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यही हाल रहा तो नहीं उगाएंगे बासमती धान!

Karnal

Updated Wed, 31 Oct 2012 12:00 PM IST
कुरुक्षेत्र। धान का कटोरा कहे जाने वाले कुरुक्षेत्र के किसान अब आगामी सीजन में बासमती धान की खेती से तौबा करने का विचार कर रहे हैं। इसके लिए उन्हाेंने रणनीति भी तैयार करनी शुरू कर दी है। किसानों के अनुसार बासमती धान उपजाने में खर्चा अधिक होता है, लेकिन उन्हें मंडी में इसका मुनाफा मिलना तो दूर लागत भी नहीं मिल रही है।
किसानों ने बताया कि बासमती धान उगाने पर प्रति एकड़ करीब 15 हजार रुपये का खर्चा आता है। गांव भौर सैयदां वासी किसान गुरमुख सिंह ने बताया कि यदि इस तरह ही बासमती धान की बेकद्री होती रही और किसान लुटते रहे तो आने वाले समय में बासमती धान उगाना किसान पूरी तरह से बंद कर देंगे। गुरमुख सिंह के अनुसार उन्होंने पिछले साल अपनी 8 आठ एकड़ में बासमती धान उगाई थी। मंडी में यह कौड़ियों के भाव बिकी थी। इसी के चलते इस बार उन्होंने केवल चार एकड़ में ही बासमती धान उगाई है। मंगलवार को वे बासमती धान कुरुक्षेत्र नई अनाजमंडी में लेकर आए हैं। शाम तक उन्हें बासमती धान का कोई ठीक मूल्य नहीं मिला इसलिए उन्होंने निर्णय ले लिया है कि आगामी सीजन में वे बासमती धान नहीं उगाएंगे।
किसान खिजरपुरा वासी जगदीश ने बताया कि उसने भी केवल दो एकड़ में ही बासमती धान उगाई है और वह भी औने-पौने दामों में बिक रही है। किसान सतनाम सिंह ने बताया कि उनकी चार एकड़ में खड़ी बासमती धान अभी भी लगी हुई है। लेबर कटाई के लिए 3500 रुपये की डिमांड कर रही है। बासमती धान भी काफी कम मात्रा में निकलती है। उन्हाेंने बताया कि उनका एक एकड़ में 15 हजार रुपये बासमती धान उगाने में खर्चा जब आया जब उनके पास जमीन उनकी अपनी थी यदि जमीन ठेके पर ली होती तो उनका सीजन के दौरान दिवाला निकल जाता।

मंडी में बैठकर किसानों ने लिया निर्णय
कुरुक्षेत्र नई अनाजमंडी में बासमती धान उगाने वाले कई किसानों ने निर्णय लिया कि यदि सरकार बासमती धान का निर्धारित मूल्य कम से कम 3500 रुपये प्रति क्विंटल नहीं करती तो वे आगे से बासमती धान न उगाकर अन्य फसलें उगाएंगे। किसान गुरमुख सिंह ने बताया कि बासमती धान काटने के बाद इसका काफी गलत असर आगामी फसल पर भी पड़ता है। फसल कटने के बाद गेहूं भी ठीक प्रकार से खेतों में उत्पन्न नहीं हो पाती।

बीज किए जाएं बंद
नई अनाजमंडी आढ़ती एसोसिएशन के महासचिव एवं व्यापारी जगतार सिंह बताया कि सरकार को पीआर 201, पीआर 113, पीआर पुसा 44 के बीजों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए। उन्होंने बताया कि धान की इन किस्मों को खरीदते समय सरकार 10 प्रतिशत खराब बताती है। उन्होंने बताया कि इसके कारण किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ती है।

26 हजार हेक्टेयर में बासमती धान
डीडीए विभाग के स्टेस्टिक एसिस्टेंट बृज लाल ने बताया कि जिला में पिछले वर्ष एक लाख 21 हजार हेक्टेयर में धान लगाई हुई थी। इसमें से 38 हजार 330 हेक्टेयर बासमती धान उपजाई गई थी, लेकिन इस साल केवल 26 हजार 290 हेक्टेयर में ही बासमती धान किसानों ने उगाई है।

निर्धारित मूल्य तय करे सरकार
किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढुनी ने कहा कि जब तक किसान का बासमती धान मंडी में रहता है तब तक बासमती धान कौड़ियों के भाव बिकती है और जब धान व्यापारी खरीद लेता है तो उसका रेट तुरंत डबल हो जाता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सरकार प्रत्येक फसल का निर्धारित रेट घोषित करे और सभी फसलों को अपने आप ही खरीदे अन्यथा आगामी दिनों में किसान सड़कों पर होंगे। किसान बासमती धान उगाना भी बंद कर देंगे।

सरकार कर रही धोखा
विधायक एवं इनेलो प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने बताया कि वे पिछले दो साल से हरियाणा विधानसभा में किसानों की मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन कांग्रेस सरकार किसानों को बर्बाद करने पर तुली हुई है। उन्होंने बताया कि उन्होंने सरकार से मांग की थी कि किसान खेत में उगने वाली हर फसल का रेट किसान को पहले ही पता होना चाहिए, जिसके लिए सरकार को न्यूनतम दाम पहले ही घोषित करना चाहिए, लेकिन सरकार केवल बड़े व्यापारियों के हाथों की कठपुतली की तरह किसानों को बर्बाद कर रही है।
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