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गीता जयंती के लिए दो साल से नहीं मिले एक करोड़

Karnal

Updated Mon, 10 Dec 2012 05:30 AM IST
कुरुक्षेत्र। बजट का टोटा गीता जयंती कुरुक्षेत्र उत्सव-2012 की भव्यता पर ग्रहण लगा सकता है। पिछले वर्षों में अनुदान की कटौती और दो वर्ष पहले घोषित एक करोड़ की ग्रांट का नहीं मिलना, इस उत्सव के आकर्षण पर असर डालेगा। इन हालात में गीता संदेश के साथ कुरुक्षेत्र को विश्व के मानचित्र पर लाने के दावों की भी पोल खुल रही हैं। आंकड़े बताते हैं कि पिछले वर्षों में महंगाई चाहे कितना गुणा बढ़ी हो, मगर गीता जयंती की ग्रांट का ग्राफ नीचे की ओर आया है। इस उत्सव में मुख्य किरदार निभाने वाले कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के पास आज तक गीता जयंती की स्पेशल ग्रांट का प्रावधान नहीं है। इस उत्सव के लिए हर बार लाखों रुपये कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा खर्च किए जाते हैं। पिछले वर्ष भी इस उत्सव के लिए केडीबी ने 65 लाख रुपये खर्च किए थे, जबकि इस उत्सव में भागीदारी निभाने वाले केंद्र और राज्य सरकारों के विभागों, संस्थानों द्वारा अलग से खर्च किया गया था। जिस गीता जयंती पर सात वर्ष पहले राज्य सरकार का बजट दो करोड़ था, वह घटकर अब 30 लाख रुपये हो चुका है। वहीं, 2010 में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा इस बजट को बढ़ाकर एक करोड़ रुपये करने की घोषणा को अभी तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है।
विधानसभा में उठाएंगे ग्रांट का मामला
स्थानीय विधायक और इनेलो प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा के मुताबिक कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद इस उत्सव का कद कम करने का काम किया है। इनेलो शासनकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने गीता जयंती के लिए दो करोड़ का बजट रखा था, लेकिन कांग्रेस के सत्ता में आते ही यह बजट मात्र 30 लाख रुपये दिया। वे गीता जयंती की ग्रांट का मामला विधानसभा में भी उठा चुके हैं, जिसके बाद सीएम हुड्डा ने इस ग्रांट 30 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ करने की घोषणा दो साल पहले की थी, मगर पिछले वर्ष और इस साल भी गीता जयंती में इस राशि में से कोई पैसा नहीं मिला है। कांग्रेस सरकार के गीता जयंती उत्सव और कुरुक्षेत्र को विश्व के मानचित्र पर लाने के दावे खोखले साबित हुए हैं। वह इस मुद्दे को आगामी विधानसभा सत्र में उठाएंगे।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिलाई थी पहचान : चौटाला
पूर्व मुख्यमंत्री और इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने रविवार को कुरुक्षेत्र आगमन के दौरान कहा कि कांग्रेस शासन ने इस उत्सव की शोभा को घटाने का काम किया है। इनेलो शासनकाल में उन्होंने इस उत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की कवायद शुरू की थी, इसका प्रचार-प्रसार सिर्फ जिला या राज्य तक नहीं, बल्कि देशभर के सभी राज्यों में कराया गया गया था। उनके निमंत्रण पर देश के तत्कालीन उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत और उप प्रधानमंत्री एलके आडवाणी सहित कई केंद्रीय मंत्रियों ने गीता जयंती कुरुक्षेत्र उत्सव में शिरकत की थी, जिससे इस उत्सव का प्रचार प्रसार देशभर में हुआ। चौटाला के मुताबिक इनेलो शासन में कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हस्तियाें को इस समारोह में शामिल किया। चौटाला के अनुसार उनके शासनकाल में गीता जयंती उत्सव की जो शोभा और भव्यता सामने आई, उसे कुरुक्षेत्र और प्रदेश जनता ही नहीं, मीडिया भी भली प्रकार जानता है।

अरोड़ा ने उठाए ये सवाल
1-2004 के बाद आज तक कांग्रेस सरकार का कोई केंद्रीय पर्यटन मंत्री क्यों नहीं शामिल हुआ इस उत्सव में
2-पड़ोसी जिला अंबाला की सांसद और यूपीए सरकार में केंद्रीय पर्यटन मंत्री रह चुकी कुमारी शैलजा तक क्यों रहीं गीता जयंती उत्सव से दूर
3-गीता जन्मस्थली के प्रति सौतेला व्यवहार क्यों
4-गीता जयंती उत्सव का बजट घटाने के पीछे क्या है मंशा
5-कांग्रेस शासनकाल में क्यों बंद की गई दिल्ली-कुरुक्षेत्र पैकेज बस सेवा

चार साल लगातार पहुंचे केंद्रीय पर्यटन मंत्री
वर्ष 2000 से लेकर 2003 तक हर गीता जयंती समारोह में भारत सरकार के केंद्रीय सांस्कृतिक और पर्यटन मंत्रालय के मंत्री कुरुक्षेत्र उत्सव में शामिल हुए, लेकिन वर्ष 2004 से आज तक 2011 तक कोई भी केंद्रीय पर्यटन मंत्री इस उत्सव में शामिल नहीं हुआ।

इन विभागों की है भागीदारी
गीता जयंती उत्सव में केडीबी के अलावा युवा एवं सांस्कृतिक मंत्रालय भारत सरकार के नार्थ जोन कल्चर सेंटर (एनजेडसीसी पटियाला), कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, हरियाणा टूरिज्म कारपोरेशन, हरियाणा मल्टी आर्ट कल्चर सेंटर तथा हरियाणा सरकार के सहयोग से लगने वाली प्रदेश के सभी विभागों की प्रदर्शनी एवं जिला प्रशासन के सभी विभागों की विशेष भागीदारी रहती है। हालांकि इनके अलावा धार्मिक संस्थाओं में श्री जयराम संस्था तथा अन्य संस्थाएं भी इस आयोजन में अहम किरदार निभाती आई है।

गीता जयंती के लिए नहीं स्पेशल बजट
केडीबी के संपदा अधिकारी और कार्यालय सचिव राजीव शर्मा से जब गीता जयंती बजट के बारे में जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि बोर्ड के पास इसके लिए कोई स्पेशल बजट नहीं है। उनके मुताबिक केडीबी अपने स्तर और रिसोर्स के माध्यम से इस उत्सव का खर्च वहन करती है। सरकार द्वारा एक करोड़ रुपये का अनुदान घोषित करने के बाद केडीबी ने पत्राचार कर 59 लाख रुपये की डिमांड भेजी थी, लेकिन इसे अप्रूवल नहीं मिली।

इन पर होता है केडीबी का खर्च
देशभर से इस उत्सव में शामिल होने वाले कलाकारों के लिए जलपान, भोजन, ठहरने, क्राफ्ट मेला और उत्सव स्थल पर लगने वाले टेंट, फोटोग्राफी, वीडियो रिकार्डिंग, बिजली की सुविधा, आतिशबाजी और प्रचार पर होने वाला खर्च केडीबी द्वारा किया जाता है। इसके अलावा पांच दिन पुरुषोत्तम पुरा बाग में चलने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आर्टिस्टों का आधा खर्च केडीबी और आधा खर्च एनजेडसीसी द्वारा उठाया जाता है।

2.35 लाख लाख रुपये खर्च हुए थे प्रचार पर
केडीबी ने पिछले वर्ष गीता जयंती प्रचार पर दो लाख 35 हजार रुपये खर्च किए थे। इस राशि से होर्डिंग पर पर्चे आदि बनवाए गए।

अनुदान की कमी नहीं होगी : डीसी
कुरुक्षेत्र के डीसी मनदीप बराड़ के मुताबिक उन्होंने उत्सव के बजट को लेकर केडीबी अध्यक्ष और राज्यपाल के निजी सचिव से संपर्क कर चुके हैं। उन्होंने बजट पर आश्वस्त किया है कि गीता जयंती के लिए फंड की कमी नहीं रहने दी जाएगी। केडीबी द्वारा जितनी राशि की डिमांड होगी, उसे पूरा किया जाएगा। वहीं एक करोड़ के अनुदान के बारे में डीसी ने कहा कि इसकी उन्हें जानकारी नहीं है, इस बारे में केडीबी अधिकारी ही बेहतर बता सकते हैं।
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