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केयू की किताब में 1986 तक जीवित रही इंदिरा गांधी

Karnal

Updated Thu, 04 Oct 2012 12:00 PM IST
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के दूरवर्ती शिक्षा निदेशालय द्वारा प्रिंट कराई गई एमए इतिहास की पाठ्य सामग्री में पिछले 9 वर्षों से भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को 1986 तक जीवित दिखाया जा रहा है। गलती सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है, निदेशालय की यह पाठ्य सामग्री संबंधित विषय के बजाय दूसरे विषय के विशेषज्ञ से चेक कराई गई है। इन खामियों की शिकायत करने पर दूरवर्ती विभाग इस साल से एमए का सिलेबस बदल रहा है। एनसीईआरटी की किताबों में छापे गए कार्टून और हाल ही में एक किताब में राष्ट्रीय गान को गलत छापे जाने वाले मामले को गुजरे कुछ ही समय बीता है। हालांकि हरियाणा की शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने भी इसे गंभीर गलती माना है। केयू दूरवर्ती शिक्षा निदेशालय की एमए इतिहास प्रथम वर्ष के नोट्स में देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को 1986 में जिंदा दिखाया गया है। हालांकि उनकी मृत्यु 31 अक्तूबर 1984 को हुई थी। एमए इतिहास प्रथम वर्ष के नोट्स में 20वीं सदी का इतिहास विषय पर ‘प्रगति का युग : रंगभेद महिलावाद’ में यह गलती की गई है। इन नोट्स को दूरवर्ती विश्वविद्यालय द्वारा पिछले 9 साल से पढ़ाया जा रहा है। इन नोट्स को कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के लेक्चरर डा. एसके चहल ने लिखा है और प्रोफेसर आरएस सांगवान द्वारा चेक किया गया है। ए-ग्रेड विश्वविद्यालय में इतने अनुभवी शिक्षक होने के बावजूद इस तरह की बड़ी गलती की गई और न तो इसका संज्ञान इतिहास विभाग के इन दोनों शिक्षकों ने लिया और न ही दूरवर्ती शिक्षा के निदेशक ने इसको ठीक किया। विद्यार्थी इसी तरह से गलत पढ़ रहे हैं। इस गलती का पता चलने पर 30 मार्च 2012 यूनिवर्सिटी कोर्ट में कुलपति डा. डीडीएस संधू के सामने जब यह मामला उठाया गया, तो उन्होंने जांच के आदेश दिए। इसकी जांच के लिए दूरवर्ती शिक्षा के निदेशक डा. रजनीश शर्मा को कहा गया, निदेशक ने इतिहास विभाग के डा. चतरसिंह को इसकी जांच करने के आदेश दिए। डा. चतरसिंह ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि गलती लेक्चरर द्वारा की गई है, कोई प्रिंटिंग में गलती नहीं हुई। जब कोई लेक्चरर नोट्स तैयार करता है तो उसे सीडी बनाकर साफ्ट कापी में विभाग को देनी होती है, जांच में पाया गया कि गलती सीडी में ही की गई थी और यह सीडी लेक्चरर ने स्वयं तैयार करके दूरवर्ती विभाग को दी थी। जांच पूरी हो जाने के बाद न तो दूरवर्ती विभाग ने लेक्चरर के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई और न ही कुलपति महोदय ने कोई आदेश दिए। दूरवर्ती विभाग तो सिर्फ यह कहकर अपना पल्ला झाड़ रहा है कि छोटा सी गलती थी, तो हमने इस साल सिलेबस ही बदल दिया है। इस साल जो विद्यार्थी एमए करेंगे, वे नए सिलेबस के अनुसार ही परीक्षाएं देंगे, लेकिन पिछले वर्ष कंपार्टमेंट आने वालों को पुराने सिलेबस के अनुसार ही परीक्षा देनी होगी। नियम के अनुसार संबंधित विषय के विशेषज्ञ लेक्चरर द्वारा दूरवर्ती शिक्षा के नोट्स लिखे जाते हैं और विशेषज्ञ प्रोफेसर ही उन्हें चेक करता है, लेकिन इन नोट्स को डा. एसके चहल ने तैयार किया, जो कि आधुनिक इतिहास के लेक्चरर हैं, इस तरह चेक भी आधुनिक इतिहास का विशेषज्ञ द्वारा किए जाने थे, जबकि प्रोफेसर आरएस सांगवान ने इन्हें चेक किया, जो कि मध्यकालीन इतिहास के विशेषज्ञ हैं। इस तरह नियमानुसार वे इन नोट्स को चेक नहीं कर सकते, लेकिन उन्होंने फिर भी चेक किया और इतने बड़े स्तर की गलती की।
मामूली सी ही गलती है
दूरवर्ती विभाग के निदेशक डा. आरके शर्मा ने कहा कि यह तो मामूली सी गलती है, जो इस बार पूरा सिलेबस बदलकर ठीक कर दी गई है। नोट्स को किसने चेक किया, ये सब कोर्स कोआर्डिनेटर का दायित्व है।

कोई छोटी गलती नहीं है
केयू कुलपति डीडीएस संधू ने कहा कि इस तरह ऐतिहासिक तथ्यों को हम नहीं बदल सकते, यह कोई छोटी गलती नहीं है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा गलती सुधार करते हुए एमए इतिहास का सिलेबस बदल दिया गया है।

सात माह बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
इतनी बड़ी गलती हो जाने के बाद शिकायत के 7 महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक दूरवर्ती शिक्षा निदेशालय और कुलपति द्वारा इसके लिए जिम्मेदार शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है।

मामले की जांच होगी
शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने कहा कि इस तरह की गलती बिल्कुल सही नहीं है। तुरंत प्रभाव से मैं इसकी जांच करवाऊंगी। इस तरह ऐतिहासिक तथ्यों को इतने बड़े स्तर पर हम गलत नहीं लिख सकते, जो भी इसमें दोषी होंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

ठीक कर दिया गया है
डा. एसके चहल ने कहा कि टाइपिंग के दौरान इस तरह की गलती की गई थी और विद्यार्थियों द्वारा सुझाव दिए जाने पर इसे ठीक कर दिया गया है।

तुरंत बदल देना चाहिए था
प्रोफेसर आरएस सांगवान ने गलती मानते हुए कहा कि दूरवर्ती शिक्षा निदेशालय को उसी साल इसे बदल देना चाहिए था।

लिखित शिकायत दी थी
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी कोर्ट के इलेक्टिड मेंबर अतुल यादव ने बताया कि उन्होंने 30 मार्च 2012 को केयू की कोर्ट मीटिंग में कुलपति को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन अभी तक उनके पास इस विषय पर यूनिवर्सिटी द्वारा कोई जानकारी नहीं दी गई है। नियम के अनुसार शिकायतकर्ता को संबधित विभाग द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी देना जरूरी है।
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1986 book indira gandhi

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