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छेड़छाड़ ही नहीं, समाज का रवैया भी चिंताजनक

Karnal

Updated Wed, 26 Sep 2012 12:00 PM IST
कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी में कई घटनाएं होने के बाद भी शहर और कस्बों के कालेजों और स्कूलों के बाहर मजनूं छाप और शरारती तत्वों पर कोई रोक नहीं लग पाई है। पुलिस की नाकामी के कारण केयू में लगातार होती छेड़छाड़ के कारण कई बार विरोध प्रदर्शन भी हो चुके हैं। आज हर क्षेत्र महिला समाज आगे हैं, लेकिन छेड़खानी और शोषण जैसी घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही। लड़कियां वर्तमान परिदृश्य में पुरुषों से किसी बात में कम नहीं है, देखा जाए तो हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। इस नारी सशक्तीकरण के दौर में महिलाएं भारत जैसे पुरुष प्रधान समाज में अपनी विशेष पहचान बनाने में सफल भी रही हैं। लड़कियों के साथ छेड़खानी जैसी घटनाएं अक्सर होती रहती हैं, जिसका विरोध कुछ ही साहसी लड़कियां दर्ज करा पाती हैं।
सोया समाज ही जिम्मेदार
पिहोवा वासी केयू के संगीत और नृत्य विभाग की छात्रा अनुराधा शर्मा ऐसी घटनाओं के पीछे सोए हुए समाज को जिम्मेदार मानती हैं। प्रतिदिन पिहोवा से केयू बस में अप डाउन करने वाली इस छात्रा का कहना है कि विरोध नहीं करने के पीछे भी अनेक कारण हैं। शिकायत करने पर पुलिस, परिवार और समाज का समर्थन नहीं के बराबर रहता है। कई मर्तबा छेड़छाड़ और शोषण का शिकार महिला वर्ग को ही इसके लिए जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है। इस छात्रा के मुताबिक छेड़खानी जैसी घटनाओं का विरोध कम ही लड़कियां कर पाती हैं, लेकिन वह उस तरह की लड़कियों में से नहीं है, वह अशिष्ट व्यवहार करने वाले को मुंह तोड़ जवाब देना जानती है। इन घटनाओं से यही सबक मिलता है कि जब तक खुद इनका विरोध नहीं करेंगे, तब तक समाज में महिलाओं का शोषण होता रहेगा। यदि लड़कियां निडर और स्वाभिमानी बने, तो ऐसे लोगों पर नकेल कसी जा सकती है।

डटकर विरोध करें
केयू के मनोविज्ञान विभाग की शोधार्थी वत्सला ने बताया कि समाज में छेड़छाड़ जैसी घटनाओं पर लड़किया बहुत कम विरोध दर्ज करवाती हैं। यदि कोई अकेला लड़का हरकत करता है, तो लड़कियां उसको सबक सिखा देती है, लेकिन टोली बनाकर फबतियां कसने वालों के खिलाफ विरोध करने से पीछे हट जाती है। ऐसे लोगों का डटकर विरोध करना चाहिए। बड़ी घटना हो जाने पर जाम लगाना और कानून तोड़ना मजबूरी में किया जाता है ताकि अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाई जा सके।

समाज को जागरूक करना होगा
केयू के मनोविज्ञान विभाग की छात्रा दीप्ति सिंह ने कहा कि आजकल लड़कियां पहले की अपेक्षा छेड़छाड़ जैसी घटनाओं का विरोध करने लगी है, यदि कोई गलत कहे, तो तुरंत उसे सबक सिखा सकती है। उनके अनुसार लड़कियों को स्वयं की रक्षा करनी चाहिए। इस समस्या के समाधान के लिए समाज में जागरूकता लानी चाहिए और कानून नहीं तोड़ना चाहिए।

सामाजिक ताना-बाना भी जिम्मेदार
केयू के संगीत और नृत्य विभाग की एमए की छात्रा श्वेता गांव हथीरा की रहने वाली है। गांव से होने के कारण उन्हें रोजाना बस से अप डाउन करके केयू पहुंचना होता है। श्वेता के मुताबिक लड़कियां वर्तमान दौर में आत्मविश्वासी और स्वावलंबी है। बावजूद इसके सामाजिक ताना-बाना भी छेड़छाड़ जैसी घटनाओं का जिम्मेदार है, क्योंकि इस कारण ही वे अपना विरोध दर्ज नहीं करवा पाती। ऐसी स्थिति में हमें शरारती तत्वों का डटकर मुकाबला करना होगा। प्रशासन को भी महिला पुलिस की व्यवस्था करनी चाहिए, जो लड़कियों की सहायता करें।

तुरंत विरोध किया जाना चाहिए
समाजसेवा कर रही गोवर्धन सेना की अध्यक्ष रेणुका चौधरी के अनुसार लड़कियों को तुरंत प्रभाव से विरोध दर्ज करवाना चाहिए। लड़कियों को ऐसी गलतफहमी है कि यदि हम आवाज उठाऐंगी, तो हमारी बेइज्जती होगी, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। जाम लगाने जैसी स्थिति पैदा करना ठीक नहीं है, इससे अन्य लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। विरोध दर्ज करवाने के ओर भी बहुत तरीके हैं।

छेड़खानी का विरोध जरूरी
केयू के संगीत और नृत्य विभाग की अध्यक्ष शकुंतला नागर ने कहा कि लड़कियों को छेड़खानी जैसी घटनाओं का विरोध करना चाहिए। समाज में लड़कियों और महिलाओं की स्थिति सुरक्षित नहीं है, तभी प्रतिदिन ऐसी घटनाएं होती हैं। अधिकतर लड़कियां बदनामी के डर से विरोध दर्ज नहीं करवाती, यदि समाज के असामाजिक तत्वों को तुरंत प्रभाव से सजा दी जाए, तो बहुत कम संख्या में ऐसी घटनाएं देखने को मिलेंगी। नागर के अनुसार लड़कियों में जवाब देने की हिम्मत होनी चाहिए।
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