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ट्रेनें गुजरती तो हैं पर ठहरती नहीं

Gurgaon

Updated Mon, 17 Dec 2012 05:30 AM IST
गुड़गांव। दिल्ली से गुड़गांव होकर गुजर रही रेलवे लाइन कई मायनों में महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद यहां कई ट्रेनों का ठहराव नहीं है। हालांकि कई बार सामाजिक और दूसरे संगठनों के साथ रेलवे अधिकारियों ने भी यहां खास ट्रेनों के ठहराव की मांग की है, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यह रेलमार्ग दिल्ली से गुड़गांव के रास्ते पीतल नगरी रेवाड़ी से जयपुर होकर मुंबई तक जाता है। देश का आधे से अधिक हिस्सा इस रेलवे लाइन से जुड़ता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि देश के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्से में पहुंचने के लिए यह सबसे छोटा रेल मार्ग है। इस लाइन पर विद्यार्थियों के साथ व्यापारी और दूसरे तबके के लोग सफर करते हैं।
गुड़गांव से होकर गुजर रहा यह रेलमार्ग पर्यटन के अलावा व्यापारिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इस लाइन पर देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के अलावा व्यापारिक केंद्र और धार्मिक स्थल भी हैं। दक्षिणी-पश्चिमी क्षेत्र से उत्तर भारत के धार्मिक और पर्यटन स्थलों की ओर आने वाले यात्रियों के साथ उत्तर भारत से दक्षिण-पश्चिम में जाने वाले लोग इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं।
शहर और उनकी खासियत
इस मार्ग पर गुड़गांव के बाद पीतल नगरी रेवाड़ी, अलवर, प्रमुख पर्यटन केंद्र जयपुर, तकनीकी एजुकेशन हब कोटा, जोधपुर, अजमेर, उदयपुर, बीकानेर, अहमदाबाद, सूरत, भरुच और मुंबई जैसे शहर हैं। उत्तर की ओर चंडीगढ़ और जम्मू जैसे शहर हैं।

स्टेशन से गुजरने वाली प्रमुख ट्रेनें

शताब्दी एक्सप्रेस- दिल्ली से अजमेर
राजधानी एक्सप्रेस-दिल्ली से अहमदाबाद
दुरंतो एक्सप्रेस-निजामुद्दीन से अजमेर
राजस्थान क्रांति एक्सप्रेस-सराय रोहिल्ला से जोधपुर
बीकानेर इंटर सिटी- सराय रोहिल्ला से बीकानेर
अजमेर-हरिद्वार एक्सप्रेस-अजमेर से हरिद्वार
पूजा एक्सप्रेस-जम्मू से जयपुर
आश्रम एक्सप्रेस-दिल्ली से अजमेर
(इनमें से पूजा और आश्रम के अलावा केवल शताब्दी का ही ठहराव है। बाकी ट्रेनें यहां नहीं रुकतीं। ट्रेनें यहां से दिन में 35 फेरे लगाती हैं)

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इस रूट पर दैनिक यात्री ही नहीं, कभी-कभार सफर करने वाले लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है। कई प्रमुख ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से कुछ रूटों के लिए आगे जाकर ट्रेन बदलनी पड़ती है।
-शीशपाल, कोसली निवासी

गुड़गांव आज विश्व मानचित्र पर अपनी पहचान कायम कर रहा है। ऐसे में यहां रेलवे की ओर से दी जा रही सुविधाएं कतई पर्याप्त नहीं हैं। देश के हर कोने का आदमी यहां रहता है।
-दिलबाग सिंह, निवासी बसई

कोटा एजुकेशन का हब है। यहां से बड़ी संख्या में युवा अपना कैरियर बनाने के मकसद से जाते हैं। रेलवे की अपर्याप्त व्यवस्थाओं के कारण परेशानियां होती हैं।
-संदीप नेहरा, जटौला निवासी

विकास की दृष्टि से देखें तो गुड़गांव में ऐसी सुविधाएं नहीं हैं जो एक मेट्रोपॉलिटन सिटी में होनी चाहिए। रेलवे की ओर से सुविधाएं बढ़ानी चाहिए।
-रविंद्र कुमार, निवासी खलीलपुर

गुड़गांव दिल्ली और मुंबई के बीच का केंद्र है। कई शहरों को जोड़ने वाला यह सबसे छोटा रास्ता है। इस रूट पर यात्रियों की जरूरतों और संख्या के हिसाब से ट्रेनों की संख्या नहीं है।
-धीरज, निवासी खलीलपुर

गुड़गांव ऐसा शहर है जो दक्षिण और पश्चिम को देश की राजधानी के अलावा उत्तर और उत्तरी पूर्व हिस्से से जोड़ता है। यहां भ्रमण और और दूसरे कार्यों के लिए जाने वाले यात्रियों को सुविधाएं देनी चाहिए।
-शेखर, निवासी रेवाड़ी

रेलवे की ओर से यहां दी जा रही सुविधाएं ऊंट के मुंह में जीरा के समान हैं। यहां से हर वर्ग और तबके का आदमी देश के दूसरे हिस्सों में जाता है। उस लिहाज से सुविधाएं नहीं हैं।
-सत्येंद्र सिंह, निवासी इंछापुरी

इस लाइन पर ट्रेनों की संख्या पर्याप्त नहीं कही जा सकती है। रेलवे के आंकड़े के मुताबिक प्रतिदिन करीब सवा लाख यात्री इस लाइन पर सफर करते हैं। यात्रियों की संख्या के हिसाब से ही देखें तो कमी अपने आप नजर आ जाएगी।
-संदीप कुमार, निवासी रेवाड़ी
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