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अब घर बनाना होगा और महंगा

Karnal

Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
कैथल। भविष्य में ईंटों का रेट महंगा हो सकता है। कोर्ट द्वारा जारी किए गए नियमों के बाद भट्ठा एसोसिएशन ने ईंट भट्ठों को चलाने में असमर्थता जाहिर कर दी है। इस कारण भट्ठों में ईंट उत्पादन बंद हो गया है। भट्ठा एसोसिएशन ने सरकार से कोर्ट के आदेशों के अनुसार कागजी कार्रवाई पूरी करने में सहायता की मांग की है। इस मसले को लेकर बुधवार को ईंट भट्ठा एसोसिएशन ने कोयल कांपलेक्स में बैठक भी की।
एसोसिएशन के अध्यक्ष रामप्रसाद बंसल, मुख्य सलाहकार सुमेर चंद जैन, उपाध्यक्ष जितेंद्र गोयल, महासचिव प्रेमचंद गर्ग, कोषाध्यक्ष कृष्ण कुमार खुरानिया, राजौंद जोन अध्यक्ष रामफल, किठाना जोन अध्यक्ष राजबीर चहल, कलायत जोन अध्यक्ष राकेश जैन, चीका जोन प्रधान रमेश जैन, पूंडरी से राजेंद्र बंसल, धर्मपाल राणा आदि ने बताया कि कोर्ट के आदेशों के बाद भट्ठा चलाने के लिए अब पर्यावरण और वन विभाग से एनओसी लेना आवश्यक होगा। ईंट भट्ठे लघु उद्योग की श्रेणी में आते हैं। अब ईंट भट्ठों को माईनिंग एक्ट में डाल दिया है। इस कारण दोनों एनओसी अनिवार्य हैं। ईंट भट्ठा संचालक जमीन से कुछ नहीं निकालते। भट्ठा संचालक केवल ऊंची जगह से अनाश्यक मिट्टी को उठाकर जमीन को समतल करते हैं ताकि वह उपजाऊ हो सके।
भट्ठा संचालकों को माईनिंग एक्ट में शामिल करने से दोनों ही विभागों से एनओसी लेने के चलते काफी दिक्कतें आएंगी। एसोसिएशन का कहना है कि दोनों ही विभागों से एनओसी लेना टेढ़ी खीर है। प्रतिबंधों के चलते वे भट्ठों का संचालन करने में असमर्थ हैं। मजबूरन ईंट भट्ठे बंद हो गए हैं।
सरकार से सहायता की उम्मीद
एसोसिएशन का कहना है कि अब सरकार से मांग की जाएगी कि दोनों ही विभागों से एनओसी दिलवाए जाने एवं भट्ठे संचालन में उनकी मदद की र्जाए। इंट भट्ठे बंद होने का सीधा असर गरीब और आम आदमी पर पड़ेगा। यदि भट्ठों में उत्पादन बंद होता है तो निश्चित तौर पर्र इंटों की कमी होगी और मांग बढ़ेगी। इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ेगा।
कीमतें बढ़ुेंगी
इस समय कैथल में 1000 एक नंबर की ईंटों की कीमत 3700 से 3800 रुपये तक है। यदि भट्ठे अधिक दिनों तक बंद रहे तो इनकी कीमतें बढ़ सकती हैं। यह जनता पर बोझ होगा, साथ में सरकार को भी विकास कार्यों के लिए अधिक धनराशि खर्च करनी पड़ेगी।
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