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जान खतरे में डालकर कर रहे पढ़ाई

Karnal

Updated Wed, 28 Nov 2012 12:00 PM IST
इंद्री। प्रदेश सरकार गरीब बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं इंद्री के गांव करतारपुर के प्राइमरी स्कूल को प्रशासन ने बंद कर दिया। विभाग का तर्क यह है कि ये स्कूल एक किलोमीटर के दायरे में है, ऐसे में नियमानुसार इसे बंद किया गया है। जबकि इस स्कूल के बंद होने के बाद इस गांव के बच्चों को अब स्टेट हाईवे पार कर दूसरे गांव में पढ़ने के लिए जाना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे जान हथेली पर रखकर दूसरे गांव में पढ़ने जाते हैं। इतना ही नहीं पंचायत की ओर से स्कूल की जगह पर जलघर बनाया जा रहा है। करतारपुर के स्कूल का बंद होना सरकार के शिक्षा के अधिकार नियम की पोल खोलता है। करतारपुर निवासी सतवंती, धर्मबीर, मुकेश, बनारसी, जगतार सिंह, जयपाल, महिंद्र ने बताया कि गांव के गरीब व्यक्ति अपने बच्चों को इस स्कूल में पढ़ाते थे, लेकिन इन बच्चों की परवाह न करते हुए प्रशासन ने स्कूल को बंद कर दिया।

जान जोखिम में डालकर हैं पढ़ते
दूसरे गांव में जाने के लिए बच्चों को करनाल-यमुनानगर स्टेट हाइवे पार कर स्कूल जाना पड़ता है। इससे बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनके बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं, लेकिन प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। इतना ही नहीं हद तो तब हो गई जब पंचायत की ओर से स्कूल की जगह पर जलघर बना दिया। ग्रामीणों का कहना है कि वह किसान है जिसके चलते उनके पास समय की कमी होती है, लेकिन बच्चों को सड़क पार कराने के लिए उन्हें ही जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि गांव के स्कूल को जल्द शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि गांव में स्कूल नहीं होने से अधिकतर बच्चे पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं, इससे गांव में साक्षरता दर काफी कम है। स्कूल दूसरे गांव में होने के कारण वह अपने बच्चों पर नजर भी नहीं रख पाते।

जलघर बनाने की तैयारी
गांव गढ़पुर टापू पंचायत के अंतर्गत (करतारपुर) गांव आता है। सरपंच रिजवान ने बताया कि गांव के अधिकतर बच्चे पड़ोसी गांव के प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या कम है, लेकिन उन्हें मुसेपुर के स्कूल में सड़क पार करके जानी पड़ती है, यह खतरनाक है। फिलहाल गांव के स्कूल की जगह पर जलघर बनाने की तैयारी चल रही है जो करीब तैयार हो चुका है।

क्या कहते है बीइओ
खंड शिक्षा अधिकारी इंद्री राजकुमार ने बताया कि शिक्षा विभाग की स्कीम थी कि एक किलोमीटर के दायरे में यदि दो स्कूल है और बच्चों की संख्या 25 से कम है, तो एक स्कूल बंद कर दिया जाए। इस स्कीम के तहत यह स्कूल बंद किया गया है। दोबारा स्कूल चालू करने की अभी कोई सूचना नहीं आई है। यह स्कूल उनके आने से पूर्व ही बंद हो गया था।
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