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बेपर्दा की गईं बसें, फिल्म भी उतारी

Gurgaon

Updated Thu, 20 Dec 2012 05:30 AM IST
गुड़गांव। भविष्य में यहां भी दिल्ली जैसी घटना न हो, इसके लिए पुलिस ने बुधवार से विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत शहर की सड़कों पर दौड़ रही बसों में लगे पर्दे हटाए गए। साथ ही खिड़की के शीशे से फिल्म भी उतरवाई गई।
पहले चरण में ह्वाइट लाइन की बसों की जांच शुरू हुई है। बाद में सभी वाहनों को जांच अभियान में शामिल किया जाएगा। डीसीपी क्राइम महेश्वर दयाल ने बताया कि दिल्ली की घटना ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर पुनर्विचार को मजबूर किया है। लिहाजा सुरक्षा की दृष्टि से यह कदम उठाया जा रहा है। उम्मीद है कि इससे भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने में मदद मिलेगी। उन्होेंने कहा कि शहर की सड़कों पर दौड़ने वाले किसी भी वाहन में आगे से पर्दा लगाने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही वाहनों के शीशे पर रंगीन फिल्म को भी पूरी तरह निषेध कर दिया गया है।
ट्रांसपोर्टरों को जारी किया सर्कुलर
महेश्वर दयाल ने कहा कि इसके लिए सभी ट्रांसपोर्टरों को एक सर्कुलर जारी किया गया है। नए नियमों की जानकारी देकर उनसे सहयोग मांगा गया है। एक-दो दिन में सभी ट्रांसपोर्टरों के साथ बैठक कर पर्दा और फिल्म हटाने में मदद मांगी जाएगी। इसके बाद किसी ट्रांसपोर्टर के वाहन में पर्दा या रंगीन फिल्म मिलती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
रात में चलेगा तलाशी अभियान
पुलिस रात में शहर की सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों की गहन जांच का अभियान चलाएगी। प्रमुख चौक-चौराहों के अलावा सुनसान क्षेत्र में विशेष टीमें नियुक्त की जाएंगी। सभी प्रकार के वाहनों की तलाशी ली जाएगी। वाहन चालकों को अभियान में मदद देनी होगी। किसी को भी बेवजह परेशान नहीं किया जाएगा।
स्कूल बसों से भी हटेंगे पर्दे
स्कूल बसें भी इस जांच में शामिल होंगी। बड़े और नामचीन स्कूल की बसों में रंगीन फिल्म और पर्दे लगे रहते हैं। स्कूल प्रबंधन से इन्हें हटाने को कहा गया है। नया आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

बलात्कार के विरोध में छात्राओं का प्रदर्शन
राजकीय महिला महाविद्यालय की छात्राओं में दिखा रोष
अमर उजाला ब्यूरो
गुड़गांव। दिल्ली बलात्कार कांड के खिलाफ यहां के लोगों में भी उबाल है। बुधवार को सेक्टर-14 स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय की छात्राओं ने इसके विरोध में प्रदर्शन किया। एबीवीपी ने भी प्रदर्शन में भाग लिया।
छात्राओं ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए कानून हाथ में लेना पड़ेगा। राजकीय महिला महाविद्यालय परिसर में छात्राओं ने बलात्कार की शिकार युवती के प्रति संवेदना व्यक्त की। इसके बाद बलात्कार के आरोपियों को तुरंत फांसी पर लटकाने की मांग को लेकर नारेबाजी की। सभी का कहना था कि देश की राजधानी में कानून व्यवस्था बिगड़ चुकी हैै। दरिंदों का मनोबल बढ़ रहा है। प्रतिदिन इस प्रकार की शर्मनाक घटनाएं हो रही हैं। पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है।

गुस्से में हैं छात्राएं
लड़कियों को कानूनी रूप से कहीं भी आने-जाने का हक है। जो लोग यह कहते हैं कि लड़कियों को शाम होते ही घर से नहीं निकलना चाहिए, उनसे यह सवाल है कि आखिर क्यों?
-संगीता

बलात्कार के दोषियों को बिना देरी फांसी पर लटका देना चाहिए।
-सपना

ऐसे दरिंदों को फांसी दे देनी चाहिए। महिलाएं घराें से निकलते समय डरी सहमी रहती हैं।
- ग्रीष्मा

बलात्कार के मामले की सुनवाई के लिए अगल कोर्ट बनाना चाहिए। इससे न्याय मिलने में देरी नहीं होगी।
-संगीता कुमारी
सिरफिरा आशिक को पुलिस के हवाले किया
प्रवीण कुमार
गुड़गांव। एक महिला ने साहस दिखाते हुए एक सिरफिरे आशिक को ऐसा सबक सिखाया कि अब शायद ही किसी को परेशान कर पाए। आरोपी युवक महिला और उसकी बेटी को अक्सर फोन पर परेशान करता था। बुधवार को महिला ने सूझबूझ दिखाते हुए उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। जिला अदालत में पेशी के बाद वह जमानत पर छूट गया है।
मामला शहर की ज्योति पार्क कॉलोनी का है। पूजा पत्नी अविनाश ने यहां किराए पर रहने वाले मूल रूप से उत्तर प्रदेश के एक युवक को दबोच कर पुलिस के हवाले कर दिया। जांच अधिकारी रविशंकर ने बताया कि वह पिछले कई दिनों से महिला और उसकी बेटी को फोन पर परेशान करता था। बुधवार को भी उसका फोन आया तो महिला ने उसे बहाने से घर बुला लिया। उसके घर में प्रवेश करते ही मां-बेटी ने उसे दबोच लिया। पहले तो उसकी पिटाई की, फिर कमरे में बंद कर पुलिस को सूचना दी। मौके पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अदालत में पेश करने के बाद उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया।
साहस की सराहना

महिला ने जिस प्रकार साहस से काम लिया वह काबिलेतारीफ है। संकोच और झिझक छोड़कर ऐसे लोगों को सबक सिखाया जाना चाहिए। उसका यह प्रयास दूसरी महिलाओं को प्रेरणा देगा।
- अनिल कुमार राव, पुलिस के संयुक्त आयुक्त

महिलाओं को स्वयं जागरूक होना होगा। पुलिस हर आदमी को घर में सुरक्षा मुहैया नहीं करा सकती है। इस लिए महिलाओं को संकोच छोड़ना चाहिए।
-मीनू सिंह, अध्यक्ष, सेक्टर तीन, पांच और छह आरडब्ल्यूए
निजी स्कूल की बसों में कायदे-कानून ताक पर
पीले रंग का पालन नहीं करते स्कूल
अमर उजाला ब्यूरो
गुड़गांव। निजी स्कूल की बसें नियमों को ताक पर रख कर चलती हैं। खासकर नामचीन स्कूलों को कायदे-कानून की परवाह नहीं है। यहां निजी स्कूलों की तकरीबन पांच हजार बसें सड़कों पर दौड़ती हैं। इनमें सेक्टर-14 स्थित एक नामचीन स्कूल सहित कई ने सफेद रंग की खटारा बसें लगा रखी हैं।
जिला प्रशासन ने कुछ दिनों पहले ही स्कूलों को सिर्फ पीले रंग बसें चलाने को कहा था। साथ ही इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के पालन की हिदायत भी दी गई थी। इसके बावजूद शहर के बड़े स्कूलों पर इसका असर होता नहीं दिख रहा है। सड़कों पर धड़ल्ले से कई रंगों की बसें दौड़ती हैं। आरोप है कि बसों के चालकों-परिचालकों का वेरिफिकेशन भी नहीं किया जाता है। कुछ बड़े स्कूलों ने सफेद रंग की खटारा बसें लगा रखी हैं, जबकि एक नामचीन स्कूल खुद को अलग दिखने की चाह में बसों को कई रंगों में रंगा रखा है। सफेद बसें स्कूल के समय में बच्चे और बाकी समय सवारी ढोने में लगी रहती हैं। कई बसों की खिड़कियों मेें काले रंग के शीशे भी लगे हैं। इन पर पर्दा भी डला होता है।
गाइडलाइन
- बसों का रंग पीला होना चाहिए
-खास आकार में बसों के आगे और पीछे स्कूल बस लिखा होना जरूरी
-निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं बैठाया जाना चाहिए
-सभी बसों में फर्स्ट एड बॉक्स अनिवार्य
-आग बुझाने वाला उपकरण भी आवश्यक
-बस की खिड़कियों पर ग्रिल जरूरी
-बस पर स्कूल का नाम और फोन नंबर अंकित होना अनिवार्य
-बसों के दरवाजे लॉक होना चाहिए
-चालक का ट्रेंड होना जरूरी
-यातायात नियमों का पता होना चाहिए
-हर स्कूल बस में एक सहायक अनिवार्य
-सीटों के नीचे स्कूल बैग रखने की व्यवस्था
-स्कूल बस या वाहन के पास वैध परमिट जरूरी
-बस और वाहनों का वार्षिक फिटनेस सर्टिफिकेट भी जरूरी
-बस चालक और परिचालक यूनिफार्म में हों
-लाइसेंस नंबर व फोटो पहचानपत्र डिस्प्ले होना अनिवार्य
-चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस हो
-स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर अनिवार्य
-बस के सामने बोर्ड पर स्कूल, रूट और समय अंकित होना जरूरी
-बस किराये की हो तो उस पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा आवश्यक

प्रशासन की ओर से स्कूलों पर सख्ती की जा रही है। नियमों के पालन के लिए दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं। किन स्कूलों ने इसका पालन नहीं किया है, उसकी जांच शुरू हो गई है। गलती मिलने पर लापरवाह स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-पीसी मीणा, उपायुक्त

स्कूल बसों के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार चलेगा। जो स्कूल बस गाइडलाइन का पालन नहीं करेंगे, उसे जब्त कर लिया जाएगा।
- महेश्वर दयाल, डीसीपी ट्रैफिक
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