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स्कूलों में दी जाए पुलिस हेल्पलाइन की जानकारी

Karnal

Updated Thu, 04 Oct 2012 12:00 PM IST
कुरुक्षेत्र। महिलाओं के साथ छेड़छाड़ जैसी घटनाएं निरंतर बढ़ती ही जा रहीं हैं। इस तरह की घटनाओं का विरोध नहीं होने के कारण छात्राओं में डर का माहौल बनता जा रहा है। इस तरह की घटनाओं का सामाजिक प्रतिष्ठा के चलते अभिभावक और महिलाएं आवाज नहीं उठा पातीं और निरंतर घटनाएं कम होने के बजाय बढ़ती ही जाती हैं। यदि हम स्वार्थी नहीं होकर, समाज की इन समस्याओं का समाधान निकालने की कोशिश करें, तो निश्चित रूप से इनमें बदलाव लाया जा सकता है।
तुरंत विरोध किया जाए
केयू में बतौर शिक्षक कार्यरत डा. सुषमा शर्मा ने कहा कि लड़कियों को एक्टिव होकर छेड़छाड़ जैसी घटना का विरोध करना चाहिए। यदि समाज चाहे तो इस तरह की घटनाओं को तुरंत रोका जा सकता है। हमें पता होना चाहिए कि इस तरह की घटना सीधे तौर पर किसी के मानवीय मूल्यों का हनन है। लड़कियों को भी अपनी संस्कृति की मान-मर्यादा में रहना चाहिए।

मन से निकालें डर
डीएवी स्कूल की छात्रा दिव्या ने बताया कि लड़कियों को लड़कों की अपेक्षा शारीरिक रूप से कमजोर होने का डर मन से निकाल देना चाहिए। ऐसे लोगों का डटकर विरोध करना चाहिए। जब तक विरोध नहीं होगा, तब तक महिलाओं के साथ ऐसे ही घटनाएं होंगी।

स्कूल प्रशासन मदद करे
डीएवी स्कूल की छात्रा वणिका ने कहा कि स्कूल प्रशासन को पुलिस हेल्पलाइन का नंबर सभी स्कूलों के बाहर लिखना चाहिए और छात्राओं को स्कूलों में भी अध्यापकों द्वारा भी पुलिस हेल्पलाइन नंबर की जानकारी देनी चाहिए, ताकि इस तरह की परिस्थितियों में लड़कियां अपना बचाव कर सकें।

परिवार को साथ देना चाहिए
डीएवी स्कूल की छात्रा आरजू ने बताया कि लड़कियों को सही हक के लिए विरोध करना चाहिए। परिवार को लड़कियों का साथ देना चाहिए तभी वे इस तरह की घटना होने पर विरोध कर सकेंगी।

आत्मरक्षा की ट्रेनिंग लें
आत्मरक्षा के गुर सीख रही डीएवी की छात्रा अंजिका ने कहा कि अपनी सुरक्षा करने के लिए लड़कियों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग लेनी चाहिए। वैसे तो लड़कियों को कमजोर समझा जाता है, लेकिन अब लड़कियां पुलिस और आर्मी में भी बढ़-चढ़कर भर्ती हो रही हैं, इसलिए साहस करने से ही वे इस तरह की गतिविधियों का विरोध कर सकेंगी।

कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए
डीएवी स्कूल की स्टूडेंट गरिमा के अनुसार परिवारवालों को लड़कियों का पालन-पोषण लड़कों की तरह करना चाहिए। किसी भी घटना का विरोध जाम लगाकर या कानून हाथ में लेकर नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे हमारे जैसे दूसरे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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