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कैसे बढ़ाएं गेहूं उत्पादन, कार्यशाला में चर्चा

Karnal

Updated Sat, 06 Oct 2012 12:00 PM IST
करनाल। गेहूं अनुसंधान निदेशालय की ओर से उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्राें के अंतर्गत आने वाले राज्याें में गेहूं का उत्पादन बढ़ाने के लिए पूर्वनियोजित कार्यनीतियाें की एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, जम्मू एवं कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों के कृषि निदेशकों एवं राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के शोध निदेशकों ने बैठक में हिस्सा लिया। कृषि एवं सहकारिता सचिव आशीष बहुगुणा बतौर मुख्य अतिथि कार्यशाला में मौजूद रहे। आशीष बहुगुणा ने बताया कि उत्पादन को बढ़ाने के लिए फसलाें के अंतर पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक उत्पादन बढ़ाने के लिए चिंतित हैं, लेकिन भंडारा की कमी होने के कारण वैज्ञानिक क्वालिटी पर अधिक ध्यान देंगे। ताकि किसानों को मिलने वाली फसल बीमारी मुक्त हो। इसका लाभ किसानाें के साथ साथ उपभोक्ता को भी मिले।

रोगों को लेकर किए टिप्स
उन्होंने रोग प्रतिरोधी किस्मों, शून्य याकम जुताई और बालियों के बाहर निकलते समय प्रोपिकोनाजोल के छिड़काव से करनाल बंट मुक्त गेहूूं उत्पादन के लिए योजनाओें का अनावरण किया। बहूगुणा ने बताया कि वर्ष 2011-12 के दौरान हुए 93.9 मिलियन टन गेहूं के उत्पादन के लिए वैज्ञानिकों नीतिनिर्धारकों एवं किसानों के प्रयासों को सराहा और इस बात पर जोर दिया कि फसलाें की उपज में अंतर को पूरा करते हुए अगले दो वर्षों में उत्पादकता का स्तर और ऊंचा करने की आवश्यकता है। पीले रतुआ की बीमारी की रोकथाम के लिए विशेष ध्यान देते हुए कहा कि करनाल बंट बीमारी, भारत से निर्यात होने वाली गेहूं की प्रमुख समस्या है।
बहुगुणा ने स्वीकार किया कि मौसम की परिस्थितियां बदली हुई है, यदि शीत लहर लंबी चली तो गेहूं की फसल बंपर हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस बात की चिंता नही है कि उपज कितनी होगी। बल्कि चिंता इस बात की है कि किसान को सही दाम मिले और उनकी फसल सही हो।

गेहूं का रखरखाव वैज्ञानिक
केंद्रीय सचिव ने माना कि भंडारण की जिम्मेवारी अलग विभाग की रहती है। लेकिन जो गेहूं खरीदा जाए उसका वैज्ञानिक ढंग से रख-रखाव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जल्दी ही अन्न सुरक्षा बिल लाया जाएगा। इससे गेहूं के भंडारण और सुरक्षा में मदद मिलेगी। सरकार ने निर्यात खोल दिया है और जल्दी ही एफसीआई और खाद्य मंत्रालय एक नई स्कीम लागू करने जा रहा है। इसके तहत भंडारण और गेहूं के रख-रखाव में मदद मिलेगी।
इस मौके पर गेहूं अनुसंधान निदेशालय के निदेशक डा. इंदू शर्मा, डा. बीके शर्मा, डा. मुकेश खुल्लर, डा. एके सिंह, डा. जेपी मिश्रा समेत कई वैज्ञानिक और अधिकारी मौजूद थे।
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