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10 दिनाें से जिदंगी के लिए लड़ रही है नन्हीं सी जान

Hisar

Updated Thu, 20 Dec 2012 05:31 AM IST
फतेहाबाद। फतेहाबाद की सुमन ने आज से दस दिन पहले एक नन्हीं सी जान को जन्म दिया। जिसका वजन मात्र 740 ग्राम था। आमतौर पर बच्चे का जन्म 9 माह के उपरांत होता है और उसका वजन अढ़ाई से तीन किलो तक होता है। मगर इस बच्चे ने मात्र 6 माह के बाद ही मां के गर्भ से जन्म ले लिया। जन्म से ही बच्चे को सांस की ज्यादा तकलीफ थी और उसके बचने की उम्मीद नहीं के बराबर थी। बच्चे के अभिभावकाें ने उसे फतेहाबाद के मॉडल टाऊन में स्थित समीर बच्चाें का अस्पताल की नर्सरी में लाकर दाखिल करवाया।
बाल रोग विशेषज्ञ डा.समीर टूटेजा ने बताया कि समय से पूर्व जन्म लेने के कारण बच्चे के अंग पूरी तरह से विकसित नहीं थे। बच्चे के फेफड़े, पेट की आंते, जिगर, गुर्दे इत्यादि अंग काफी कमजोर थे। फेफड़े कमजोर होने के कारण बच्चे को जन्म से ही सांस लेने में काफी तकलीफ थी। जिसके लिए उसे कृत्रिम सांस की मशीन वेन्टीलेटर(ङ्कद्गठ्ठह्लद्बह्लड्डह्लशह्म्) पर रखा गया। बच्चे की पेट की आंतें कमजोर होने के कारण बच्चा दूध नहीं पचा सका और उसे नेक (हृद्गष्ह्म्शह्लद्बह्यद्बठ्ठद्द श्वठ्ठह्लद्गह्म्शष्शद्यद्बह्लद्बह्य) की बीमारी हो गई। नेक के ईलाज के लिए बच्चे को टीपीएन (ञ्जशह्लड्डद्य क्कड्डह्म्द्गठ्ठह्लद्गह्म्ड्डद्य हृह्वह्लह्म्द्बह्लद्बशठ्ठ) पर रखा गया। जिसके लिए उसे सैंट्रल लाईन डाली गई। इसके पश्चात बच्चे का लीवर कमजोर होने के कारण उसे पीलिया हो गया जिसका ईलाज फोटोथैरेपी से किया गया। जब बच्चा एक सप्ताह का हुआ तो उसने बीच-बीच में सांस रोकनी शुरू कर दी जिसे हम अपनिया (भनश्चठ्ठद्गड्ड) की बीमारी कहते है। अपनिया के इलाज के लिए सांस लेने के इंजेक्शन शुरू किये। जिसके परिणामस्वरूप उसकी यह समस्या दूर हुई। इतनी यातनाएं सहती हुई यह नन्हीं सी जान जिंदगी के लिए लड़ रही है।
एमडी गोल्डमेडलिस्ट डा.समीर टूटेजा ने बताया कि अगर जन्म पर किसी बच्चे का वजन एक किलो से कम होता है तो उसे हम ईएलबीडब्ल्यू बेबी (श्व3ह्लह्म्द्गद्वद्गद्य4 रुश2 क्चद्बह्म्ह्लद्ध 2द्गद्बद्दद्धह्ल क्चड्डड्ढ4) कहते है। आमतौर पर यह बच्चे छह मास व सात मास में प्री मैच्योर होते है। इन कम वजनी बच्चाें का इलाज काफी चुनौतीपूर्ण होता है। इन बच्चाें के इलाज में वेन्टीलेटर, सरफैक्टेंट, सीपीएपी, टीपीएन, सेंट्रल लाइन, इनफ्यूजन पंप, फोटोथैरेपी इत्यादि आधुनिक उपकरणों की आवश्यकता होती है।
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