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वीसी का औचक निरीक्षण, मेसकर्मी की हार्ट अटैक से मौत

Karnal

Updated Sun, 21 Oct 2012 12:00 PM IST
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में बीती रात वीसी द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के कारण एक कर्मचारी की घबराकर हार्ट अटैक से मौत हो गई। आनन-फानन में उसे केयू के हेल्थ सेंटर पहुंचाया गया, लेकिन यहां उसे इलाज और एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण तत्काल जिला अस्पताल मोटरसाइकिल पर लाया गया। सरकारी अस्पताल से भी रेफर करने के बाद इस मेसकर्मी ने प्राइवेट अस्पताल जाते समय दम तोड़ दिया। घटनाक्रम के खिलाफ आज केयू कर्मचारी लामबंद हो गए। शुक्रवार रात को हर्ष छात्रावास में कुलपति डा. डीडीएस संधू ने औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान यहां खड़े युवक ने वीसी से अर्जुन हॉस्टल की खामियों की शिकायत की थी, जिसके बाद वीसी तुरंत अर्जुन भवन छात्रावास पहुंचे। वीसी के अचानक निरीक्षण के दौरान मेस का मुनीम दिवाकर त्रिवेदी घबराकर नीचे गिर गया। उसे तत्काल केयू के हेल्थ सेंटर ले जाया गया। वहां उसका इलाज संभव नहीं होने के कारण तत्काल मोटरसाइकिल पर ही एलएनजेपी पहुंचाया गया। ड्यूटी पर मौजूद डा. नितिन कालड़ा ने उसे प्राथमिक उपचार के बाद पीजीआई चंडीगढ़ के लिए रेफर कर दिया, लेकिन उसे ले जाने के लिए एंबुलेंस का कोई ड्राइवर नहीं मिला। हालांकि त्रिवेदी के सहयोगियों ने काफी शोर मचाया और ड्राइवरों को आवाजें भी लगाई। किसी भी ड्राइवर के नहीं मिलने पर आखिरकार दिवाकर को बाइक पर ही नगर के प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया। शव का शनिवार को पोस्टमार्टम तक नहीं कराया गया और सीधा उसके पैतृक गांव उत्तर प्रदेश हरदोई के लोदखेड़ा भिजवा दिया गया।
20 मिनट बाद मिली थी सूचना : चीफ वार्डन
चीफ वार्डन डा. सतदेव का कहना कि शुक्रवार रात 9 बजे उनके पास कुलपति डा. डीडीएस संधू का फोन आया था और उन्हें तुरंत हर्ष हास्टल में आने के लिए कहा। वे हर्ष हॉस्टल पहुंचे तो डा. संधू हॉस्टल के भोजन का निरीक्षण कर रहे थे, जिसकी रिपोर्ट सही रही। इसके बाद मौके पर उपस्थित एक विद्यार्थी के कहने पर संधू ने अर्जुन हॉस्टल की मेस का रुख किया। यहां भी खाने की क्वालिटी सही पाई गई। जांच के बाद कुलपति अपने आवास पर चले गए, लेकिन 20 मिनट बाद ही उन्हें केयू मेस के मुनीम दिवाकर त्रिवेदी के अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने की सूचना मिली, जिसके बाद उन्होंने कर्मचारियों से मुनीम को अस्पताल ले जाने को कहा।

मुआवजा दिया जाएगा : डा. सतदेव
चीफ वार्डन डा. सतदेव ने बताया कि मृतक केयू में रेगुलर कर्मचारी नहीं था। बावजूद इसके यदि कोआपरेटिव मेस यूनियन मुआवजे की मांग करती है तो मृतक के परिजनों को हॉस्टलों से मुआवजा इकट्ठा करके दिया जाएगा और यूनिवर्सिटी द्वारा उसके परिवार की हरसंभव सहायता करने का प्रयास किया जाएगा।

युवक निकला आउटसाइडर
वीसी को अर्जुन हॉस्टल में खाने की जांच करने के लिए बुलाने वाला युवक उदयवीर जांच के बाद आउटसाइडर पाया गया। डा. सतदेव ने बताया कि यह युवक अवैध रूप से 84 नंबर कमरे में रह रहा था, जिसके बाद शिव फुटेरा के नाम से अलाट कमरे को भी रद कर दिया गया।

1974 से मेस में कार्यरत था दिवाकर
केयू मेस कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष सुभाष पारचा ने कहा कि मृतक दिवाकर त्रिवेदी के तीन बच्चे हैं और उनका केवल मात्र सहारा त्रिवेदी ही थे। केयू उनके पुत्र को स्थायी नौकरी दे। त्रिवेदी 1974 से केयू मेस में कार्यरत थे।

वीसी के आने से घबरा गया था कर्मी
मेस कर्मचारी महासचिव उमाशंकर ने बताया कि रात्रि साढ़े नौ बजे वीसी डा. डीडीएस संधू के निरीक्षण के तुरंत बाद ही मुनीम को घबराहट होने लगी और तबीयत बिगड़ गई। सिविल अस्पताल में उपस्थित नर्स ने इंजेक्शन देकर रेफर कर दिया, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई।

बिना पोस्टमार्टम कराए भेजा शव
केयू प्रशासन के सिर पर दिवाकर त्रिवेदी की मौत का ठीकरा नहीं फूटे, इससे बचने के लिए आनन-फानन में उसका शव यूपी उसके भिजवा दिया गया और शव को गांव भेजने से पहले उसका पोस्टमार्टम तक नहीं कराया गया। ऐसा क्यों हुआ? इसका जवाब कोई भी देने को तैयार नहीं है।

वीसी ने कहा, जांच करा रहे हैं
कुलपति डा. डीडीएस संधू ने जांच का भरोसा दिया है। उनके मुताबिक ये मेडिकल केस है। इसकी जांच करा रहे हैं। मेसकर्मी को मुआवजे पर वीसी का कहना है कि रूल के अनुसार उसे क्या मुआवजा मिल सकता है, इसका पता किया जा रहा है। एंबुलेंस के विषय में उनका कहना था कि त्रिवेदी को केयू की एंबुलेंस में अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन जब उन्हें बताया गया है कि उसे न तो केयू और न ही अस्पताल की एंबुलेंस नसीब हुई तो इस विषय में भी उनका कहना था कि वे इसकी जांच कराएंगे।


खड़ी रह गई एंबुलेंस, बाइक पर ले जाते समय तोड़ा दम
वीसी ने निभाई खामियों पर पर्दा डालने की परंपरा
जिंदा रहते नसीब नहीं हुई, शव के लिए यूपी तक भेजी एंबुलेंस
बगैर पोस्टमार्टम कराए रात को ही यूपी रवाना कर दी गई एंबुलेंस
समय पर एंबुलेंस मिलती तो बच सकती थी जान

अमर उजाला ब्यूरो
कुुरुक्षेत्र। केयू और सरकारी अस्पताल दोनों जगह जिस व्यक्ति को एंबुलेंस नसीब नहीं हुई, उसके बारे में वीसी का दावा है कि उसे एंबुलेंस में अस्पताल ले गए थे। खामियों पर पर्दा डालने की ये परंपरा काफी पुरानी है, फिर चाहे ये किसी जीवन और मौत का विषय भी क्यों न हो। 17 अक्तूबर 2011 को कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में सरेआम एक आउटसाइडर छात्र नेता की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई थी, लेकिन केयू के अधिकारियों ने अपनी लापरवाही को छुपाने के लिए उसे अपनी ही यूनिवर्सिटी का छात्र घोषित कर दिया था। हालांकि बाद में अमर उजाला ने स्पष्ट किया था कि ये छात्र नेता केयू का विद्यार्थी था ही नहीं। बीती रात के घटनाक्रम की वास्तविकता यह रही कि इस मेस कर्मी को अस्पताल ले जाने के लिए न तो केयू के हेल्थ सेंटर की एंबुलेंस नसीब हुई और न ही जिला के अस्पताल की। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि यह बेहद मार्मिक दृश्य था कि पीड़ित के सहयोगी अस्पताल में एंबुलेंस के लिए आवाजें लगा रहे थे और मौके पर एंबुलेंस तो तीन मिली, लेकिन ड्राइवर एक भी मौके पर नहीं था। आखिरकार उसके सहयोगियों ने बाइक पर ही ले जाने के लिए उसे मोटरसाइकिल पर बैठाया, लेकिन मरीज अस्पताल पहुंचा तो उसकी मौत हो चुकी थी। हैरत की बात ये है कि जीवित रहते भले ही दिवाकर को एंबुलेंस नहीं मिली, लेकिन बिना पोस्टमार्टम कराए शव को सीधा यूपी 450 किलोमीटर एंबुलेंस से भिजवाया गया है।
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