज्बे से नरेंदर पैराओलंपिक गेम्स में जगह बनाने में कामयाब रहे। पैराओलंपिक में जेवलिन थ्रो के लिए इंडिया से पांच खिलाड़ियों का चयन हुआ, जिसमें से एक नाम उनका भी है। उन्होंने अपनी ट्रेनिंग पंचकूला के सेक्टर-3 स्थित ताऊ देवी लाल स्टेडियम में ली है। लंदन में यह खेल 29 अगस्त से 9 सितंबर तक आयोजित होंगे। कोच नसीम अहमद ने दावा किया कि नरेंदर पैराओलंपिक में भारत के लिए पदक जरूर लेकर आएगा। लंदन रवाना होने से पहले नरेंद्र और उनके कोच नसीम अहमद ने अमर उजाला से बातचीत में यह बात कही।
2005 में गुजर गए थे माता-पिता
पानीपत के पलड़ी गांव निवासी नरेंदर को बचपन से स्पोर्ट्स में जाने का शौक था। माता-पिता ने उनके सपनों को साकार करने के लिए हामी भर दी और उसकी तैयारियों में जुट गए। अचानक 2005 में एक दुर्घटना में उनके माता-पिता का देहांत हो गया। नरेंदर के सामने आर्थिक संकट छा गया। मुसीबत के दिनों में उसके दो दोस्तों हरियाणा पुलिस में कार्यरत जयबीर और श्रीपाल ने साथ दिया।

फिर किस्मत ने दी दगा
तीन साल बाद 2008 में नरेंदर ने राज्य स्तर पर 100 और 200 मीटर की दौड़ में हिस्सा लेना शुरू किया। एक साल से कम समय में वे नेशनल स्तर तक पहुंच गए। 2009 में बंगलुरू में आयोजित राष्ट्रीय वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और 100 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके बाद 2010 में चीन में आयोजित एशियन गेम्स में हिस्सा लिया। 2011 में बंगलुरू में आयोजित 11वें सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में 100 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल किया। इसी दौरान चोट लगने के बाद कमर में दर्द बढ़ने के कारण डाक्टरों ने दौड़ने से मना कर दिया।
नरेंदर को उस दौरान ऐसा लगा कि उनका सपना टूट गया। लेकिन फिर उनका हौसला काम आया और उन्होंने अपने आपको जेवलिन थ्रो में अजमाया और एथलेटिक्स कोच नसीम अहमद से ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी। एक साल की कठिन मेहनत के बाद जनवरी 2012 में कुवैत में आयोजित कुवैत एशियन चैंपियनशिप में जेवलिन थ्रो में स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही पैराओलंपिक के लिए टिकट कटा लिया। उसके बाद अप्रैल 2012 में मलेशियाई ग्रां प्री. चैंपियनशिप में जेवलिन थ्रो में हिस्सा लेने का मौका मिला और स्वर्ण पदक हासिल किया।
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