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अलविदा रत्नावली, फिर मिलेंगे अगले साल

Karnal

Updated Wed, 31 Oct 2012 12:00 PM IST
कुरुक्षेत्र। रत्नावली फेस्टीवल के जरिए कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी हरियाणवी संस्कृति को बढ़ावा देने का जो कार्य कर रही है वह सरानीय कदम है। यह बात हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने कही। उन्होंने रत्नावली जैसे अनोखे आयोजन के लिए केयू कुलपति डा. डीडीएस संधू व केयू के युवा एवं सांस्कृतिक विभाग के निदेशक अनूप लाठर, डीन स्टूडेंट वेल्फेयर प्रोफेसर डा.अनिल वशिष्ठ को बधाई देते हुए स्टाफ व सभी प्रतिभागियों को भी बधाई दी।
कुलदीप शर्मा ने कहा कि कुरुक्षेत्र भारत की संस्कृति का केंद्र रहा है और यह हरियाणा की संस्कृति का भी केंद्र है। उन्होंने केयू में अपने शिक्षार्जन के दौरान नरहरि भवन हास्टल की यादों को भी ताजा किया। विधानसभा अध्यक्ष ने भारत की गौरवमयी संस्कृति का जिक्र करते हुए कहा कि वह दुनिया में घूमे हैं लेकिन इतनी समृद्ध संस्कृति कहीं नहीं देखी।
उनसे पूर्व कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुवि कुलपति डा. डीडीएस संधू ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया व समारोह में भाग लेने वाले प्रतिभागियों और उपस्थित सभी लोगों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि 27 साल से यह रत्नावली समारोह हर वर्ष अनूठे प्रयासों से अपनी विशेष पहचान बनाता आ रहा है और आज धरोहर बन चुका है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार इसमें ज्यादा विधाऐं जुड़ती जा रही हैं उसी प्रकार इसके प्रसार में भी नए आयाम स्थापित होते जा रहे हैं। उन्होेंने युवा एवं सांस्कृतिक विभाग व इसके निदेशक अनूप लाठर व आयोजन से जुड़े सब लोगों को बधाई दी। उनसे पहले छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफेसर डा.अनिल वशिष्ठ ने अपने भाषण में मुख्य अतिथि और सभी अतिथियों कार्यक्रम में पहुंचने और प्रतिभागियों, स्टाफ व आयोजन से जुड़े सभी लोगों को अभूतपूर्व अनुशासन एवं सहयोग देने के लिए आभार प्रकट किया। इस अवसर पर केयू युवा एवं सांस्कृतिक विभाग के निदेशक एवं रत्नावली के सूत्रधार अनूप लाठर ने 4 दिवसीय इस समारोह की 27 वर्ष की यात्रा की जानकारी देते हुए कहा कि हरियाणा की कोई विधा ऐसी नहीं है जो रत्नावली में शामिल न हो।


रत्नावली का रंगारंग समापन
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में पिछले चार दिनों से चल रहा सांस्कृतिक महाकुम्भ मंगलवार को संपन्न हो गया। इन चार दिनों में विभिन्न मंचों से आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में सर्वाधिक अच्छे प्रदर्शन के कारण ओवर आल ट्राफी सेे यूटीडी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को नवाजा गया। गत वर्ष भी यह खिताब यूटीडी को ही मिला था। समापन समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने सभी प्रतियोगिताओं के प्रथम विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए।

यह रहे प्रतियोगिता के परिणाम
हरियाणवी भजन में पहले स्थान पर यूटीडी कुरुक्षेत्र रहा, हरियाणवी गज़ल में यूसीके कुरुक्षेत्र, डेक्लामेशन में एनएम गर्वनमेंट पीजी कालेज हांसी, हरियाणवी कविता में जेबीएम कालेज आफ ऐजूकेशन जुलाना, महिला एकल नृत्य में यूटीडी कुरुक्षेत्र, पुरुष एकल नृत्य में अग्रवाल कालेज बल्लभगढ़, मोने एक्टिंग में आरकेएसडी कालेज कैथल, हरियाणवी लोकगीत में सीआर किसान कालेज जींद, रागनी में डीएवी कालेज यमुनानगर, टिट बिटस में केएम गर्वनमेंट कालेज नरवाना, हरियाणवी फोक इंस्ट्रूमेंटल सोलो में गुरुनानक खालसा कालेज यमुनानगर, महिला वर्ग की लोक परिधान प्रतियोगिता में करनाल का पं. चिरंजी लाल शर्मा कालेज व इसी प्रतियोगिता के पुरुष वर्ग में यूटीडी कुरुक्षेत्र पहले स्थान पर रहे। आन दा स्पॉट पेंटिंग प्रतियोगिता में यूटीडी कुरुक्षेत्र व पेंटिंग प्रदर्शनी में भी यूटीडी कुरुक्षेत्र पहले स्थान पर रहे। हरियाणवी क्विज में एसबीडीएस कालेज आफ ऐजूकेशन रतिया, हरियाणवी पॉप सोंग में गवर्नमेंट कालेज फार वूमेन करनाल, हरियाणवी स्किट में आरकेएसडी कालेज कैथल और सांग में केएम गवर्नमेंट कालेज नरवाना व आरकेएसडी कालेज कैथल संयुक्त रूप से प्रथम स्थान पर रहे। हरियाणवी एकांकी में पं. चिरंजी लाल शर्मा गवर्नमेंट पीजी कालेज करनाल, हरियाणवी समूह गान में आई जी महिला महाविद्यालय कैथल व हरियाणवी आरकेस्ट्रा में आई जी कालेज पानीपत पहले स्थान पर रहे। ओल्ड ऐंटिक हरियाणा कलेक्शन प्रदर्शनी में डीएवी कालेज यमुनानगर, चौपाल में यूटीडी बीपीएस खानपुर कलां, रसिया व समूह नृत्य में डीएवी कालेज फार गर्ल्स यमुनानगर प्रथम स्थान पर रहे।

झूलण चाल्लो री, हेरी सामण आया सै....
पींघ पाटड़ी पींघण चाल्ली.........झूलण चाल्लो री, हेरी सामण आया सै.....। कुछ ऐसे ही उल्लास भरे हरिणावी गीतों पर थिरकते हरियाणा के युवाओें ने हरियाणा की लोक संस्कृति को और भी रंगीन बनाया। जी हां, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित रत्नावली समारोह के अंतिम दिन आडिटोरियम में सबसे लोकप्रिय विधा यानि हरियाणवी समूह नृत्य का आयोजन हुआ। समूह नृत्य की रोचकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुबह प्रतियोगिता शुरू होने से पहले ही पूरा आडिटोरियम खचाखच भर गया था। हालांकि ओपन ऐयर थियेटर में प्रोफेशनल कलाकारों द्वारा रागनी कंपटीशन का भी समानांतर कार्यक्रम चल रहा था, लेकिन दर्शकों की भीड़ इतनी रही कि दोनों जगह पांव रखने का स्थान नजर नहीं आ रहा था।
रंगीन रोशनियों में मंच पर हरियाणवी वेष भूषा में नाचते विभिन्न कालेजों की टीमों के प्रदर्शन और चारों ओर से आती मधुर संगीत के साथ गीतों की ध्वनि और हजारों तालियों की गूंज ने माहौल को आनंदमय बनाए रखा। सभी प्रतिभागियों की प्रस्तुतियां काफी रोचक रही।

ये रहे निर्णायक
रत्नावली समारोह में हरियाणा के हास्य सम्राट दरियाव सिंह मलिक, वरिष्ठ पत्रकार ओेमकार चौधरी व कमलेश भारतीय तथा निरूपमा दत्त, डा. रीतू, प्रो. रोशन लाल, राजीव, डा. अंजुल, संतोष नाहर, आजाद सिंह, रघु मलिक, डीएस मलिक, कुमारी वंदना, कुमारी अंजू, दानिष, आरएस वत्स, कनिका, संगम, जितेंद्र, सलूजा व रामपाल ने निर्णायक की भूमिका निभाई।

4 दिन तक किया सफल संचालन
समारोह के दौरान कलाकारों के साथ साथ मंच व अन्य संचालन क्रियाओं में भी विद्यार्थियों की भूमिका निर्णायक रही। केयू आडिटोरियम, ओपन एयर थियेटर, सीनेट हाल, क्रश हाल, आरके सदन और खुले मंच पर मंच संचालन विद्याथियों के हाथों में रहा और निर्बाध रूप से इस युवा टीम ने सफल संचालन किया। केयू के पूर्व छात्र प्रवीन शर्मा के नेतृत्व में सुनील कौशिक, सुषमा, राहुल टांक, स्वाति गुप्ता, पंकज शर्मा, भावना, महक, जेशना, योगेश, शाक्षी, रेनू, सनमीत, विशाल, राघव, प्रवीन, रोबीन, सिद्धांत, अरविंद्र, इशान, नवदीप, अन्नु, नुपुर, दिपेश आदि की टीम ने मंच व मंच से पीछे का कार्यभार संभाला तो सभी कार्यक्रमों का संपूर्ण ब्योरा एकत्रित करने में पवन सौंटी के नेतृत्व में शशि रावत, अंशुला गर्ग व पूनम यादव की टीम ने सराहनीय भूमिका निभाई।

जर्मन लोगों ने दी सबको राम-राम
रत्नावली का लुत्फ उठाने के लिए विशेष तौर पर जर्मन से आया विदेशी जोड़ा हरियाणवी समूह गान के दौरान हाल में जमा रहा। प्रतियोगिता के बीच में जब उनको अपने उद्गार प्रकट करने का मौका मिला तो उन्होेंने ठेठ हरियाणवी अभिवादन यानी राम-राम करके सबको अपने प्रति आकर्षित किया।

सांग में केएम कालेज नरवाना और आरकेएसडी कैथल प्रथम
सांगों की प्रतियोगिता में तीसरे दिन कुल 6 टीमों ने भाग लिया। इनमें से केएम गर्वनमेंट कालेज नरवाना और आरकेएसडी कालेज कैथल प्रथम स्थान पर रहे। दूसरे स्थान पर यूटीडी कुरुक्षेत्र व गर्वनमेंट पीजी कालेज जींद रहे। मोनो ऐक्टिंग में पहला स्थान आरकेएसडी कालेज कैथल को मिला, दूसरे स्थान पर गर्वनमेंट कालेज घरौंडा और तीसरे स्थान पर संयुक्त रूप से बीपीएस इंस्टीट्यूट आफ हायर लर्निंग खानपुर कलां और सीआर किसान कालेज जींद रही।
उधर हरियाणवी आरकेस्ट्रा में पहले स्थान पर आईबी कालेज पानीपत व दूसरे स्थान पर डीएवी कालेज यमुनानगर रहे। तीसरे स्थान पर संयुक्त रूप से केएम राजकीय महाविद्यालय नरवाना व आरकेएसडी कालेज कैथल रहे। देर शाम तक आडिटोरियम हाल में हरियाणवी आरकेस्ट्रा की धूम रही।

सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार
देर शाम तक ओपन एयर थियेटर में चली मूक अभिनय में कलाकारों ने सामजिक कुरीतियों पर जम कर प्रहार किया। नि:शब्द अभिनय द्वारा अपने भावों की अभिव्यक्ति जितनी कठिन जान पड़ती है, इन युवा कलाकारों ने उसे उतनी ही आसानी से दर्शकों के सामने रखा। सीआर किसान कालेज जींद के प्रतिभागी ने हरियाणवी संस्कृति बचाने के लिए अपने अभिनय द्वारा आवाज उठाई। पंडित चिरंजी लाल शर्मा गर्वनमेंट कालेज करनाल के प्रतिभागी ने बेरोजगारी की समस्या को उठाया तो गर्वनमेंट पीजी कालेज हिसार के प्रतिभागी ने भ्रूण हत्या की सामाजिक कुरीति पर करारा व्यंग्य किया। आरकेएसडी कालेज कैथल के प्रतिभागी ने देख तमाशा दारू का शीर्षक से अपनी प्रस्तुति दी। बीपीएसएम यूटीडी खानपुर कलां, सोनीपत की प्रतिभागी ने आत्माओं के प्रवेश के माध्यम से यमराज के सामने विभिन्न आत्माओें के माध्यम से राजनेताओं आदि पर करारे व्यंग्य कसे। एमएम कालेज आफ एजूकेशन फतेहाबाद ने कदे हां कदे ना शीर्षक से अपनी प्रस्तुति दी।

कलाकारों की जुबानी
रत्नावली समारोह दर्शक व प्रतिभागी सबके लिए समान महत्व रखता है। कुछ प्रतिभागियों ने यहां तक कहा कि रत्नावली उनके खून में बसता है। यह हरियाणवी संस्कृति का वह महाकुम्भ है जो प्रदेश की संस्कृति को प्रति वर्ष समृद्ध करता जा रहा है। यूटीडी कुरुक्षेत्र से हरियाणवी एकल नृत्य में आई व प्रथम पुरस्कार विजेता जीेंद निवासी ज्योति के अनुसार रत्नावली में वह 5 वर्ष से भाग ले रही है और हर बार प्रथम रहती है। मजेदार बात यह है कि वह शिक्षा अंग्रजी विभाग से ग्रहण कर रही है और रूचि कला में सर्वाधिक है। ज्योति एम. ए. अंतिम वर्ष की छात्रा है। उसके अनुसार जब तक वह खुद विश्वविद्यालय में है तो रत्नावली में भाग लेती रहेगी और आगे अपने बच्चों को भी नृत्य सिखाने का सपना दिल में संजोए है। गर्वनमेंट कालेज फार गर्ल्स जींद की छात्रा और रागनी गायिका प्रीति अटकन के अनुसार वह आठवीं कक्षा से रागनी गा रही है। इस बार पहली दफा रत्नावली में भाग लिया है। प्रीति के अनुसार उसके पापा का सपना है कि वह इंडियन आईडल व सारेगामा का भाग बने।
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