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हर कालेज के बाहर तैनात हो पीसीआर

Karnal

Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
करनाल। छात्राओं से छेड़छाड़ के मामलों में कमी लानी है तो कानून में सख्ती लानी होगी। इसके लिए सरकार और प्रशासन को मनचलों के प्रति कड़ा रूख अपनाना होगा। मनचलों के हौसले तोड़ने के लिए कडे़ कदम उठाना बेहद लाजिमी है। अन्यथा वर्तमान हालात के अनुसार लड़कियों से छेड़छाड़ के मामलों में बढ़ोत्तरी को रोक पाना संभव नहीं लगता।
लड़की न जाए थाने और अदालत
राजकीय पीजी कालेज के छात्रा सपना, स्नेही, जयश्री, अनीता और रीटा ने अपनी पूरी पहचान बताए बिना कहा कि हर कोई जानता है कि लड़कियों को हर स्थान पर लड़कों की छेड़छाड़ का शिकार होना पड़ता है। परिवारों में संस्कार समाप्त हो गए हैं। लड़कियों को कोई भी सामान्य दृष्टि नहीं देखता। कई बार लड़के तमाम हद पार कर जाते हैं। ऐसे में कई शहरों में बड़ी घटनाएं भी हो चुकी हैं। ऐसे में कानून को सख्त करना बेहद जरूरी है। सरकार की ओर से लड़कियों से छेड़छाड़ करने वाले युवकों के खिलाफ सामान्य शिकायत पर मामला दर्ज होना चाहिए। मामला अंडर ट्रायल होने पर लड़की को अदालत में नहीं बुलाया जाना चाहिए। पुलिस थाने में लड़कियां चक्कर नहीं काट सकती है। हर कालेज के बाहर पीसीआर तैनात होनी चाहिए।

बचाव के लिए मचाए शोर
लड़कियाें की पूरी पहचान गुप्त रहनी चाहिए। किसी भी हालत में लड़की को सामने नहीं लाया जाना चाहिए। अन्यथा उसका जीवन तबाह होने के हालात बन जाते हैं। कानून में सख्ती ही इन मामलों में कमी ला सकती है। हां कुछ हद तक छात्राओं को भी थोड़ा मजबूत होना चाहिए। हल्की टोका-टाकी पर तुंरत कड़ा जवाब दिया जाना चाहिए। बाजार में हो तो शोर मचा कर मदद मांगनी चाहिए।

जघन्य अपराध की श्रेणी में आए छेड़छाड़
कालेज के प्रिंसिपल डा. आरएस शर्मा ने कहा कि मामला बहुत गंभीर है। अभिभावक बच्चों को शिक्षा हासिल करने घर से भेजते हैं। कुछ शरारती किस्म के आवारा लड़के ऐसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। कई बार ऐसी घटनाएं हो जाती हैं, कि पीड़ित लड़की को भारी मानसिक वेदना होती है। ऐसे में यह जघन्य अपराध माना जाना चाहिए। जघन्य अपराध की धाराओं के तहत ही युवक के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए। सार्वजनिक माहौल बिगाड़ने वाले छात्रों को कतई कोई रियायत नहीं दी जानी चाहिए। सरकार की ओर से कोई ऐसा नियम भी बनाया जाए कि उन्हें स्वयं का भविष्य बिगड़ने का डर भी सताता रहे।
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