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दावे के अनुसार नहीं हुए सुरक्षा बंदोबस्त

Gurgaon

Updated Tue, 27 Nov 2012 12:00 PM IST
गुड़गांव। आतंकी हमले के बाद जिस प्रकार से सुरक्षा को चाक-चौबंद करने की वकालत सरकार की ओर से की जाती है, वह कहीं नजर नहीं आ रही है। दिल्ली के नजदीक होने के कारण गुड़गांव को अति संवेदनशील माना जाता है। यही कारण है कि मुंबई हमले के बाद प्रदेश सरकार की ओर से यहां की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने का दावा कर दिया गया, लेकिन यह दावा पूरे चार साल बीतने के बाद भी सिरे नहीं चढ़ पाया है। उस समय सरकार की ओर से रेलवे स्टेशन से लेकर बस स्टैंड, मार्केट, बाजार और दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे और मेटल डिटेक्टर लगाने का दम भरा गया था। साथ ही मॉल जैसे स्थानों पर संदिग्ध वस्तुओं की तत्काल सूचना के लिए यहां बड़े-बड़े बैनर-पोस्टर लगाए गए थे। अब न तो यहां कोई बैनर नजर आता है और न ही रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर सीसीटीवी कैमरे आदि की व्यवस्था हो पाई। कुछ स्थानों पर मेटल डिटेक्टर लगे हैं, वह मात्र शोपीस बनकर रह गए हैं। ऐसे में यह सवाल बड़ा है कि क्या दावे और वादे कर ही पुख्ता सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी की जा सकती है।
लोगों की प्रतिक्रिया
मुंबई हमले के बाद भी देश में कई आतंकी घटनाएं हुई हैं। इससे जाहिर है कि हम आतंकवाद के खिलाफ अभी तक गंभीर नहीं हैं। इंटेलिजेंस एजेंसियों में कम्युनिकेशन भी गैप है।
-दिनेश वशिष्ठ, सेक्टर पांच आरडब्ल्यूए उपाध्यक्ष
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हमारी सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि हम किसी भी बात से सीख नहीं लेते। दावे और वादे तो बड़े-बड़े कर दिए जाते हैं, लेकिन उन्हें जमीनी तौर पर नहीं लागू नहीं किया जाता।
-मीनू सिंह, सेक्टर 3, 5, 6 आरडब्ल्यूए अध्यक्ष
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सही मायने में मुंबई सहित दूसरी आतंकी घटनाओें में शहीद हुए सैनिकों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी दी जा सकेगी, जब संसद पर हमले के आरोपी अफजल को गुरु को भी फांसी पर लटकाया जाएगा। आतंकवादियों सरेआम फांसी दी जानी चाहिए।
-कुंवर सूरजपाल सिंह अम्मू, समाजसेवी
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आतंकी घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया गया। आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने से बचती है सरकार। आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब देना होगा।
-दीपक सिंगला, व्यापारी
आतंकियों पर केस चलाने की बजाय उन्हें सीधे शूट करने का कानून बनाया जाना चाहिए। विश्व समुदाय में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश देने के लिए शूटआउट का कानून बनाना चाहिए।
तनु यादव, छात्र नेत्री

कसाब की फांसी को आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब देने की दृढ़ इच्छाशक्ति कहा जा सकता है। साथ ही देश की सुरक्षा के लिए खुफिया एजेंसियों में आपसी तालमेल जरूरी है।
-राहुल राव, युवा
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