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दिल्ली की तर्ज पर हेल्प लाइन सेवा शुरू हो

Karnal

Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
करनाल। बाजार, स्कूल-कालेज और बस में रोजाना हो रही छेड़छाड़ को लेकर लड़कियां मुखर होकर बोल रही हैं। इनका कहना है कि छेड़छाड़ की घटनाआें को लेकर हो हल्ला तो हर कोई कर रहा है, लेकिन सार्थक पहल पर किसी का ध्यान नहीं है। छात्राएं चाहती हैं कि उनकी शिकायत पर त्वरित कार्रवाई तो हो ही साथ में उनकी गोपनीयता बरकरार रहे। ताकि भविष्य में लड़के किसी एक लड़की को टारगेट ना कर सकें।
एसएमएस की सुविधा हो
अमर उजाला की मुहिम का स्वागत करते हुए राजकीय पीजी कालेज की छात्रा विभूति कहती हैं कि यह सही है कि हम चुप रहती हैं। अगर चुप ना हों तो करें भी क्या? शिकायत के नाम पर दस तरह के सवाल और बीच में कोई पुलिस वाला ही कह देता है कि कोई चक्कर होगा। ऐसे में शर्मसार होने से अच्छा है कि चुप ही रहा जाए। जरूरी है कि लड़कियों के लिए अगल से पीसीआर हो। इसमें एसएमएस सुविधा हो और मेसेज मिलते ही संबंधित स्थान पर पुलिस पहुंच कर मनचलों को काबू करें। इसमें शिकायतकर्ता को बीच में लाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। अगर ऐसे दो मामले भी होते हैं, तो बहुत हद तक इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है।
मनचलों को करें शर्मसार
इसी तरह तृप्ति, कामना, श्रुति, वाणी, वंदना, रितू आदि कहती हैं कि मनचलों को सरेआम शर्मसार करना चाहिए, ताकि उनको देखकर दूसरों को भी सीख मिले और वह ऐसा करते हुए चार बार सोचे। निश्चित तौर पर ऐसा करने पर बहुत हद तक छेड़छाड़ व फब्बितयां कसने की हरकतों पर रोक हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं होने से ही लड़कियां शिकायत करने से कतराती हैं और लड़कों के हौसले मजबूत होते हैं।

परिजनों को बुलाकर कारनामे बताएं
डीएवी कालेज ऑफ एजूकेशन कालेज की प्राचार्य शशि मनचंदा का कहना है कि महिलाओं से छेड़छाड़ जैसी घटनाएं रोकने के लिए पुलिस को हेल्प लाइन शुरू करना चाहिए। दिल्ली की तर्ज पर सूचना देती ही पुलिस मौके पर पहुंचे व ऐसा करने वाले को साथ ले जाए। इसके बाद जांच हो और कम से कम ऐसा करने वाले की मां व पिता को थाने बुलाकर सारी कहानी समझाई जाए। ताकि वह नैतिक रुप से इस मामले में कमजोर पड़े और भविष्य में ऐसी हरकत करते हुए कतराए, तभी इन घटनाओं पर प्रभावी रोक संभव है। थोड़ा लड़कियों को भी कठोर कदम उठाने होंगे और वह चुप ना रहें, बल्कि विरोध करें। ऐसा नहीं है कि सब एक जैसे होते हैं विरोध पर कोई ना कोई तो साथ देगा ही।
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