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शिक्षा के साथ खिलवाड़, पुस्तकों बिना कैसे करें पढ़ाई

Karnal

Updated Sun, 02 Dec 2012 05:30 AM IST
कुरुक्षेत्र। फरवरी-मार्च में जहां पेपरों के साथ शैक्षणिक सत्र निपट जाता है, वहीं, दिसंबर माह शुरू होने के बावजूद भी हरियाणा के सरकारी स्कूलों में कई विद्यार्थी पुस्तकों से वंचित हैं। इस सत्र को नौ माह पूरे होने जा रहे हैं और सरकारी स्कूलों में बगैर पुस्तकों के होनहारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। शिक्षक और विद्यार्थी इंतजार में हैं कि कब पुस्तकें नसीब हों और पढ़ाई का दौर चालू किया जाए। विद्यार्थियों से ज्यादा शिक्षक लाचार दिख रहे हैं। इनका कहना है कि वे चाहकर भी सरकार की गलत नीतियों का विरोध नहीं कर सकते। एक शिक्षक का तो यहां तक कहना है कि यह हालत शिक्षा के स्तर को नीचे लाने में काफी है। ताज्जुब की बात ये है कि एक ओर शिक्षा के स्तर में सुधार लाने के दावे हो रहे हैं, जबकि दूसरी ओर नियमित तौर पर स्कूल पहुंच रहे बहुत से विद्यार्थियों को किताबें ही मुहैया नहीं करवाई जा रहीं।
ये किताबें नहीं पहुंची स्कूलों में
राज्य के सरकारी स्कूलों अध्ययनरत विद्यार्थियों को कई विषयों की पुस्तकें अभी तक नहीं मिली हैं। इनमें आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को विज्ञान, संस्कृत, ड्राइंग, होम साइंस विषय की पुस्तकें ज्यादातर स्कूलों में आज तक भी नहीं पहुंचीं, जबकि आठवीं कक्षा की पंजाबी विषय की किताबें कई स्कूलों में 50 प्रतिशत विद्यार्थियों को ही उपलब्ध हुई हैं, जबकि इतने बच्चे पंजाबी विषय की पुस्तकें मिलने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं इन स्कूलों में बसंत विषय की पुस्तकें भी 75 प्रतिशत बच्चों को नहीं मिली हैं। जानकारी लिए जाने पर पता चला कि पांचवीं कक्षा की इंग्लिश वर्क बुक टाइटल कई स्कूलों में शॉर्ट है।

नहीं अपडेट हो रहा डाटा
ज्यादातर स्कूलों में पिछले वर्ष के आंकड़ों के अनुसार ही किताबें भेजी जा रही हैं, जबकि नए शैक्षणिक सत्र में अधिकांश विद्यार्थियों का डाटा जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में अपडेट नहीं है। डाटा अपडेट नहीं होने के कारण भी पुस्तकों का टोटा पड़ा हुआ है। पुस्तकें नहीं पहुंचने के पीछे कारण चाहे जो भी बताए जा रहे हों, लेकिन ये कटु सच्चाई है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले इन विद्यार्थियों को ही इससे नुकसान हो रहा है।

किताबें लेनी चाहिए वापस
राजकीय अध्यापक संघ-70 के राज्य अध्यक्ष जवाहर लाल ने कहा कि हरियाणा शिक्षा बोर्ड द्वारा विद्यार्थियों को दी जा रही निशुल्क किताबें बोर्ड द्वारा वापस लेनी चाहिए, क्योंकि पास होने के बाद वे किताबें उन विद्यार्थियों के किसी काम की नहीं रहती, जबकि अगर बोर्ड द्वारा किताबें वापस ली जाए तो किताबें शार्ट होने और नहीं पहुंचने की समस्या से काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है।

न हाजिरी की टेंशन, न फेल होने का डर
राजकीय अध्यापक संघ-70 के राज्य अध्यक्ष जवाहर लाल ने बताया कि जब 8वीं तक किसी भी विद्यार्थियों को फेल ही नहीं किया जा सकता तो बच्चों को किस बात का डर है। इसलिए एजूकेशन विभाग हाथी की सुस्त चाल जैसे चल रहा है और इसका खामियाजा विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा है।

हाथों से बनाए नोट्स से ही चल रहा काम
विद्यार्थी कक्षा में गुरु जी द्वारा लिखवाई गई सामग्री पर ही आश्रित है। उनके पास पढ़ाई के लिए लिखित में कोई सामग्री उपलब्ध नहीं है। ये किताबें केवल हरियाणा शिक्षा बोर्ड द्वारा ही स्कूलों में उपलब्ध करवाई जाती है, इसके अलावा ये किताबें बाहर मार्केट में भी उपलब्ध नहीं है।

कार्यालय में रखीं हैं किताबें : आर्य
डीईओ का कार्यभार संभाल रही सुमन आर्य ने बताया कि पुस्तकें स्कूल तक पहुंचाने का जिम्मा सर्व शिक्षा अभियान का है, लेकिन किताबें ऊपर से एक बार में नहीं आने के कारण विभाग ने तीन से चार बार स्कूलों में जाकर ये किताबें पहुंचाई और अब यदि किसी भी स्कूल में किताबें कम है तो वह बीईओ आफिस से प्राप्त कर सकता है। इस विषय में 28 नवंबर को एक बैठक के दौरान भी सभी स्कूलों के हेड को जानकारी दी जा चुकी है। आर्य के अनुसार उन्हें स्कूल कक्षाओं में बच्चों की पिछली संख्या को देखते हुए ही किताबों की डिमांड ऊपर भेजी है, जोकि इस बार भी पहले ही नवंबर को भेजी जा चुकी है।
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