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दिल्ली रेवाड़ी रूट : साधन कम, सवारी ज्यादा

Gurgaon

Updated Sun, 16 Dec 2012 05:30 AM IST
गुड़गांव। दिल्ली-रेवाड़ी रेलवे रूट का सफर मुश्किल भरा होता है। ट्रेनों की संख्या कम होने से दैनिक यात्रियों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है। इस रूट पर प्रतिदिन करीब 70 हजार यात्री सफर करते हैं। इनका भार महज दस ट्रेनों पर ही है। इनमें भी आए दिन बोगियों की संख्या कम हो जाती है। इसके चलते यात्री खिड़कियों के साथ ही छतों पर भी सफर करते नजर आते हैं।
दो दर्जन के करीब स्टेशनों वाले इस दिल्ली-रेवाड़ी रूट पर यात्रियों की तादाद काफी होती है। पटौदी तक पहुंचते-पहुंचते ट्रेन में पैर रखने तक की जगह नहीं होती है। जितने यात्री गुड़गांव स्टेशन पर उतरते हैं, उससे अधिक दिल्ली जाने वाले यात्री ट्रेन में सवार होते हैं। खासकर सुबह सात से लेकर दस बजे और शाम को चार से लेकर सात बजे तक सफर तो पूरी तरह खतरों से भरा है।

मुसाफिरों की मुश्किलें
पिछले तीन साल से प्रतिदिन गुड़गांव आ रहा हूं। कभी-कभार ही सीट पर बैठने की जगह मिलती है। पातली स्टेशन तक पहुंचते-पहुंचते बुरा हाल हो जाता है। अंदर घुसने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। अंदर घुस गए तो ठीक अन्यथा बाहर लटकर या छत पर बैठकर ही सफर करना पड़ता है।
पवन कुमार, निवासी बावड़ा

दरअसल, पैसेंजर ट्रेनों की संख्या यात्रियों की संख्या के अनुपात में नहीं है। इस कारण दिक्कत होती है। बड़े स्टेशन के यात्री तो मेल गाड़ियों में भी सफर कर सकते हैं। परेशानी तो छोटे स्टेशन वालों को है। सुबह यात्रियों की संख्या के हिसाब से बोगियों की संख्या भी पर्याप्त नहीं है। परेशानी तो होनी ही है।
महेंद्र सिंह, निवासी सांपका


पैसेंजर ट्रेनों की संख्या कम होने के अलावा खुद यात्री भी दूसरों के लिए परेशानी खड़ी करते हैं। सुबह-शाम दूध और छाछ के ड्रम और दूसरे सामान को लोग गेट में फैलाकर रखते हैं। इससे ट्रेन के अंदर जाना दूभर होता है। ऐसे लोगों की मनमानी पर भी रोक लगाकर कुछ राहत प्रदान की जा सकती है।
राजेंद्र यादव, गुड़गांव निवासी


गुड़गांव से प्रतिदिन द्वारका जाना होता है। कार्यालय पहुंचता हूं तो पूरी तरह तनाव में होता हूं। यह तनाव केवल ट्रेन के सफर के कारण होता है। चंद किलोमीटर की दूरी तय करने में ही पसीना छूट जाता है। वर्षों से परेशानी झेल रहा हूं। अब कहूं भी तो किससे?
सुरेंद्र कुमार, गुड़गांव निवासी

रेलवे दावे और वादे तो खूब करता है, लेकिन यात्रियों को सहूलियत नहीं दी जाती। वर्षों से रेवाड़ी-दिल्ली लाइन पर ट्रेनों की संख्या का रोना रोया जा रहा है, लेकिन आज तक समस्या हल नहीं हुई। कम से कम बोगियों की ही संख्या बढ़ा दी जाए। कब तक लोग जान जोखिम में डालकर सफर करते रहेंगे।
गिरवर सिंह, निवासी बोहड़ा कलां

रेवाड़ी से ही ट्रेन भरकर चलती है। रास्ते में तो बुरा हाल हो जाता है। रेवाड़ी के यात्रियों को तो फिर भी अंदर जगह मिल जाती है, लेकिन असली परेशानी तो रास्ते में पड़ने वाले छोटे स्टेशन के यात्रियों को होती है। समस्या बड़ी है। इसके बारे में रेलवे को गंभीरता से सोचना चाहिए।
संजय कुमार, निवासी रेवाड़ी

ट्रेनों में कोच ही नहीं हैं तो यात्री छत पर बैठकर कर सफर नहीं करें तो क्या करें। आठ कोच की ट्रेन में कितने यात्री सफर कर सकते हैं। रेलवे को भी पता है कि कोचों की संख्या परेशानी का कारण बन रही है। खूब हो-हल्ला हो चुका है, लेकिन परेशानी दूर करने को रेलवे कतई तैयार नहीं है।
सतीश कुमार, निवासी पटौदी

रेलवे को भी पता है कि कितने यात्री इस रूट पर सफर करते हैं। इसके बावजूद न तो ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जा रही है और न ही कोच की। लोगों को मरने पर मजबूर किया जा रहा है। दूसरे रूटों पर इतनी परेशानी नहीं है। दिल्ली के उस पार यात्री आराम से सफर करते हैं। इस क्षेत्र के साथ सौतला व्यवहार किया जा रहा है।
दिनेश, निवासी रेवाड़ी

परेशानी तो है पर
यात्रियों की परेशानी को लेकर स्टेशन अधीक्षक भी चिंतित हैं। उनके मुताबिक हर चीज की तय सीमाएं हैं। उन्होंने कहा कि दो महीने पहले पैसेंजर ट्रेनों की बोगियों को साफ-सफाई और दूसरे मेंटेनेंस कार्य के लिए भेजा गया था। सभी ट्रेनों में बोगियां कम नहीं है। अब बोगियां पर्याप्त हैं। उनके अनुसार छत पर बैठकर सफर बेटिकट यात्री करते हैं। टिकट वाले यात्रियों को ज्यादा परेशानी नहीं है।

रूट की ट्रेनें
ट्रेनों का नंबर यात्रियों की क्षमता कितने चढ़ते हैं
51916 900 7,000
54422 1000 6500
54012 950 7400
54414 1050 8500
54310 900 6500
54086 1050 8200
54416 960 8500
54411 1040 7200
54418 880 7000
54420 960 7500
(ये ट्रेनें दो फेरे लगाती हैं। ट्रेन की एक बोगी में 79 सीटें होती हैं, उस लिहाज से 11 से 16 बोगी तक की ट्रेन में संख्यात्मक रूप से इतनी ही सवारियां यात्रा कर सकते हैं। इसके बावजूद ट्रेनों की यह दशा है। आंकड़े दैनिक यात्रियों की ओर से मिले ब्योरे पर आधारित)
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