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यूनिवर्सिटी न होने से उच्च शिक्षा में बाधा

Panchkula

Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। शहर को ट्राइसिटी के नाम से जाना जाता है, लेकिन यहां कोई भी पर्याप्त सुविधा नहीं है। खासकर शिक्षा के क्षेत्र में। यहां न तो यूनिवर्सिटी और न ही उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए कोई संस्थान। ऐसे में विद्यार्थियों के पास केवल एक ही विकल्प बचता है कि वह शहर से बाहर दूसरी यूनिवर्सिटी में अपनी शिक्षा जारी रखें। इसमें उनका काफी खर्च बढ़ता है और अनगिनत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पंचकूला के पब्लिक स्कूलों के प्रिंसिपल भी यही चाहते हैं कि शहर में एक यूनिवर्सिटी का होना बहुत जरूरी है। यूनिवर्सिटी बनने से हर साल पलायन करने वाले हजारों छात्र पंचकूला में ही रुक जाएंगे। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी सहूलियत मिल जाएगी। पब्लिक स्कूलों के प्रिंसिपलों की भी यही मांग है कि यहां पर हायर एजूकेशन के लिए सरकारी यूनिवर्सिटी का होना बहुत जरूरी है।
कोट
पंचकूला में हायर एजूकेशन के लिए कोई भी कालेज और इंस्टीट्यूट नहीं है। हायर एजूकेशन के लिए विद्यार्थी दसवीं के बाद चंडीगढ़ चले जाते हैं। यदि यूनिवर्सिटी मिल जाए तो शायद विद्यार्थियों को चंडीगढ़ न जाना पड़े।
हरसिमरण कौर, प्रिंसिपल द गुरुकुल स्कूल सेक्टर-20
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उच्च शिक्षा की प्राप्ति के लिए शहर में एक यूनिवर्सिटी तो जरूर होनी चाहिए। शहर के गवर्नमेंट कालेजों में इस समय गिने-चुने कोर्स मौजूद हैं। यदि विद्यार्थी इन कालेजों से ग्रेजुएशन कर लेते हैं तो उन्हें पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं।
शशि बनर्जी, प्रिंसिपल, भवन विद्यालय स्कूल, सेक्टर-15
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शहर में यूनिवर्सिटी न होने की वजह से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। कई विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं, लेकिन शहर में यूनिवर्सिटी न होना उनके लिए उच्च शिक्षा की राह में रुकावट डालता है।
रेनु दीवान, प्रिंसिपल, सेंट सोल्जर स्कू ल, सेक्टर -16
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चंडीगढ़ के कालेजों में एडमिशन लेना शहर के विद्यार्थियों के लिए सरल काम नहीं रहा है। इसलिए वह दसवीं के बाद ही इसके लिए कोशिश करने लगते हैं और ग्यारहवीं में चंडीगढ़ के स्कूलों में एडमिशन लेते है। ऐसे में उनकी पढ़ाई और समय दोनों ही प्रभावित होते हैं। शहर में सरकारी यूनिवर्सिटी का होना बहुत जरूरी है।
कुसुम कु मार गुप्ता, मैनेजर, न्यू इंडिया हाई स्कूल, सेक्टर-15
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शहर में यूनिवर्सिटी के न होने की वजह से विद्यार्थियों को काफी परेशानी होती है। कई विद्यार्थी ग्यारहवीं में ही चंडीगढ़ के स्कूल में एडमिशन ले लेते हैं। वहां आने-जाने में तो समय की बर्बादी होने से पढ़ाई का भी नुकसान होता है।
कविता वाधवा, प्रिंसिपल, हॉलमार्क स्कूल, सेक्टर-15
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आज के दौर में यूनिवर्सिटी होना एक बहुत महत्वपूर्ण डिमांड है। इसके अभाव में शिक्षा के क्षेत्र में शहर का नाम हमेशा पीछे रहेगा। कई विद्यार्थी इसके अभाव में बीच राह में ही अपनी पढ़ाई छोड़ देते हैं। जो कहीं न कहीं उन्नति की राह में एक बहुत बड़ी समस्या है।
नीरा सिंह, एडमिनीस्टेट ,सेंट सोल्जर स्कू ल, सेक्टर -16
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पंचकूला में दसवीं की परीक्षा पास करने वाले काफी टैलेंटेड विद्यार्थी हैं। दुर्भाग्यवश उन्हें दसवीं के बाद चंडीगढ़ में एडमिशन लेना पड़ता है। मेरे स्कूल में नर्सरी के कई विद्यार्थी चंडीगढ़ से आते हैं। यदि यहां यूनिवर्सिटी जैसी कोई व्यवस्था हो जाए तो विद्यार्थियों को काफी राहत होगी।
जय भारद्वाज, प्रिंसिपल हंसराज पब्लिक स्कूल, सेक्टर-6
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