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एड्स के खिलाफ जज्बे को सलाम

Gurgaon

Updated Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
गुड़गांव। साइबर सिटी में भी एड्स रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। सिविल अस्पताल के आईसीटीसी सेंटर में ही इस समय 160 एड्स रोगी इलाज करा रहे हैं। एड्स को जानलेवा रोग माना जाता है, लेकिन कुछ लोगों ने यह भी साबित कर दिया है कि अगर जज्बा हो तो इससे भी लड़ा जा सकता है।
नेटवर्क फॉर पॉजीटिव पीपुल (एनपीपी) एक ऐसी संस्था है, जो पिछले कई सालों से एड्स के खिलाफ लड़ रही है। एनपीपी की प्रधान मीना बताती हैं कि उनके यहां प्रदेशभर से ढाई हजार से अधिक एड्स रोगी रजिस्टर्ड हैं। अकेले गुड़गांव में ही 600 एड्स रोगी जुड़े हैं। एनपीपी का काम एड्स रोगियों को उपचार उपलब्ध कराना और उनके भीतर इस रोग से लड़ने का जज्बा पैदा करना है। केवल गरीब या मध्यमवर्गीय ही नहीं, बल्कि उच्च वर्ग से ताल्लुक रखने वाले एड्स रोगी भी एनपीपी संस्था से जुड़े हैं। समाज में एड्स के प्रति जागरूकता लाना भी एनपीपी के उद्देश्यों का हिस्सा है। इसके लिए विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। खास बात है कि यह काम भी एड्स पीड़ित ही करते हैं।
18 साल से लड़ रही हूं एड्स से
एनपीपी सदस्या सुरेंद्र बताती हैं कि वह पिछले 18 साल से एड्स रोगी है। हालांकि इस रोग से लड़ना उनके लिए कभी भी आसान नहीं रहा। करीब पांच साल पहले जब एनपीपी से जुड़ी तो लगा कि इस रोग से लड़ा जा सकता है। आज न केवल खुद खुशहाल जीवन जी रही हैं, बल्कि अन्य लोगों को भी प्रेरित कर रही हैं। एक अन्य सदस्या ने बताया कि उनके पति की एड्स से मौत हो गई थी। उन्हें भी पति से ही एड्स हुआ था। एक समय था, जब मौत बिल्कुल पास लग रही थी। लेकिन एनपीपी से जड़ने के बाद मानो नया जीवन मिल गया। आज वह न केवल खुद इस रोग से लोहा ले रही हैं, बल्कि अन्य को भी इससे लड़ने के लिए प्रेरित करने में लगी हैं।
प्रवासियों के मामले ज्यादा
सिविल अस्पताल में इंटीग्रेटिड काउंसिलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर के इंचार्ज डॉ. विजय शर्मा और काउंसलर पूनम राठी बताती हैं कि उनके पास इस साल एड्स के करीब 160 नए मामले सामने आए हैं। एड्स की चपेट में आए लोगों से जब बात की जाती है तो मालूम होता है कि आज भी इसके लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजनों की सख्त जरूरत है। उन्होंने बताया कि ज्यादातर प्रवासी लोगों को जागरूक करना होगा, क्योंकि यही वर्ग एड्स की सबसे ज्यादा चपेट में आ रहा है।
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