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72 हजार मीट्रिक टन के बनेंगे गोदाम

Karnal

Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
कैथल। गेहूं के भंडारण के लिए जगह की कमी से जूझ रही खरीद एजेंसियों को जिले में 72 हजार मीट्रिक टन खाद्यान्न भंडारण के लिए गोदाम बनाने की अनुमति मिली है। इससे जिले में न केवल किसानों बल्कि खरीद एजेंसियों को भी खाद्यान्न रख-रखाव में काफी सहायता मिलेगी। खाद्यान्न की गुणवत्ता भी बनाकर रखी जा सकेगी।
गोदाम न होने के कारण गेहूं एवं धान के सीजन में खरीद एजेंसियों के समक्ष भंडारण की एक बड़ी समस्या रहती है। भंडारण के लिए उचित जगह न मिलने के कारण खाद्यान्न को खुले में जमीन किराए पर लेकर भंडारण करना पड़ता है। इससे अनाज के खराब होने की ज्यादा संभावनाएं रहती हैं। जगह के अभाव एवं अधिकारियों के उपयुक्त निरीक्षण के अभाव में कलायत में डीएफएससी एवं कान्फेड का करोड़ों का गेहूं खराब हो चुका है। डीएफएएससी के गेहूं के मामले में तो केस भी दर्ज हो चुका है। कान्फेड के लिए अभी भी जांच चल रही है।
हैफेड को मिली मंजूरी
डीएम हैफेड वीपी मलिक ने बताया कि नए फैसले के तहत हैफेड को ढांड में 52000 मीट्रिक टन के गोदाम बनाने की मंजूरी मिली है। यह करीब 18 एकड़ में 25 करोड़ की लागत से एक साल में बनकर तैयार हो जाएगा। इससे पूर्व हैफेड द्वारा 30 करोड़ की लागत से कैथल में 60 हजार एमटी, कैलरम में 40 हजार एमटी के गोदाम भी बनाए जा रहे हैं। वर्तमान में हैफेड के पास 97 हजार एमटी कवर्ड एरिया में जबकि 80 हजार एमटी खुले में अनाज संरक्षित है। इन गोदामों के बनने के बाद हैफेड को खुले में गेहूं रखने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

एग्रो को 20 हजार की मंजूरी मिली
एग्रो के डीएम एलएम नरूला ने बताया कि जींद रोड स्थित एग्रो कार्यालय के निकट 20 हजार एमटी में गोदाम बनाए जाने की मंजूरी मिली है। लगभग 8 करोड़ रुपये की लागत से सात एकड़ में यह गोदाम बनेगा और 31 मार्च से पहले बनकर तैयार हो जाएगा।

किसानों को होगा फायदा
सीजन के समय मंडियों से गेहूं के उठान संबंधी समस्या रहती है। यदि खरीद एजेंसियों के पास उपयुक्त गोदाम होंगें, तो उन्हें भंडारण संबंधी समस्या नहीं आएगी। वे मंडियों से गेहूं उठाकर सीधा गोदामों में भंडारित कर सकेंगी। इससे मंडी में किसानों एवं आढ़तियों को लाभ मिलेगा। वर्तमान में गोदाम न होने के कारण एजेंसियों द्वारा किराए की जमीन पर बनाए गए प्लिंथ पर गेहूं भंडारित करना पड़ता है।
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