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अणपढ़ मंत्री बणन लागगे कुर्सी की गद्दारी होगी...

Karnal

Updated Tue, 30 Oct 2012 12:00 PM IST
कुरुक्षेत्र। रत्नावली फेस्टिवल की विधाओं ने सोमवार को तीसरे दिन भी हरियाणवी संस्कृति का परचम फहराया। केयू के छह मंचों पर कहीं चौपाल की चर्चा रही, तो कहीं लोकनृत्य और गीत-संगीत की मस्ती, वहीं, हरियाणवी परिधान में नजाकत, मेहनत, धर्म, आडंबर, सामाजिक और घरेलू परिवेश के ऐसे दर्शन हुए कि दर्शक टकटकी लगाए इसे निहारते रहे। रत्नावली में हरियाणवी युवा कवियों का मर्म और कैनवास पर हरियाणा की संस्कृति को बिखेरने वाले रंगों ने भी अपनी ओर आकर्षित किया। यूनिवर्सिटी कालेज कुरुक्षेत्र केे प्रतिभागी छात्र शैलेंद्र दुहन ने अपनी कविता से श्रोताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। दुहन ने कुछ यों कहा कि किसा जमाना मां बाप तै बेट्यां नै बहू प्यारी होगी, अणपढ़ मंत्री बणन लागगे कुर्सी की गद्दारी होगी।
उधर, गुड़गांव के राजकीय महिला कालेज की अदिति ने आज के युग के भगवान को कुछ यूं पुकारा सतयुग मैं तु श्री हरि विष्णु, त्रेता मैं श्रीराम, हे द्वापर के कृष्ण कन्हैया इब सै तेरा असली काम। इसी कालेज की अलका ने भी अपने गरीब बेरोजगार के घर चोर घुसने पर उनके आपसी संवादों को कुछ इस तरह प्रकट किया च्च्मेरी हिम्म्त लेजा जो बेरोजगारी तै ढीली ना हुई, लेजा वा परांत जो आज तक गीली ना हुई, आरकेएसडी कालेज कैथल के ब्रिजेंद्र ने कन्या भ्रूण हत्या पर अपनी प्रस्तुति में कहा कि च्च्तेरी बेटी अर्ज करै माता मनै गर्भ मैं कत्ल कराईये ना, सै चाव घणा दुनिया देखण का चढ़दी बेल कटाईये ना, जेबीएम कालेज जुलाना की मनीषा ने कविता के कोर्ट मैं एक इसा मुकदमा आया, एक सिपाही एक कुत्ते नै बांध ल्याया।
रत्नावली में अधिकतर कविताओं का संदेश कन्या भ्रूण हत्या को लेकर ही रहा, लेकिन अनेकों युवा कवियों ने राजनीति के साथ भ्रष्टाचार को अप्रत्यक्ष रूप से मुद्दा बनाया। शहीद बाबा दीप सिंह कालेज आफ एजुकेशन अहेरवां, फतेहाबाद के शिव कुमार ने घटिया मनुष्य की प्रकृति का बखान करते हुए कहा कि राज मैं हाथ अर धोरै पिस्से, इसे चापलूस के डरया करैं, ओच्छा माणस ओच्छी सोचै ओच्छे ओच्छे करतब करया करैं। यूटीडी कुरुक्षेत्र के देवेंद्र ने 21वीं सदी में पहुंचे गरीब की दशा के साथ आज के समाज पर कटाक्ष करती अपनी कविता के माध्यम से दर्शकों को कुछ यूं झकझोरा, उसके पाट्टे पराणे सड़ से खौंसड़्यां नै देख कै मेरै मोहन जोदड़ो अर हड़प्पा की खुदाई याद आण लागी। ....रोटी खा चाहे न खा पर जे 21वीं शदी मैं जाणा सै तो इन जूत्यां पै पालिश जरूर करवा..। इसके साथ ही मीठी यादों संग कलाकारों ने सबका मन मोह लिया।

दर्शकों ने खूब लिया चौपाल का आनंद
रत्नावली समारोह के तीसरे दिन मंच पर जब हरियाणा के ग्राम्य जीवन की झांकी चौपाल की प्रस्तुति हुई तो जमकर ठहाके लगे। सभी टीमों की प्रस्तुति सराहनीय रही, लेकिन पहले स्थान पर बीपीएसएम खानपुर कलां की यूटीडी की टीम रही। दूसरे स्थान पर डीएवी कालेज फार गर्ल्स यमुनानगर रहा। तीसरे स्थान पर यूटीडी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय रहा। चौपाल के विषय लोक जीवन से जुड़े रहे तो राजनैतिक चर्चा भी हुई।

...और दंग रह गए राजस्थान के छात्र
हरियाणा दिवस समारोह रत्नावली को देखने जहां विदेशी दर्शक भी पहुंच रहे हैं, वहीं पड़ोसी प्रदेश के विद्यार्थी भी पहुंच रहे हैं। राजस्थान के मांडन से स्कूली छात्र भी रत्नावली को देखने पहुंचे। पराग सीनियर सेकेंडरी स्कूल के इन बच्चों को हरियाणवी लोक विधाएं इतनी पसंद आईं कि सभी प्रस्तुतियों को देखने का मोह नहीं त्याग पाए। बच्चों ने बताया कि हरियाणवी लोक कलाएं राजस्थान की लोक कलाओं से मिलती जुलती हैं। उन्होंने बताया कि वह पहली बार यहां आए हैं। उनको गजल की मिठास बहुत पसंद आई। इसके साथ ही हरियाणवी लोक नृत्य रसिया भी सबको भाया।

कुआं पूजन ने जीता दिल
यह कौन है जो कंधे पर कांटों के झाड़ उठाए चला आ रहा है? जी हां, रत्नावली समारोह के तीसरे दिन आडिटोरियम हाल में आयोजित हरियाणवी लोक परिधान प्रतियोगिता में कुछ ऐसे ही दृश्य देखने को मिले। कंधे पर कांटों का झाड़ उठाए किसान ने अपने खेत की वन्य जीवों से रखवाली के लिए बाड़ करके सबका मन मोह लिया, तो प्रतियोगिता के महिला वर्ग में कुआं पूजन के दृश्य ने घर में बालक जन्म के अवसर पर होने पर होने वाली रस्मों को याद दिलवाया और पहला स्थान प्राप्त किया। इसके साथ ही बाण में बटा देता देहाती आदमी, सर पर पुराने जमाने का मौड़ लगाए बनड़ा (दुल्हा), कंधे पर पीर छड़ी उठाकर गूगा पीर की आराधना करता भगत, कुएं से पानी भरती नार, होली पर हरियाणा के कोरड़े का जलवा दिखाती महिला व बुढ़ापे को दर्शाती एक छात्र सहित बाजरा कूटती महिलाओं के दृश्य रोचक रहे। प्र्रतियोगिता के पुरुष वर्ग में 7 व महिला वर्ग में 10 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के पुरुष वर्ग में दूसरे स्थान पर एमएम कालेज आफ एजुकेशन फतेहाबाद व तीसरे स्थान पर करनाल का गवर्नमेंट पीजी कालेज रहा। महिला वर्ग में दूसरे स्थान पर बीपीएस महिला यूटीडी खानपुर कलाव व तीसरे स्थान पर नरवाना का एसडी कालेज रहा।

रत्नावली में पहुंच यादें हुईं ताजा
सिरोहीवाल की पुस्तक का केयू में विमोचन
कुरुक्षेत्र। जिला लोक संपर्क एवं सूचना अधिकारी देवराज सिरोहीवाल द्वारा लिखी पुस्तक संस्कृति के प्रहरी अनूप लाठर का विमोचन रत्नावली फेस्टिवल के तीसरे दिन मुख्य अतिथि रहे अमर उजाला के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुनील मुतरेजा ने किया। पुस्तक में रत्नावली के जनक एवं सांस्कृतिक विभाग के निदेशक अनूप लाठर की उपलब्धियों सहित उनके जीवन से जुड़े पहलुओं को दर्शाया गया। लाठर की सांस्कृतिक यात्रा पर लिखी गई ये पहली पुस्तक है। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के पुरातन छात्र एवं केयू में रंगमंच से जुड़े रहे सुनील मुतरेजा ने अनूप लाठर व अन्य साथियों के साथ बिताए दिनों को याद किया। मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे स्वर्णिम भविष्य के लिए अपने सार्थक प्रयास जारी रखें। उन्होंने हरियाणवी संस्कृति के लिए लाठर द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना के साथ सिरोहीवाल को पुस्तक के लिए बधाई दी। इसके अतिरिक्त मुख्य अतिथि ने शुभ तारिका नाम पत्रिका के हरियाणा विशेष अंक के साथ केयू भाषा संकाय की डीन डा. मधु बाला द्वारा फोक मीडिया पर लिखित पुस्तक का भी विमोचन किया।



कट आउट देखने के लिए उमड़े लोग
अमर उजाला में रत्नावली लाइव के कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी द्वारा बनवाए गए आदमकद कट आउट को दर्शक निहारते नजर आए। दर्शक इनके पास खड़े होकर फोटो एवं मोबाइल से वीडियो रिकार्डिंग करते दिखे।

विधानसभा अध्यक्ष करेंगे पुरस्कार वितरण
हर वर्ष प्रोफेशनल कलाकारों द्वारा देर शाम रागनी प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता रहा है, लेकिन इस बार रागनी का आयोजन दिन में होगा। कुवि युवा एवं सांस्कृतिक विभाग के निदेशक अनूप लाठर ने बताया कि इस बार रत्नावली समारोह के अंतिम दिन 30 अक्तूबर को रागनी प्रतियोगिता का आयोजन ओपन एयर थियेटर में किया जाएगा। इसमें हरियाणा के जाने माने रागनी कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। उधर, सुबह 10 बजे आडिटोरियम में हरियाणवी समूह नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन होगा व दोपहर बाद 2 बजे पुरस्कार वितरण किया जाएगा। इस बार पुरस्कार वितरण समारोह में हरियाणा के विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा उपस्थित होंगे।

रसिया में यमुनानगर का डीएवी कालेज छाया
रत्नावली समारोह के तीसरे दिन द्वितीय व तृतीय स्थानों पर रहने वाली टीमों को जर्मन से आए विदेशी मेहमान मार्क्श व हरियाणा के हास्य सम्राट दरियाव सिंह मलिक ने अपने हाथों से पुरस्कृत किया। पिछले दिन आयोजित रसिया में प्रथम स्थान पर डीएवी कालेज फार गर्ल्स यमुनानगर रहा था तो दूसरे स्थान पर गर्वनमेंट पीजी कालेज जींद रहा था। तीसरे स्थान पर आकेएसडी कालेज कैथल रहा था। आज आयोजित रागनी प्रतियोगिता में पहले स्थान पर डीएवी कालेज यमुनानगर, दूसरे स्थान पर गुरुनानक कालेज फार गर्ल्स यमुनानगर व तीसरे स्थान पर आई जी कालेज कैथल रहा। हरियाणवी समूहगान में आईजी कालेज कैथल पहले, यूनिवर्सिटी कालेज कुरुक्षेत्र दूसरे व यूटीडी कुरुक्षेत्र तीसरे स्थान पर रहे। आन दॉ स्पॉट पेंटिंग में यूटीडी की जैमिनी प्रथम, गर्वनमैंट कालेज अम्बाला की प्रीति दूसरे व डीएवी कालेज यमुनानगर की सिमर प्रीत कौर रही। पेंटिंग प्रदर्शनी में यूटीडी की मीनू प्रथम, अग्रवाल कालेज की तुलीका शर्मा व गर्वनमेंट कालेज अंबाला कैंट की प्रतिभा संयुक्त रूप से दूसरे तथा यूटीडी की कुशन सांगवान तीसरे स्थान पर रही।
हरियाणवी काव्य प्रतियोगिता में पहले स्थान पर जेबीएस जुलाना की मनीषा रही तथा दूसरे स्थान पर बीपीएस खानपुर कलां की सोनिया रही। तीसरे स्थान पर गर्वनमेंट पीजी कालेज हिसार के मनदीप सिंह रहे। हरियाणवी क्विज प्रतियोगिता में पहले स्थान पर एसबीडीएस कालेज आफ एजुकेशन रतिया रहा और दूसरे स्थान पर जनता कालेज आफ चरखी दारी रहा। तीसरे स्थान पर अग्रवाल कालेज बल्लभगढ़ रहा व चौथे स्थान पर आरकेएसडी कालेज कैथल रहा।

धरती में समा गए हीर-रांझा
सांग प्रतियोगिता के दौरान डीएवी गर्ल्स कालेज यमुनानगर की प्रभावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को भावनाओं में बहने पर मजबूर कर दिया। धनपत राय द्वारा लिखित इस सांग की कथा वस्तु के अनुसार जब ही रांझे का अंतिम मिलन होता है तो दोनों धरती में समा जाते हैं। हीर रांझे के परिजन उनके प्यार को पसंद नहीं करते और हीर की शादी धोखे से दूसरी जगह अक्खन काणा से करवा देते हैं, जबकि हीर रांझा को ही दिल से पति मान चुकी होती है। हीर रांझे से मिलने के लिये व रांझा हीर को पाने के लिये अनेकों मुसीबतों का सामना करते हैं, लेकिन अंत में जब उनका मिलन होता है तो एक साथ फिर भी जीवन यापन नहीं कर पाते और एक साथ धरती में समा जाते हैं। हीर के रूप में पारूल, रांझे के रोल में दीप्ति और सहायक भूमिकाओं टीना नेहा जैन, रिम्पी, सोनम, प्रियंका, आदि की भूमिका सराहनीय रही। यूटीडी कुरुक्षेत्र ने भी इसी सांग का मंचन किया। रांझा के रूप में सोहन गौड़, हीर के रूप में मोहनी, अन्य भूमिकाओं में कोमल रानी, सुमन, अनीता, देवेंद्र आदि की भूमिका सराहनीय रही।

साही लक्कड़हारा सांग ने दिल जीता
खुले मंच पर ही आरकेएसडी कालेज कैथल ने पं. लखमी चंद द्वारा लिखित साही लक्कड़ हारा भाग एक सांग की रोचक प्रस्तुति दी। कथानक के अनुसार जोधपुर शहर में राजा जोधानाथ राज करते थे जिनकी रानी का नाम रूपाणी था। उनकी किसी बात पर शर्त लग जाती है कि जो भी शर्त हारेगा उसे 12 साल का वनवास मिलेगा। रानी शर्त हार जाती है और उसे 12 साल का वनवास मिल जाता है। रानी 4 माह के अपने गर्भ का हवाला देकर वनवास न देने की प्रार्थना करती है, लेकिन राजा अपनी न्यायप्रिय छवि के कारण वनवास भेज देता है। रानी जंगल में एक अंधे महात्मा के पास रहना शुरू कर देती है जहां वह पुत्र को जन्म देती है। महात्मा अपनी जीवन यात्रा पूर्ण कर जाते हैं और रानी जंगल से लकड़ियां चुनकर उन्हें माधोपुर शहर में बेचकर अपना व अपने बच्चे का गुजारा करती है। 6 साल बाद रानी भी स्वर्ग सिधार जाती है। इसके बाद उसका पुत्र लकड़ियां बेचकर अपना गुजारा शुरू कर देता है। कहानी मोड़ लेती है। वह माधोपुर में लकड़ियां बेचता है। वहां के राजा अपनी लड़की को पूछते हैं कि तू किसका खाती है तो वह कहती है कि वह तो अपने भाग्य का खाती है। राजा उसकी शादी एक गरीब से करने की बात करते हैं। उसकी शादी लक्कड़हारे से हो जाती है। वह देखती है कि उसका पति चंदन की लकड़ियां बेचता है और लाला उसे लूटता रहता है। वह उससे पुराना हिसाब करती है और एक लाख नौ हजार पांच सौ रुपये लेकर आती है। इस प्रकार वह साबित करती है कि हर व्यक्ति अपने भाग्य का खाता है। शाही लकड़हारे के रू प में जसविंद्र, बीना के रूप में श्यामलाल अन्य भूमिकाओं में मनोज, भजन लाल, भूषण सुशील, साहिल आदि की भूमिकाएं सराहनीय रही।

ओपन एयर थियेटर में झूमे दर्शक
ओपन एयर थियेटर में रागनी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें 28 टीमों ने भाग लिया। रागनी के प्रति दर्शकों में इतना उत्साह दिखा कि पूरा थियेटर खचाखच भरा नजर आया। बीपीएसएम खानपुर की टीम ने आजा बहु आंगणा मैं तेरा कांगणा खुलै..., आई बी कालेज पानीपत की टीम ने साजण के घरां जाणा सै मां मेरी तसल्ली करदे री...., गर्वनमेंट कालेज पानीपत की टीम ने मात पिता जन्म देण के सतगुरु करमां के साथी..., बीपीएस यूटीडी खानपुर कलां की टीम ने भी साजण के घरां जाणा सै माँ मेरी तसल्ली करदे री....पर अपनी प्रस्तुति दी।
उधर, आरके सदन में हरियाणवी समूहगान प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें 14 टीमों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में सबसे पहले मंच पर आई भारती विद्यापीठ गोहाना की टीम ने देश मेरा हयिाणा जित दूध दहीं का खाणा गीत की प्रस्तुति दी। इसके बाद कुवि स्थित यूनिवर्सिटी कालेज की टीम अपने गीत ओ पपीहा रे, मेरी रिमझिम बरसै बादली... पर खूब तालियां बटोरी। इसके बाद गर्वनमेंट कालेज महम की टीम ने अपने गीत पाणी ल्यावण हेरी मेरी साथण राणी सब सखियां के साथ... द्वारा लोक प्रचलित गीत से परिचय करवाया। बल्लभगढ़ के अग्रवाल कालेज की टीम ने उड़ जा रे कागा, ले जा रे कागा... गीत से विरह वेदना को प्रस्तुत किया।
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