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करनाल में एमडीआर टेस्ट अब होगा तीन दिन में

Karnal

Updated Fri, 09 Nov 2012 12:00 PM IST
करनाल। मल्टी ड्रग रजिस्टेंट टीबी (एमडीआर) का टेस्ट अब तीन से साढे़ चार महीने में होने के बजाए तीन दिन में होगा। इसके लिए करनाल के जिला अस्पताल परिसर में एक करोड़ की लागत से प्रयोगशाला बनाई गई। इसके लिए माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट, तकनीशियन और संबंधित स्टाफ को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। देश के प्रसिद्ध लाला रामस्वरूप संस्थान के क्षय व संशय रोग के नेशनल रिफरेंस विभाग के एचओडी डा. वीपी माईनीडू और डा. रीतू सिंघल की टीम ने इस लैब को हरी झंडी देने के लिए अपना दो दिन का निरीक्षण का कार्य पूरा कर लिया है। करनाल की आईआरएल को मान्यता की स्वीकृति देने के लिए दोनों डाक्टरों की टीम करीब बीस सैंपल अपने साथ ले गई है। इनकी सप्ताह भर में रिपोर्ट आ जाएगी।
अभी तक होता था यह टेस्ट मैन्युअल
अभी तक हरियाणा में यह टेस्ट मैन्युअल किया जाता था। इस टेस्ट के पूरा होने में तीन से साढे़ चार महीनेे का समय लगता है। अब केंद्र सरकार, डब्ल्यूएचओ और फाइंड (इंटरनेशनल एनजीओ) के सहयोग से देश भर में इस तकनीक को बढ़ाने का काम किया जा रहा है। देश के सभी राज्यों को कम से कम एक स्थान पर इस टेस्ट के करने के लिए लैब खोली गई है। कई राज्यों में आवश्यकता के अनुरूप दो-दो लैब भी खोली गई है। हरियाणा में करनाल की प्रयोगशाला में यह एक्सटेंशन दिया गया है। राज्य भर के अस्पतालों से सैंपल टेस्ट होने के लिए अब करनाल इस लैब में भेजें जाएंगे। इस लैब का राज्य भर के काम का प्रभार माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट डा. संत लाल वर्मा के पास है।

लैब में टेस्ट को जरूरी सुविधाएं मौजूद
मैंने और डा. रीतू सिंघल ने दो दिन तक इस लैब में होने वाले टेस्ट के संदर्भ में पूरा गहन और विस्तार के साथ निरीक्षण किया है। अभी तक उनके सामने सब कुछ पॉजिटिव रहा है। इसके बावजूद यहां से टेस्ट किए गए पहले 20 सैंपल अब वह दिल्ली स्थित लाला राम स्वरूप क्षय व संशय रोग संस्थान की नेशनल रेफरल लैब में जांच करेंगे। इसके लिए उन्होंने सैंपल ले लिए है। उम्मीद है कि एक सप्ताह के भीतर यह रिपोर्ट स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार को भेज दी जाएगी। इस लैब के चालू होने से एमडीआर टीबी के कारण असामयिक मौत मरने वाले लोगों की संख्या में कमी आ सकेगी। बहुत अधिक मात्रा में रोग नहीं फैल पाएगा। पहले इस टेस्ट को मल्टी ड्रग रेसिटेंट टीबी टेस्ट कहा जाता था, जो अब तकनीक विस्तृत होने के बाद मोलीकुलर डायग्नोस्टिक टेस्ट (एलपीए-लाइन प्रोब एस्से) के नाम से हो गया है। अब यह काम बहुत तेजी से होगा। हर दिन एक बार 48 सैंपल लगाए जा सकते हैं। इस मशीन में सैंपल दो बार भी लगाए जा सकते हैं।
डा. वीपी माईनीडू, एचओडी
नेशनल रिफरेंस लैब
लाला राम स्वरूप क्षय व संशय रोग संस्थान

इस सुविधा से मिलेगी मरीजों का राहत
डब्लयूएचओ हरियाणा की कंसलटेंट डा. सुधी नाथ के अनुसार राज्य में टीबी के मरीजों की संख्या काफी अधिक है। हर साल नए मरीजों के कई हजार सैंपल लिए जाते हैं। यह सुविधा चालू होने के बाद बहुत लोगों की जिंदगी जाने से बचाई जा सकती है। राज्य में टीबी के रोगियों की संख्या में वृद्धि पर रोक लग पाएगी। स्विट्जरलैंड बेस आधुनिक मशीनें यहां लगवाई गई है। इस काम के लिए डब्लयूएचओ की ओर से तकनीकी सहायता दी जा रही है। इसमें वह अपनी ओर से कोई कमी नहीं आने दे रहा है।

प्रदेश में 37 हजार के करीब टेस्ट हुए
राज्य में करीब 36 से 37 हजार मरीजों के टीबी के टेस्ट फ्री कर उन्हें दवाइयां मुफ्त दी जाती है। मरीज का इलाज से छह से आठ महीने चलता है। दो बार बलगम की जांच होती है। राज्य के 14 जिलों में एमडीआर टीबी के उपचार की सुविधा उपलब्ध है। बाकी के सात जिलों में शामिल पलवल, गुड़गांव, मेवात, फरीदाबाद, रेवाड़ी, हिसार व सिरसा में भी यह सुविधा दिसंबर महीने तक लागू होने की उम्मीद है। इसके लिए राज्य सरकार पूरा प्रयास कर रही है। सरकार टीबी के मरीजों की मौत की संख्या में कमी लाने और रोगियों में कमी लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। स्वास्थ्य विभाग के मंत्री राव नरेंद्र सिंह और विभाग के तमाम उच्चाधिकारी मरीजों को अधिक से अधिक सुविधा देने के लिए प्रयासरत रहते हैं।
डा. राकेश सहल, राज्य टीबी अधिकारी

एमडीआर टीबी भयंकर बीमारी
एमडीआर टीबी बहुत भयंकर टीबी होती है। इसका मतलब है कि मरीज पर दवाइयों ने काम करना बंद कर दिया है। उपचार के बावजूद मरीज ठीक नहीं हो सका। ऐसी रोगी की टीबी को डायग्नोज करने को एमडीआर कहा जाता है। इस लैब के चालू होने से एक साल में कई हजार लोगों को इसका लैब मिल सकेगा। लोगों की जान बचेेगी। रोगियों की संख्या में कमी होगी। जो काम साढे़ चार महीने में होता था। वह हरियाणा के किसी भी जिले का हो एक सप्ताह के भीतर मरीज का उपचार प्रारंभ हो जाएगा। इसके लिए सब कुछ पूरा कर लिया गया है। तमाम औपचारिकताएं पूरी हो चुकी है। उम्मीद है जल्द ही केंद्र सरकार से भी इसकी स्वीकृति हो जाएगी।
डा. एसएल वर्मा, माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट
करनाल लैब, सरकारी अस्पताल, करनालँ
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