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नींबू प्रजाति के पौधों पर किए अनुभव सांझा

Hisar

Updated Tue, 30 Oct 2012 12:00 PM IST
डबवाली (सिरसा)। इंडो-इजरायल प्रोजेक्ट के तहत गांव मांगेआना में फलों के लिए स्थापित किए गए उत्कृष्टता केंद्र में सोमवार को इजरायल तथा भारतीय कृषि वैज्ञानिकों की नींबू प्रजाति पर दो दिवसीय विचार गोष्ठी शुरू हुई। जिसमें देश के विभिन्न राज्याें से आए प्रतिनिधियों ने नींबू प्रजाति की बिजाई में इजराइली तकनीक और प्रौद्योगिकी बारे अपने ज्ञान और अनुभव सांझे किए। जिनमें आधुनिक नर्सरी प्रक्रियाएं, पौध तैयार करना, छंटाई व नया आकार देना और पौधे के बीज का सही अंतराल बनाए रखना शामिल हैं।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए इजरायली विशेषज्ञ डुबी राबेर ने प्रतिभागियों को मांगेआना केन्द्र में बिजाई की गई विश्व प्रसिद्घ इजराइल किस्मों जैसे कि ‘जैफा’ संतरा, ‘मीकल’ इज़ी पीलर, देर से कटाई की जाने वाली ‘वालेंसिया’ और जल्दी कटाई की जाने वाली ‘नेवाली’ संतरों की किस्मों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नींबू प्रजातियों की फलों की किस्मों से भारत में फसलों की विविधता की भी संभावना है तथा भारत में संतरा कटाई अक्तूबर से मई तक बढ़ने की प्रबल संभावनाएं हैं। इंडो इजराइल नींबू प्रजाति कलस्टर के अध्यक्ष तथा नागपुर कृषि विश्वविद्यालय के बागवानी महाविद्यालय के प्रो. डा. देवानंद पंचभाई, कृषि बागवानी हरियाणा के अतिरिक्त निदेशक, डा. अर्जुन सिंह सैनी ने भी विचार व्यक्त किए। भारत में इजराइल दूतावास नई दिल्ली के कृषि काउंसलर यूरी रुबिनस्टेन जो स्वयं संतरा उत्पादक है ने बताया कि भारत के साथ कृषि क्षेत्र में सहयोग के लिए किए गए इंडो-इजराइल समझौते के तहत भारत के अन्य राज्यों के साथ इसे बढ़ाने की अच्छी शुरुआत है। इस अवसर पर पंजाब से कृषि वैज्ञानिक डा. बलविंद्र सिंह, राजस्थान से डा. तनब चौधरी, सिरसा, फतेहाबाद, गुड़गांव, हिसार, भिवानी, रेवाड़ी, जींद के उद्यान अधिकारी उपस्थित थे।
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वातावरण के प्रति सचेत है सरकार:यूरी
इजराइल दूतावास नई दिल्ली के कृषि कांऊसलर यूरी रुबिनस्टेन ने कहा कि इंडो-इजरायल प्रोजेक्ट के बेहतरीन परिणाम सामने आने लगे हैं। गांव मांगेआना में स्थापित फलों का उत्कृष्टता केंद्र इसका परिणाम है। उन्होंने कहा कि हरियाणा तथा पंजाब में किसान सीमा से अधिक पेस्टीसाइड प्रयोग करते हैं। इजरायल के प्रत्येक किसान का रजिस्ट्रेशन होता है। उत्पादित किए गए प्रॉडक्ट की मार्केट निर्धारित हैं। इसके साथ-साथ वहां कुछ समय के अंतराल में खेतों में जाकर उत्पादों की सैंपलिंग की जाती है। वातावरण को दूषित होने से बचाने के लिए सरकार ने उपरोक्त नियम बनाए हुए हैं।
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नींबू उत्पादन में चौथे नंबर पर है भारत
इंडो-इजरायल नींबू प्रजाति कलस्टर के अध्यक्ष प्रो. डा. देवानंद पंचभाई ने कहा नींबू प्रजाति के फलों के उत्पादन में इजरायल, ब्राजील, स्पेन के बाद भारत चौथे नंबर पर है। भारत में उपरोक्त प्रजाति के फलों का उत्पादन प्रति हेक्टयेर नौ टन है जबकि इजरायल में प्रति हेक्टेयर 35 टन है। उन्हाेंने बताया कि इजरायली अपनी तकनीक के जरिए सितंबर से मई तक 4-5 किस्मों का फल प्राप्त कर लेते हैं जबकि भारत में दिसंबर से फरवरी तक ही सीजन होता है। उनके अनुसार भारतीय तकनीक से उत्पादित किए गए पौधों को काफी बीमारियां होती हैं। जिसके चलते पौधे गलने की शिकायतें काफी हैं। इनको दूर करने के लिए इजरायली तकनीक सबसे कारगर साबित हो सकती है।
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