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नहीं मिल रही गरीबों को निजी स्कूलों में शिक्षा

Karnal

Updated Mon, 08 Oct 2012 12:00 PM IST
करनाल। हरियाणा स्कूल एजूकेशन एक्ट के रूल 134 ए की जिलेभर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इस मामले में जहां स्कूल संचालकों ने अभी तक इस रूल का लाभ पात्र अभिभावकों को नहीं दिया है। इसको लेकर जिला शिक्षा विभाग सरकार के आदेश पर ऐसे स्कूल संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के मूड में दिखाई पड़ रहा है। वहीं, निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि ऐसे हालात में वह लोग स्कूल चलाने की हालत में नहीं रह सकेंगे।
इस रूल को लागू कराने के लिए पिछले कई साल से अभिभावक एकता मंच और अभिभावक एकता संघ अपने-अपने बैनर पर निजी स्कूलों के खिलाफ कड़ा संघर्ष कर रहे हैं। दोनों संगठनों ने स्कूल संचालकों को कानूनी ढंग से पूरी तरह घेर रखा है। इतना ही नहीं दो जमा पांच मुद्दे जन आंदोलन संगठन के राज्य अध्यक्ष एवं एडवोकेट सत्यवीर हुड्डा की याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट आदेश दे चुका है कि वह अपने स्तर पर इस संबंध में राज्य भर के निजी स्कूलों की रिपोर्ट तैयार कर अदालत में प्रस्तुत करें। इसके लिए काम भी शुरू कर दिया गया है।

विभाग लगा चुका है पूूरा जोर
नियम 134 ए को लागू कराने के लिए राज्य शिक्षा विभाग पूरा जोर लगा चुका है। इसके बावजूद निजी स्कूलों के अधिकतर संचालकों ने सरकार के इस रूल को लागू नहीं कर सरेआम धज्जियां उड़ा रखी है। शहर में खुली चर्चा रहती है कि स्कूल अब शिक्षा देने के मंदिर नहीं बल्कि व्यवसाय के केंद्र बन गए हैं। निजी स्कूल संचालक सरकार से कई प्रकार लाभ लेने के नियमों की भी परवाह नहीं करते। इसका ठोस सबूत अब तक इस नियम को लागू नहीं करना है। इससे बड़ा कोई सुबूत लोगों और कानून की नजर में संभवता नहीं हो सकता।

यह है नामी स्कूलों के रिकार्ड का हाल
जिला शिक्षा कार्यालय में जमा कराए गए रिकार्ड के अनुसार वर्ष 2012 में दिल्ली पब्लिक स्कूल ने नर्सरी से लेकर 12 वीं कक्षा तक कुल 297 नए बच्चों को दाखिला दिया। इसमें एक भी बच्चे को इस नियम के तहत लाभ नहीं दिया गया। सेक्टर 7 के दयाल सिंह पब्लिक स्कूल ने पहली कक्षा से लेकर 11वीं कक्षा तक के 69 नए बच्चों को प्रवेश दिया। इसमें से किसी भी बच्चे को लाभ नहीं दिया गया। दयाल सिंह कालोनी स्थित छयाल सिंह पब्लिक स्कूल में नर्सरी से 11 वीं कक्षा तक के 250 बच्चों को नया दाखिला दिया गया। एक भी बच्चे को इस नियम का लाभ नहीं दिया गया। सेक्टर छह के प्रताप पब्लिक स्कूल ने नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक के 522 नए बच्चों का दाखिला किया। इस स्कूल के प्रशासन की ओर से नर्सरी में एक बच्चे हितेष, पहली कक्षा में एक बच्ची यशलीन, दूसरी में एक बच्ची विशा और सातवीं में एक बच्चे अतुल समेत केवल चार बच्चों को लाभ दिया गया। जबकि कुल संख्या में 25 प्रतिशत ऐसे बच्चों को लाभ देना होता है, जिनके अभिभावकों की आय दो लाख रुपये से कम हो। जरनैली कालोनी स्थित मुख्य प्रताप पब्लिक स्कूल में नर्सरी समेत 12 वीं कक्षा तक के कुल 322 नए बच्चों को दाखिला दिया गया। इनमें नर्सरी में एक बच्ची शिवानी, पहली में एक बच्चे दिविज, दूसरी कक्षा में दो बच्चों प्रिंस पासवान व अमित, पांचवीं कक्षा में एक बच्ची पलक तथा 10वीं कक्षा में मंशा ठुकराल को दिया गया। ओपीएस विद्या मंदिर में नर्सरी से 12वीं कक्षा तक कुल 353 बच्चों को नया दाखिला दिया गया। इसमें किसी बच्चे को लाभ नहीं दिया गया। निशान पब्लिक स्कूल ने नर्सरी से लेकर 11 वीं कक्षा तक 118 नए बच्चों को प्रवेश दिया गया। इस स्कूल प्रशासन की ओर से किसी बच्चे को लाभ नहीं दिया गया। डीएवी सेंचुरी पब्लिक स्कूल में नर्सरी से लेकर 11वीं कक्षा में 106 नए बच्चों को प्रवेश दिया गया। छठी कक्षा के एक बच्चे अंकित को इसका लाभ दिया गया। जिला भर में अधिकतर स्कूलों की यही हालत है। इससे साफ है कि इस नियम की धज्जियां उड़ाने में निजी स्कूल संचालकों ने कोई कमी बाकी नहीं छोड़ी है।

लाभ दिया तो हो जाएंगे कंगाल
शहर के कई निजी स्कूल संचालकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि आरटीई और हरियाणा सरकार का नियम 134 ए दोनों अलग-अलग है। दोनों के तहत 25-25 प्रतिशत लाभ दिया गया तो वह लोग स्कूल बंद करने को मजबूर हो जाएंगे। ऐसे हालात में राज्य में अनपढ़ता की दर में बढ़ोत्तरी होगी। अदालत के किसी भी निर्णय पर वह लोग टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन उनका आग्रह है कि अदालत में उन लोगों का पक्ष में सुना जाना चाहिए। हां कें द्र के आरटीई को वह लोग लागू करने को तैयार है। इसके लागू करने से स्कूल संचालकों को केंद्र और राज्य सरकार मिल कर बच्चे की फीस अदा करते हैं। इससे छात्र को शिक्षा मिल जाती है और स्कूल संचालकों को फीस मिल जाती है, लेकिन पूरी तरह फीस से मुक्त कर शिक्षा देने उन लोगों के बूते से बाहर है।

नियम लागू कराने को अभिभावक मंच करेंगे संघर्ष

अभिभावक एकता मंच के अध्यक्ष जेके शर्मा तथा अभिभावक एकता संघ के महासचिव नवीन अग्रवाल ने कहा कि यह मुद्दा बेहद गंभीर है। दोनों संगठनों ने इस मुद्दों को लेकर कड़ा संघर्ष किया है। शहर का बच्चा-बच्चा इस आंदोलन से वाकि फ है। इसके बावजूद स्कूल संचालक अपनी मनमर्जी चलाने से बाज नहीं आ रहे है। ऐसे में अब हाइकोर्ट के आदेश के बाद निजी स्कूल संचालकों के रंग उड़े है। वह लोग अभिभावकों के हक की लडाई अंतिम दम तक लडेंगे। किसी भी हाल में अभिभावकों के मुद्दे को कमजोर नहीं होने देंगे।
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आजाद/पुरूषोत्तम
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