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फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड एक्ट का विरोध

Karnal

Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
करनाल। नए फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड एक्ट के कानूनी प्रावधानों का शहर के तमाम व्यापारियों में विरोध है। शहर के व्यापारियों की माने तो इस नए कानूनी प्रावधान को अमल लाया गया, तो देश के करोड़ों छोटे दुकानदार बेरोजगार हो जाएंगे। यह कानून केवल और केवल कुछ पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए पारित किया जा रहा है। अन्यथा था आम गरीब लोगों के देश में इस कानून की आवश्यकता नहीं है।
व्यापारियों का तर्क है कि फूड सेफ्टी अधिनियम होना चाहिए, लेकिन स्टीक नहीं, थोड़ा लचीला होना चाहिए। फूड ग्रेन से संबंधित व्यापारियों की दो एसोसिएशन अपने-अपने सदस्यों की इस संबंध में बैठक आयोजित कर चुकी है। दोनों एसोसिएशन के अध्यक्षों के अनुसार यह कानून आम दुकानदार के खिलाफ है। उसे बेरोजगार करने की सरकार की साजिश है। बिहार सरकार की तरह हरियाणा सरकार को भी इस कानून को मानने से इंकार कर देना चाहिए।
बाक्स............
आम लोगों और दुकानदारों का विरोधी एक्ट
शहर के दुकानदारों में शामिल तिलक राज, प्रवीन कुमार, नरेश कुमार, अनिल कुमार समेत कई दुकानदारों ने कहा कि नया फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड एक्ट जो लाया जा रहा है, वह पूरी तरह आमजन और दुकानदारों के खिलाफ है। अधिनियम बनाने के समय दुकानदारों के पक्ष को कतई ध्यान में नहीं रखा गया है। इन दुकानदारों के अनुसार जो नियम बनाए गए हैं, वह तो देश का संभवता एक दुकानदार भी पूरे नहीं कर पाएंगे। सब कुछ शॉपिंग माल वाले बडे़ कारोबारियों के लिए किया जा रहा है। यह किसी हाल बर्दाश्त नहीं होगा।
वर्जन..........
छोटे दुकानदारों के खिलाफ एक्ट
यह अधिनियम निश्चित तौर पर आम लोगों और छोटे दुकानदारों के खिलाफ है। इस नियम में जो शर्त दर्शाई जा रही है, उससे साफ है कि वह कोई नहीं मान पाएंगे। नियमों की अनुपालना नहीं करने की सूरत में मामूली नहीं भारी भरकम जुर्माना और कई-कई साल की कैद की सजा करने तक के प्रावधान है। इस संबंध में वह अपनी एसोसिएशन की बैठक भी कर चुके हैं। यह नियम नहीं चाहिए। पूरा नियम बदल कर आम लोगों और दुकानदारों के हित में रख कर नया नियम बनाया जाना चाहिए। अन्यथा वह लोग इसका कड़ा विरोध करेंगे।
राजेश कौशिक, अध्यक्ष
करनाल, फूडग्रेन एसोसिएशन

सरकार राहत की बजाए नाक में दम
कोई भी सरकार लोगों को राहत देने के लिए बनाई जाती है। लोगों के नाक में दम करने और पूंजीपतियों को लाभ देने के लिए नहीं बनाई जाती। किसी भी पार्टी की सरकार आम लोग बनाते है। पूंजीपति चुनाव में वोट तक नहीं डालते। इसके बावजूद सरकार उन लोगाें के इशारे पर आम दुकानदारों और लोगों के हितों पर कुठाराघात करने में लगी है। दुकान के भीतर चूहा पाया गया तो चालान होगा। रेहड़ी ठेली तक में शिकंजा कसा गया है। खाद्य सामग्री से जुड़ी कोई दुकान देश में ऐसी नहीं होगी जहां चूहा नहीं मिलेगा। शॉपिंग माल तक में चूहे देखे जा सकते हैं। सरकार ने इस कानून को नहीं बदला तो बड़ा आंदोलन होगा। इसकी जिम्मेदार भी सरकार होगी।
नरेश गोयल, अध्यक्ष
फूड ग्रेन एसोसिएशन, करनाल

यह है नया फूड सेफ्टी एक्ट
खाद्य मिलावट रोकथाम कानून 1954 को समाप्त कर नए कानून फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड एक्ट 2006 होगा। यह कानून फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड एक्ट 2006 के नाम से जाना जाएगा। कानून 5 अगस्त 2011 से लागू हो गया है। इस कानून को केंद्रीय प्राधिकरण व राज्य के विभाग अमल में लाए रखने की जिम्मेदारी संभालेंगे। नए कानून में अधिकारियों के पास कई गुणा अधिक पावर दे दी गई है। रेहड़ी वालों पर शिकंजा कस डाला है। नियम के अनुसार 17 शर्त रेहड़ी वालों पर ही लागू होगी। सालाना शुल्क तक अधिक हो गया। लाइसेंस की शर्त तक कड़ी हो गई। कारावास और पेनल्टी भी कठोर हो गए हैं।
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