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अब आसानी से ढूंढे जा सकेंगे गुमशुदा

Karnal

Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
करनाल। राज्य में गुमशुदा होने वाले लोगाें को तलाशने का काम अब आसान होने की उम्मीद बढ़ गई है। इसके लिए राज्य अपराध रिकार्ड ब्यूरो की ओर से हरियाणा पुलिस समुचित केंद्र और सहायता केंद्र शुरू करने जा रही है। किसी भी व्यक्ति के लापता होेने की सूचना मिलने पर उसकी तलाश की दिशा में पुलिस का तंत्र तुरंत काम शुरू कर देगा। अब तक के हालात पर नजर डाली जाए तो आंकड़ों के मुताबिक राज्य में साल भर में करीब 3600 व्यक्ति गुम हो जाते हैं। इनमें से मात्र तीन हजार लोगों की लाश मिलती है। इसमें से करीब 600 लोगों के शवों की ही शिनाख्त हो पाती है। अन्य शवों का अंतिम संस्कार भी लावरिश के तौर पर कर दिया जाता है। निश्चित तौर पर सहायता केंद्रों का प्रयोग सही ढंग से किया गया तो संभवता गुमशुदा होने वाले काफी लोगों को अपने परिजनों तक पहुंचाने में मदद मिल सकेगी।
एक महीने में होते हैं 300 गुम
पुलिस रिकार्ड के आधार पर एक महीने में औसत करीब 300 लोग गुम हो जाते हैं। इनमें हर उम्र के व्यक्ति, बच्चे व महिलाएं शामिल होते हैं। गुमशुदा लोगों को तलाशने के लिए परिवार व पुलिस के प्रयास सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर लगाने और रिश्तेदारों में पता करने व सार्वजनिक स्थानों पर तलाशने के अलावा कोई रास्ता नहीं होता। वह लोग इस सूचना को पूरे प्रदेश तक नहीं पहुंचा सकते हैं। इसके लिए वह असमर्थ होते हैं। कुछ लोग अखबारों में विज्ञापन भी प्रकाशित करवाते हैं। अखबार ऐसे विज्ञापन को अपने सभी संस्करणों में प्रकाशित करने के बजाए स्थानीय स्तर पर ही रख लेता है। सभी संस्करणों में विज्ञापन प्रकाशित करवाना हर किसी व्यक्ति के बूते की बात नहीं होती।

पुलिस रपट लिख झाड़ लेती है पल्ला
हरियाणा का ही जिक्र करे तो हर महीने 300 के आसपास व्यक्ति गुम हो जाते हैं। करीब 250 लावारिस लाशें मिलती है, जिनमेें 50 के आसपास लाशों की ही शिनाख्त हो पाती है। गुमशुदा व्यक्तियों और लावारिस शवों की पहचान न होने का मुख्य कारण एक समुचित तंत्र का न होना। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड में सूचनाएं बड़ी देरी से जाती है। क्योंकि राज्य तथा पुलिस बलोें द्वारा इस कार्य को वरीयता नहीं दी जाती, जिससे यह कार्य ठीक तरीके से संपन्न नहीं हो पाता। जब कोई बच्चा, महिला या पुरुष गुम हो जाता है तो पीड़ित परिवार पहले अपने स्तर पर खोजबीन करता है। कोई सुराग न मिलने पर अपनी शिकायत दर्ज करवाता है और पुलिस रिपोर्ट लिख के हाथ झाड़ के बैठ जाती है। इस कमी पर गौर करते हुए राज्य अपराध रिकार्ड ब्यूरो एक समुचित केंद्र बनाने पर विचार कर रहा है।
लायक राम डबास, निदेशक
राज्य अपराध रिकार्ड ब्यूरो, मधुबन (करनाल)
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