आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

...और आश्वासनों से जख्म भरता कहां है

Hisar

Updated Sun, 23 Dec 2012 05:31 AM IST
डबवाली (सिरसा)। मरहम लगाकर एक दिन, जख्म पुराना भरता कहां है, आंसुओं का क्या है रोज बहाए जाते हैं और दर्द मिटता कहां है। ऐसा ही कुछ पिछले 17 सालों से डबवाली में होता आ रहा है। अग्निकांड स्मारक पर हर वर्ष इस त्रासदी में मारे गए लोगों को मौन धारण कर श्रृद्धांजलि दी जाती है और सत्ता पक्ष और विपक्षी दल के नेता आश्वासनों का झुनझुना बजाकर चले जाते हैं लेकिन पीड़ितों का दर्द है कि घटना को याद कर बढ़ने लगता है। आज 23 दिसंबर को स्मारक स्थल पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर शहीदों को याद किया जाएगा।
23 दिसंबर 1995 को डबवाली के राजीव मैरिज पैलेस में डीएवी स्कूल के वार्षिक समारोह के दौरान आग लगने से 442 लोग मारे गए जबकि 150 लोग बुरी तरह से झुलस गए थे। जिनमें से 31 लोग ऐसे थे जिनका कोई न कोई अंग आग की भेंट चढ़ गया। विश्व की सबसे बड़ी त्रासदी डबवाली अग्निकांड स्थल पर फायर विक्टम की मांग पर स्मारक स्थल तो सरकार ने बना दिया लेकिन इसे आज तक न तो राज्य और न ही केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया है। जिस उद्देश्य के लिए इसका निर्माण किया गया था, वह सत्रह साल बाद भी पूरा नहीं हुआ है। यह स्मारक स्थल केवल ईंटों क ा ढांचा बनकर रह गया है। स्मारक स्थल का निर्माण इसलिए किया गया था, ताकि बाहर के लोग वहां आए। वे जाने की कि किन लापरवाहियों के चलते यह त्रासदी हुई और इस प्रकार की लापरवाही भविष्य में न हो।
अग्निकांड में सबसे ज्यादा 258 बच्चों की मौत हुई थी। बच्चों की स्मृति में अग्निकांड पीड़ितों की मांग पर सरकार ने स्मारक स्थल का निर्माण किया। स्मारक स्थल बनने के बाद बाल विकास विभाग ने बाल पुस्तकालय स्थापित किया। साल 2008-09 में स्मारक स्थल पर ई-लाईब्रेरी बनाने की घोषणा हुई लेकिन यह घोषणा आज तक सिरे नहीं चढ़ पाई है।
डबवाली फायर विक्टम एसोसिएशन के सदस्य विनोद बांसल ने बताया कि एसोसिएशन की मांग है कि इसे राजकीय स्मारक का दर्जा दिया जाए। नौकरी देने का वायदा सरकार ने किया था लेकिन इसे अमलीजामा नहीं पहनाया गया। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि हर वायदा पूरा कराने का आश्वासन देकर चले जाते है लेकिन वायदा पूरा नहीं होता। पिछले 17 सालों से पीडितों के जख्मों पर एक दिन मरहम लगाया जाता है जबकि जख्म भरता कहा है।

सर्वधर्म प्रार्थना सभा आज
डबवाली फायर विक्टम एसोसिएशन के प्रवक्ता विनोद बांसल ने बताया कि अग्निकांड स्मारक स्थल पर आज सर्वधर्म प्रार्थना सभा तथा श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया जाएगा। हवन यज्ञ होगा इसके बाद श्री अखंड पाठ तथा श्री रामायण पाठ के भोग डाले जाएंगे। बाद में रागी जत्था कीर्तन करेगा। दोपहर बाद दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की साध्वी सत्संग करेंगी। इसके बाद श्रद्धांजलियां दी जाएंगी जबकि ठीक 1.47 पर सामूहिक मौन रखा जाएगा।

कलम के सिपाही ने जान देकर बचाई थी अनेक बच्चों की जान
सत्रह साल बाद भी सरकार को दिखाई नहीं दिया पत्रकार अशोक वढेरा का शौर्य
डबवाली (सिरसा)। कुछ लोग ऐसे हुए हैं जो वक्त के सांचे में ढल गए और कुछ लोग ऐसे हुए जिन्होंने वक्त के सांचे ही बदल दिए......। ऐसे लोगों में थे पत्रकार अशोक वढेरा। जो राजीव मैरिज पैलेस में डीएवी स्कूल के कार्यक्रम में लगी आग में से बच्चों को बाहर निकालते हुए शहीद हो गए।
शहीद अशोक वढेरा के बड़े भाई विजय वढेरा के अनुसार 23 दिसंबर 1995 को उनके परिवार के सात सदस्य डीएवी स्कूल का कार्यक्रम देखने के लिए राजीव मैरिज पैलेस में गए थे। मौकेे पर पहुंचे तो चारों ओर लाशों के ढेर लगे थे। घटना स्थल से बेटी पारूल तथा बहन कविता का शव मिला। जिसकी मौत भगदड़ के दौरान कुचले जाने से हुई थी जबकि भाई अशोक वढेरा नहीं मिले। उन्हें ढूंढते हुए परिजन सरकारी अस्पताल में पहुंचे। बाद में सरकारी अस्पताल के शवगृह में अंगूठी के जरिए उनकी पहचान हुई।

सुरक्षित बाहर निकल आए थे अशोक
विजय वढेरा के अनुसार आग लगने के बाद समारोह में भगदड़ मच गई। लोगों को शांत करने के लिए अशोक मंच पर चढ गया लेकिन अपनी जान की रक्षा करने के लिए अनियंत्रित हुई भीड़ ने उनकी एक न सुनी। इस बीच उन्होंने कार्यक्रम के लिए तैयार खड़े नन्हें-मुन्नें बच्चों को बाहर निकालने का काम शुरू कर दिया। वे भी कई बार सुरक्षित बाहर निकले लेकिन अपनी जान की परवाह किए बगैर बच्चों को बाहर निकालते रहे। करीब दो दर्जन से अधिक बच्चों को उन्होंने सुरक्षित बचा लिया। उस समय अशोक वढेरा पत्रकार यूनियन के जिला अध्यक्ष थे। मृत्यु उपरांत उन्हें राष्ट्रीय युवा पुरस्कार मिला। पुरस्कार के अलावा सरकार ने उनकी याद में कोई कार्य नहीं किया। संजय ग्रोवर तथा अशोक वढेरा दोनों गहरे मित्र थे। दोनों ने अपने प्राण न्यौछावर कर करीब 50 बच्चों को जिंदगी दी। लेकिन सरकार को आज तक उनका शौर्य दिखाई नहीं दिया।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

B'Day Spl: 13 साल छोटी कोरियोग्राफर से प्यार में पड़े थे संजय लीला भंसाली लेकिन आज भी हैं कुंवारे

  • शुक्रवार, 24 फरवरी 2017
  • +

कपल्स को देखकर ये सोचती हैं सिंगल लड़कियां!

  • गुरुवार, 23 फरवरी 2017
  • +

नौकरी के बीच में ही कपल्स को मिल सकेगा 'सेक्स ब्रेक'

  • गुरुवार, 23 फरवरी 2017
  • +

सुपरस्टारों के ये बच्चे भी बिन तैयारी हुए लॉन्च, हो गए फ्लॉप

  • गुरुवार, 23 फरवरी 2017
  • +

बदन से आती है दुर्गंध ? खाने की प्लेट से हटा दें ये चीजें

  • गुरुवार, 23 फरवरी 2017
  • +

Most Read

भड़काऊ भाषण ने खड़ा किया मुसीबतों का पहाड़, पीएम मोदी के सामने आई नई मुश्किल

pm accused of making inflammatory speeches at rally
  • गुरुवार, 23 फरवरी 2017
  • +

खुशखबरी : 15 अप्रैल से यहां हाेगी सेना रैली भर्ती, 13 जिलाें के अभ्यर्थी अभी करें अावेदन

sena bharti rally in kanpur
  • बुधवार, 22 फरवरी 2017
  • +

यूपी चुनाव 2017 : एक गांव में एक वोट पड़ा दूसरे में एक भी नहीं, कारण जानकर रह जाएंगे हैरान

vilagers  voting boycott in kanpur
  • रविवार, 19 फरवरी 2017
  • +

पुलिस अंकल जबरदस्ती करते रहे और मैं चिल्लाती रही

mai chilaati rahi
  • बुधवार, 22 फरवरी 2017
  • +

वाेटिंग में पांच लाख इनामी डाकू बबुली काेल का खाैफ, पुलिस, पीएसी ने की घेरेबंदी

daku babuli kol affects up election 2017
  • गुरुवार, 23 फरवरी 2017
  • +

पत्नी की हत्या का आरोपी अमनमणि समेत सात सपा से निष्कासित

Amanmani tripathi expelled from SP.
  • गुरुवार, 23 फरवरी 2017
  • +
TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top