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युद्ध से पहले पांडवों ने पिंडारसी में की थी पूजा

Karnal

Updated Fri, 09 Nov 2012 12:00 PM IST
कुरुक्षेत्र। गांव पिंडारसी अपने अतीत के परिदृश्य में अनेक आध्यात्मिक और पौराणिक रहस्य समेटे हुए है। यह स्थान उन क्षेत्रों में शामिल है, जहां पांडवों ने महाभारत का युद्ध शुरू होने से पहले पूजा की थी। कुछ लोगों का मानना है कि दिल्ली और बादली से आए लोगों ने यहां जंगल साफ करके रहना शुरू कर दिया। आसपास के लोगों द्वारा उन्हें यहां महाभारत की लड़ाई के किस्से सुनाए गए और बताया कि ‘जहां टटेहरी के अंडे, वहीं पांचों पंडे’ वाली कहावत इसी क्षेत्र की है। इस कहावत से प्रेरित होकर लोगों ने गांव का नाम पांडवप्रस्त रखा, जो बाद में अपभ्रंश होकर पिंडारसी के रूप में विख्यात हुआ। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यह गांव पानीपत की लड़ाई में मराठों की हार के बाद बचे लोगों ने बसाया था।
कुरुक्षेत्र ब्लाक समिति के अध्यक्ष रहे अपने जमाने के नामी कबड्डी खिलाड़ी रामकिशन बताते हैं कि पहले पिंडारसी ग्राम पंचायत के अंतर्गत भैंसीमाजरा, खिदरपुरा, लोहारमाजरा और सिंगपुरा गांव आते थे। अब गांव की अपनी पंचायत हैं। गांव का रकबा तीन हजार बीघे का है। ग्राम पंचायत के पास 50 एकड़ जमीन है। जमीन से होने वाली आय से विकास कार्य करवाए जाते हैं। पानी का जमीनी जलस्तर 70-75 फुट के करीब हैं, यही कारण है कि अब किसान साठी धान के बजाय साठी मूंग की खेती को प्राथमिकता देते हैं। गांव में रोड, नायक राजपूत, गडरिया, हरिजन, वाल्मीकि सहित सभी जातियों के लोग आपसी सौहार्द के साथ रहते हैं। ग्राम पंचायत के तहत किसी भी गांव में होने वाले विवाद शुरू से ही पंचायती स्तर पर निपटाने की परंपरा हैं। पानी की निकासी सुचारु है। पेयजल की व्यवस्था की बेहतर हैं। समाजसेवी राजकुमार बताते हैं कि महिला सशक्तीकरण के लिए महिलाओं को स्थानीय चौपाल में कार्यक्रम आयोजित करके सरकार द्वारा महिलाओं के कल्याण के लिए चलाई जा रही स्कीमों की जानकारी दी जाती है। गांव की चौपाल में उप स्वास्थ्य केन्द्र चलाया जा रहा है, जिसमें गर्भवती माताओं के खून की जांच के अतिरिक्त बच्चों में होने वाली खसरा ,काली खांसी, गलघोंटू और विभिन्न प्रकार के बुखार, तपेदिक और हैपेटाइटिस आदि की जांच की जाती है। गांव में मंदिर और दादा खेड़ा भी है। सरपंच रणधीर सिंह ने बताया कि यह गांव शहर के नजदीक है, इसलिए लोगों का कुरुक्षेत्र आना जाना लगा रहता है। सांसद नवीन जिंदल और डा. रामप्रकाश ने विकास के लिए 10-10 लाख रुपये की ग्रांट दी है। गांव के 90 प्रतिशत घरों में शौचालय है।
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